मानसिक आघात से कैसे उबरें

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image credits: KQED

किसी डरावने या विक्षुब्ध कर देने वाले अनुभव के बाद तनावग्रस्त और घबराहट से भर जाना सामान्य है। कई बार दुर्घटना, बड़ी चोट, प्रताड़ना, यौन शोषण आदि घटनाएं मन पर गहरा प्रभाव बनाती है जो कुछ हफ्तों से लेकर जीवनभर तक बना रह सकता है। इसके अलावा PTSD नामक घबराहट रहने का रोग भी लोगों के जीवन में जड़ें बना सकता है।

शोधों की मानें तो युवावस्था में ऐसे अनुभव होने की सम्भावना सबसे ज्यादा होती है। आगे बढ़कर 5-10 सालों में इसके प्रभाव कम होने की संभावना रहती है; वेदना से उबरने की गति उन व्यक्तियों में ज्यादा होती है जो उपचार लेते हैं।

 

अगर आप भी जीवन के कड़वे अनुभवों से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, तो मानसिक वेदना के लक्षण और उपचार के बारे में ज़रूर जानें-

 

मानसिक आघात के लक्षण क्या हैं?

 

आघात की वजह से कई लोगों के मन में तनाव उत्पन्न करने वाले विचार, दृश्य और भावनाएं आ सकती हैं। ये सभी अत्यधिक तनाव से उबरने के संकेत हैं।

 

आघात के बाद सबसे प्रमुख लक्षण ये होते हैं-

  • अकेले रहने, प्रियजनों को हानि होने या असम्भव परिस्तिथियों से डर या घबराहट होना।
  • उन विचारों या परिस्थिति से दूर रहने की कोशिश करना जो आघात से जुड़े अनुभव की याद दिलाते हैं।
  • तेज़ आवाज़ या अचानक हुई हलचल से डर जाना।
  • मांसपेशियों में तनाव, कांपना, पसीना आना, थकान होना आदि।
  • भूख, यौन सम्बन्ध आदि सामान्य क्रियाओं में दिलचस्पी घटना।
  • अकेलेपन व् दुःख का एहसास होना।
  • सोचने या ध्यान लगाने में मुश्किल होना।
  • आघात के विचारों में ज्यादातर समय उलझे रहना।
  • ग्लानी महसूस करना तथा खुद से भरोसा उठाना।
  • चिडचिडापन और गुस्सा रहना।
  • “मैं ही क्यों” जैसे सवाल मन में उठाना।

 

इसके अलावा अगर आपको आघात से जुड़े बुरे सपने आते हैं या ये सभी लक्षण आपमें बहुत तीव्र हैं तो आपको PTSD हो सकता है।

 

आघात से कैसे उबरें?

आघात के बाद एक मनोचिकित्सक की राय लेना आपकी बड़ी मदद कर सकता है। साथ ही आप इन उपायों को अपना सकते हैं-

 

  • सुरक्षा को प्राथमिकता दें। अगर आप इस समय ऐसी परिस्थिति में हैं जहाँ आप असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो ज़रूरी कोशिश कर इससे बाहर निकलें। हो सकता है यह परिस्थिति शारीरिक प्रताड़ना की हो, मानसिक प्रताड़ना की हो या सामाजिक प्रताड़ना की हो। किसी की मदद लेने में भी हिचकिचाएं नहीं।
  • किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपने आघात का अनुभव साझा करें।
  • परिवार और दोस्तों से बात करना भी मदद कर सकता है। खुद को अकेला करने की जगह परिवार पर भरोसा रखें।
  • जानें की आपके साथ हो रही समस्याएँ आघात के बाद सामान्य हैं तथा आप इससे उबर सकते हैं।
  • खुद को समय दें। समय के साथ डर और विचारों को फीका पड़ने दें और जीवन में आगे बढ़ें। खुद पर जबरदस्ती न करें।
  • सरल और दिल खुश करने वाले कार्य करें- टहलना, खुबसुरत जगहों में घूमना, दोस्तों से मिलना।
  • समय समय पर आघात स जुडी परिस्थिति का सामना करने की कोशिश भी करें। इस दौरान खुद पर जोर न डालें। इस कोशिश को धीरे-धीरे अपनाना आपको डर से उबरने में मदद करेगा।
  • शराब और ड्रग्स पर निर्भर न रहें; इनसे आपकी हालत और बिगड़ सकती है। इसकी जगह तनाव कम करने के अन्य तरीके ढूंढें।

ध्यान रखें, किसी विशेषज्ञ द्वारा दी गयी देखभाल निजी कोशिशों से कहीं ज्यादा असरदार हो सकती है इसलिए चिकित्सक से उपचार करने का विकल्प जितनी जल्दी हो, अपनाएं। अगर आपके आस-पास ऐसे लोग हैं जो मानसिक आघात से गुज़रे हैं तो उनके साथ कुछ समय बिताएं तथा उनका सहारा बनें।