आयुर्वेद को दूसरी पद्धतियों के साथ अपनाने में इन बातों का रखें ध्यान

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image credits: Sadhguru

आयुर्वेदिक दवाएं प्राकृतिक रूप से मिलने वाली जड़ी-बूटियों एवं घर पर उपयोग की जाने वाली सामान्य सामग्रियों के ज़रिये बनती हैं। इन्हें सही रूप में अपनाने पर कई बीमारियों को मूलरूप से खत्म किया जा सकता है तथा इनके कोई दुष्प्रभाव भी शरीर पर नहीं होते हैं। इन्हीं वजहों से आयुर्वेद को अन्य चिकित्सा पद्धतियों के साथ ‘मिक्स्डपैथी’ के रूप में अपनाया जा रहा है। (can we use homeopathy, ayurvedic medicine and allopathy simultaneously, can be taken together in hindi)

 

अगर आप भी अपने रोग का निवारण ‘मिक्स्डपैथी’ से कर रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान अवश्य रखें-

 

सही आयुर्वेदिक चिकित्सक चुनें 

आपके आयुर्वेद चिकित्सक का चुनाव उपचार में बड़ा प्रभाव डाल सकता है। किसी के द्वारा मौखिक रूप से बताई गयी दवाओं या झोलाछाप चिकित्सकों के चक्कर में कभी न पड़ें। आपके उपचार के लिए आपको ऐसे चिकित्सक की ज़रूरत होगी जो भारत सरकार द्वारा संगठित आयुर्वेद संस्थानों द्वारा मान्यता प्राप्त हो, आपके रोग का विशेषज्ञ हो तथा दूसरी पद्धतियों की पर्याप्त जानकारी भी रखता हो। ऐसा चिकित्सक मिलने पर उन्हें बीमारी का पूरा इतिहास बताएं, हाल में चल रहे उपचार और जांच बताएं, अन्य चिकित्सक द्वारा दिए गये सारे सुझाव बताएं तथा मन में उठने वाले सभी संदेहों के बारे में भी चर्चा करें।

 

एलॉपथी के चिकित्सक को भी सभी जानकारी दें 

एलॉपथी बीमारी से उबरने का सबसे तेज़ तरीका है और इसके लिए कई तरह दवाएं और उपचार आपको दिए जाते हैं। आयुर्वेद की ओर जाने से पहले अपने चिकित्सक से चर्चा ज़रूर करें तथा उपचार के ऐसे मेल के उनके अनुभव भी पूछें। अगर आपकी बीमारी गंभीर है तो चिकित्सक आपको बेहद सावधान रहने के लिए कह सकते हैं। ऐसे में उनसे वर्तमान में आपके द्वारा ली जा रही आम आयुर्वेदिक दवाओं का भी ज़िक्र करें। गंभीर बीमारियों में एलॉपथी की दवाएं आयुर्वेदिक दवाओं से प्रतिक्रिया दिखा सकती हैं।

 

आयुर्वेद की क्रियाएँ अपनाने के पहले चिकित्सक से चर्चा करें 

बीमारियाँ यही दर्शाती हैं की हमारे शरीर के तन्त्र सही तरह से काम नहीं कर रहे। कई बार लोग शरीर को सही करने का बीड़ा खुद ही उठा लेते हैं और आयुर्वेद द्वारा बताई जाने वाली क्रियाओं को बिना पर्याप्त जानकारी लिए आजमाने पहुँच जाते हैं। हो सकता है की आप ह्र्द्यरोगी हों और दिल को स्वस्थ करने के चक्कर में किसी आयुर्वेदिक सेण्टर पहुँच जाएं। ऐसी जगहों पर सही मार्गदर्शन न मिलने से आपकी बीमारी और भी गंभीर हो सकती है। इसलिए आयुर्वेद की किसी भी क्रिया या कर्म को अपनाने से पहले आयुर्वेदिक और एलोपैथिक चिकित्सक से ज़रूर बात करें।

 

दवाएं बंद करने से पहले उचित परामर्श लें 

आयुर्वेदिक दवा शुरू करने के दो हफ्ते के अंदर आपको अगर राहत मिल जाए तो इसका मतलब यह नहीं की एलॉपथी की दवा बंद करने का समय आ चूका है। इसी तरह एलॉपथी से तुरंत आराम मिलने पर आयुर्वेदिक दवाओं को त्यागना भी समझदारी नहीं होगी। ऐसा करने से पहले अपने चिकित्सकों से पूरी चर्चा करें और दवा बंद करने की अपनी इच्छा को सामने रखें। आपके चिकित्सक जांचों के आधार पर आपको परामर्श देंगे, न की आपके विचारों के अनुसार, इसलिए उनकी बात को सहिष्णुता से सुनें और भरोसा भी रखें।

 

अति न करें 

जल्दी राहत पाने के चक्कर में एक साथ कई तरह के उपचार न शुरू करें। आपका शरीर अपनी गति से ही ठीक होगा और इसे इतना समय देना ज़रूरी है। अक्सर हम लोगों के कहने पर एलॉपथी, आयुर्वेद, घरेलु नुस्खे इत्यादि का एक साथ प्रयोग करने लगते हैं और खुद को ही नुकसान पहुंचा बैठते हैं। ऐसा करने की जगह शरीर को पूरा आराम और उचित व्यायाम दें तथा अपने दिन-प्रतिदिन के अनुभवों को चिकित्सक से साँझा करते रहें।