बेहतर जीवन के लिए अपनाएं सकरात्मक बॉडी इमेज 

35
Image Credits: Amador Valley Today

हमारे विचार हमारी भावनाओं को जन्म देते हैं तथा यह दोनों पहलु मिलकर आपके जीवन में कई बातें तय कर देते हैं। यही वजह है की अपने बारे में नकरात्मक भावनाएं रखना आपके आत्मविश्वास और कार्यकुशलता पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। जीवन में ग्लानी, संदेह व् खराब अनुभव अक्सर हमारी बॉडी इमेज बदल देते हैं।

हाल ही में हुए एक शोध में पाया गया की अगर आप स्वयम को साँसों या दिल की धडकन पर ध्यान देना सीखाते हैं तो आपके मन में अपने लिए सकरात्मक बॉडी इमेज बेहतर होने लगती है। बॉडी इमेज नामक जर्नल में छपे इस शोध के अनुसार शरीर के महत्वपूर्ण मापों पर ध्यान देने से हमारी स्वयम के प्रति सोच भी बदलने लगती है।

शोधकर्ताओं ने पाया की शरीर के अंदर चल रही गतिविधियों के प्रति जागृत रहने से स्वयम के प्रति सोच में बदलाव आता है। इस तरह की ध्यान पूर्वक क्रियाएं आपको जीवन के अन्य अनुभवों के दौरान भी जागृत रखती हैं।

इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने 646 वयस्कों को नियुक्त किया तथा उनके आत्मविश्लेषी स्वभाव- जैसे भूख, धडकन, सांस के प्रति जागृत रहने का स्वभाव, और बॉडी इमेज के बीच सम्बन्ध को समझने की कोशिश की।

इस शोध में 18 से लेकर 76 की उम्र के महिलाओं और पुरुषों को शामिल किया गया और पाया गया की किसी भी उम्र और लिंग का व्यक्ति अगर शरीर के महत्वपूर्ण बिन्दुओं की ओर जागृत रहता है तो वह स्वयम के प्रति सकरात्मक विचार रखता है।

यह भी देखा गया की भूख लगने पर खाना खाना, ज़रूरत लगने पर आराम करना आदि ज़रूरतों को जब व्यक्ति गौर कर अपनाता है तो वह शरीर के प्रति ज्यादा उदार रहता है तथा मोटे होने या खुबसुरत न होने जैसी बातों को मन में नही रखता।

हालाँकि यह सम्बन्ध बहुत जटिल पाया गया। फिर भी अगर आप अपनी बॉडी इमेज को बेहतर करना चाहते हैं तो आज से ही ध्यान क्रिया की मदद से अपने शरीर की हलचलों पर ध्यान देना शुरू करें। अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें और दूसरों के द्वारा बताए गए पैमानों की जगह शरीर द्वारा बताई जा रही ज़रूरतों पर ध्यान दें।