जानें रौशनी का प्रदूषण हम पर कैसे करता है असर

71
Image Credits: International Sky Association

इंसान रात के अँधेरे में ठीक तरह से देख नहीं पाते। इसी वजह से आधुनिक जीवन में हमारी कोशिश रहती है की रात में हम अपने आस पास प्रकाश बनाए रखें। थोड़ी बहुत रौशनी बेशक हमारे लिए सुरक्षा हो सकती है लेकिन बहुत ज्यादा रौशनी से शरीर पर नकरात्मक प्रभाव पड़ता है। कई बार रात में रौशनी के साथ सम्पर्क में रहना मोटापे, अवसाद, अनिद्रा, कैंसर व् अन्य रोगों की वजह भी देखा गया है।

आइये जानें रात में रौशनी में रहने की आदत आपके स्वास्थ्य पर कैसे असर कर सकती है-

 

शरीर की प्राकृतिक घड़ी 

हमारे शरीर में एक प्राकृतिक घड़ी है जो 24 घंटों के चक्र में चलती है। इसी की मदद से शरीर कई तरह की प्रक्रिया कर पाता है- मस्तिष्क की तरंगें, हॉर्मोन स्त्राव व् अन्य प्राकृतिक प्रक्रियाएं। इस घड़ी में बदलाव आने से नीद से लेकर सभी मूल प्रक्रियाएं बाधित होने लगती है। यह अनिद्रा, अवसाद, कैंसर और ह्रदय रोग की वजह बनता है।

मेलाटोनिन 

यह एक प्राकृतिक रूप से पैदा होने वाला हॉर्मोन है जो अँधेरे में बनता है तथा रौशनी में कम होता है। यह कई प्रक्रियाओं के लिए ज़रूरी होता है तथा मेटाबोलिज्म को सुद्रढ़ करता है। रात में अँधेरा रखना इस हॉर्मोन के सही स्तर बनाए रखने में मददगार हो सकता है।

नींद से जुडी समस्याएँ 

दिन खत्म हो जाने के बाद भी कृत्रिम रौशनी में रहना हमारे अंदरूनी चक्रों को प्रभावित करता है। यह रौशनी मस्तिष्क को एहसास करवाती है की दिन अब भी चल रहा है। इस तरह आपकी नींद सही समय पर न आकर देर से आती है और आपके शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है। यही वजह से रात में सही समय पर सोना आपको अनगिनत समस्याओं से बचा सकता है।

ग्लेरिंग या आँखों का चौंधियाना 

बहुत तेज़ रौशनी, जो अक्सर रात में चलती गाड़ियों की हेडलाइट में होती है आँखों को डिसेबिलिटी ग्लेर दे सकती है। ऐसे में आपकी आँखों में इतनी रौशनी आ जाती है की आप आँखें बंद कर लेते हैं या गर्दन घुमा लेते हैं। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बड़ी उम्र के लोगों में यह खतरा और भी होता है क्यूंकि समय के साथ हमारी आँखें अँधेरे से रौशनी में तेज़ी से बदलाव कर पाने की काबिलियत खो देती है।

अत्यधिक अँधेरा 

पुराने समय में तथा कई आधुनिक योजनाओं में भी तेज़ रौशनी का उपयोग कर शत्रु की देखने की क्षमता कम की जाती है। इसकी वजह यह है की जब आप तेज़ रौशनी को देखते हैं तो इसके बाद कुछ देर तक आप कम रौशनी या अँधेरे में कुछ भी नहीं देख पाते। हमारे शहरों में भी तेज़ रौशनी का बहुत अधिक उपयोग होता है जिससे अक्सर कम रौशनी वाले इलाके गलत कामों के अड्डे बन जाते हैं। यह शहर में रहने वालों के लिए खतरनाक होता है।