जानिए कैसे युगांडा के लोग हैं दुनिया में सबसे फिट

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image credits: Uganda Solidarity Summit on Refugees

जेनिफर रोजाना अपने ऑफिस तक एक घंटा पैदल चलकर जाती हैं। काम के दौरान फर्श साफ़ करते हुए वे दो घंटा खड़ी रह कर बीताती है। शाम को लौटने पर उन्हें फिर एक घंटा पैदल चलना होता है। जेनिफर की तरह अन्य कई यूगांडावासी तंग जेब या सेहत का ख्याल रखकर शारीरिक व्यायाम को अहमियत देते हैं। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने ऐसे ही करोड़ों लोगों को देखकर यूगांडा को दुनिया का सबसे सक्रीय और स्वस्थ राष्ट्र करार दिया है।

 

आइये जानें ‘वर्ल्डस फिटेस्ट कंट्री’ से हम सेहत के कौनसे गुर सीख सकते हैं-

 

बेहतर जीवनशैली 

शारीरिक सक्रियता के पैमानों को नापने के लिए हुए शोधों में पाया गया की युगांडा के सिर्फ 5.5 प्रतिशत लोग ही ज़रूरत से कम व्यायाम लेते हैं। मोजांबिक, तंज़ानिया, लेसोथो और टोगो भी पीछे नहीं है।

दूसरी ओर कुवैत, अमेरिकन सामोआ, सऊदी अरब और इराक में लोगों की दिनचर्या बेहद निष्क्रिय रहती है। दुनिया की एक चौथाई आबादी पर्याप्त व्यायाम नहीं ले रही है। भारत के हालात विश्व औसत से भी बुरे हैं; हमारे देश में 34 प्रतिशत वयस्क पर्याप्त व्यायाम नहीं ले रहे हैं।

WHO के शोधों के अनुसार जिन देशों में लोग कम कमाते हैं, वहां शारीरिक सक्रियता ज्यादा देखी जाती है। फिर भी यूगांडा अपने समानांतर देशों की तुलना में ज्यादा सक्रीय पाया गया।

 

19 से 64 साल के वयस्कों के लिए व्यायाम निर्देश 

इतने व्यायाम की आपको ज़रूरत है:

  • एक हफ्ते में 150 मिनट माध्यम श्रेणी का शारीरिक व्यायाम तथा 75 मिनट तीव्र एरोबिक व्यायाम।
  • हफ्ते में दो या ज्यादा दिन शरीर की सभी मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम।
  • लम्बे समय तक बैठे रहने के बीच हल्के फुल्का टहलते रहना।

 

खेती 

यूगांडा के शहरों से दूर गाँवों में 70 प्रतिशत आबादी खेती से कमाती है। आजीविका का यह माध्यम भी लोगों को फिट रखने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। साथ गाय कीसफाई, कॉफ़ी की झाड़ियों की देखरेख तथा केले के पेड़ों की देखभाल लोगों के लिए स्वस्थ रहने का तरीका बन चुकी है। 70 साल के अबिआसली रोजाना इसी तरह 8 घंटे काम करते हैं और दर्दरहित जीवन जीते हैं।

 

जॉगिंग 

बेहतर कमाई वाले इलाकों में स्वस्थ रहना इतना आसान नहीं है। यूगांडा की राजधानी कम्फाला में चंद ही पार्क है, सडकों के बाजु पर फुटपाथ नहीं है तथा कई कारें बड़ी मात्रा में धुँआ छोडती हैं। ऐसे में जॉगिंग के लिए बहादुरी की ज़रूरत है।

फिर भी जैसे-जैसे शहर विकसित हो रहे हैं, लोग सड़कों पर टहलने के लिए निकल रहे हैं तथा बेहतर सुविधाओं की मांग भी कर रहे हैं। फिटनेस ग्रुप्स तेज़ी से बढ़ रहे हैं और लोग व्यायाम को प्राथमिकता देने की कोशिश कर रहे हैं।

 

बिना मैदान के स्कूल 

शहरों में बनने वाले स्कूल के टाईमटेबल से खेलों को हटा दिया गया है तथा पूरा ज़ोर पढाई पर दिया जा रहा है। फिर भी कई फिजिकल एजुकेशन शिक्षक पूरी निष्ठा से बच्चों में खेल भावना विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। गाँवों में जहाँ पर्याप्त जगह है लेकिन शिक्षक नहीं है, वहां भी ये पहुंचकर बच्चों को खेलों की शिक्षा दे रहे हैं।

 

यूगांडा की पहली साइकिल लेन 

7 जुलाई 2018 को यूगांडा के प्रधान मंत्री योवेरी मुसेवेनी ने विश्व शारीरिक सक्रियता दिवस मनाने का संकल्प लिया। इसी दिशा में साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए कम्फाला के प्रशासन ने 500 मीटर की लेन का शुभारंभ किया।

 

कोई विशिष्ट गैजेट नहीं 

यूगांडा के लोग फिट रहने के लिए किसी गैजेट पर निर्भर नहीं है। शहरी लोगों में बदलते खान-पान और व्यायाम के प्रति उदासीनता थोड़ी चिंता ज़रूर पैदा करती है लेकिन यूगांडा की सरकार के द्वारा उठाए गये कदम प्रशंसनीय हैं।

 

यूगांडा की अर्थव्यवस्था भारत के मुकाबले बहुत छोटी है। विकास, आमदनी और सुविधाओं की कमी के बीच अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। इस देश के लोग हमें भी सभी मुश्किलों को पीछे छोडकर स्वास्थ्य को महत्व देने की सीख देते हैं।