स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है करें बगीचे की भी देखभाल – 10 टिप्स

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image credits: Zandalus.net

आम मान्यताओं के विपरीत मॉनसून में बगीचे को खास देखभाल की ज़रूरत होती है। इस मौसम में पौधों को भरपूर पानी ज़रूर मिलता है पर इस पानी से मिटटी के पोषक तत्व बहने लगते है जिससे पौधों को उचित खुराक नहीं मिल पाती। अगर आपने टेरेस गार्डन बनाया है या गमले में पौधे लगाएं है तो आपके पौधों को देखभाल की और ज़्यादा ज़रूरत है।

 

आइये जानें, कैसे थोड़ी सी देखभाल से मॉनसून में आपके बगीचे को और भी जीवंत बनाया जा सकता है-

 

  1. घर के आस-पास की नालियों को साफ़ और इनके पानी को गतिशील रखें। रुका हुआ पानी पेड़-पौधों की जड़ों को ख़राब कर सकता है और कई कीटों को भी जन्म देता है। इसलिए ज़रूरी है की बारिश में गिरा पानी कहीं रुका न हो तथा नालियां साफ़ तथा ढकी हों।
  2. मॉनसून में सबसे आसानी से खिलने वाले तथा खूबसूरती फ़ैलाने वाले पौधे डहेलिया जैसे बल्ब वाले फूल तथा रजनीगंधा है। यह मॉनसून की शुरुआत से दिसंबर तक बगीचे की शोभा बढ़ाते हैं।

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3. बगीचे और इसमें उगे पेड़-पौधों के सबसे अच्छे मित्र केंचुए ही माने जाते हैं। ये मिटटी में सुराख़ कर हवा की आवाजाही बढ़ाते हैं, पोषक तत्वों को अच्छी तरह मिला देते हैं और मिटटी में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ाकर पौधों के विकास में मदद करते हैं। अगर आपके बगीचे के एक ही हिस्से में बहुत सारे केंचुए हैं तो इन्हे उठाकर पुरे बगीचे में फैला दें।

4. पौधों के आस-पास गहरे गड्ढे न रहने दें। इनमे पानी रुककर पेड़ों को नुकसान पहुंचासकता है। पेड़ों से निकलने वाले कचरे के छोटे टुकड़े कर पौधों के आस-पास फैला दें। यह अतिरिक्त पानी को पेड़ों तक जाने से रोकेगा तथा पेड़ों को अतिरिक्त पोषण देगा।

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5. नए पौधे लगाने की सोच रहे हैं तो पौधे के बारे में सभी जानकारियां ज़रूर ले लें। ऐसे ही पौधे लगाएं जो कम धुप, तेज़ बारिश तथा नम मिटटी को सेह पाएं। नाज़ुक पौधों को उचित देखभाल दें और तेज़ बारिश से बचाएं।

6. मेंढकों को बगीचे से भगाएं नहीं। इन्हें बगीचे में बहते पानी के रास्ते आने दें, ये कीड़ों को खाते हैं और आपके बगीचे को कीट-मुक्त करते हैं।

7. अगर मॉनसून के दौरानपौधों की पत्तियां पीली पड़ने लग जाएं तो जल्द ही मिटटी की ऊपरी सतह में खाद और सूखे पत्तों के टुकड़े मिलाएं।

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8. छंटाई और खाद डालना, बारिश में यह दो कार्य बहुत आवश्यक है। इस मौसम में पौधे तेज़ी से बढ़ने लगेंगे इसलिए छंटाई बार-बार करने की ज़रूरत है। तुलसी के पौधों से मंजरी हटाएँ, पौधों से पीले पत्ते हटाएँ तथा अन्य ज़रूरी क्रियाओं को और भी नित्य कर दें। मॉनसून के दौरान पेड़ खाद भी तेज़ी से सोखते हैं।

9. मॉनसून में कभी भी पौधों को पानी देने की सलाह नहीं दी जाती जब तक मिटटी बहुत सूखी न हो गयी हो। पानी देना भी पड़े तो बहुत सारा पानी डालने से बचें।

10. फ्लॉवरबेड(फूलों का बिस्तर) बना रहे हैं, तो फूल के पौधों के लिए बनाया गया मिटटी का चबूतरा थोड़ा ऊँचा बनाएं तथा आस-पास थोड़ी गहराई रखें। इस तरह पौधों को सही मात्रा में पानी और पोषण मिलेगा। मिटटी और खाद की उपरोक्त मात्रा के मिश्रण से चबूतरा बनाएं और नए पौधे लगाएं।

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बगीचे के यह देखभाल करने के नुस्खे बहुत आसान पर बहुत ज़रूरी है। दरअसल प्रकृति क्षमाशील है और आपको कठोर नियमों के पालन की ज़रूरत नहीं। ज़रूरी है की प्रकृति की इन तत्वों से जुड़ें और खुद को खुश तथा ऊर्जावान महसूस करें।