कोई भी शारीरिक क्रिया सीखें इस तरह आसानी से

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image credits: WIBW

सीखने और व्यायाम करने की क्रिया के बीच गहरा सम्बन्ध है। कोई भी नयी शारीरिक गतिविधि को पुरे ध्यान से करने से आपके दिमाग और स्नायु तन्त्र की कोशिकाओं का विकास होता है वहीं विकसित मस्तिष्क शारीरिक क्रियाओं को आसानी से कर पाने में सक्षम होता है। यह क्रिया योग, संगीत यंत्र वादन. कराटे या सीढ़ी चढने जैसे हो सकती हैं। पर क्या मस्तिष्क का विकास और शारीरिक क्रिया आसानी से कर पाने का कोई सरल रास्ता है? आइये जानते हैं-

 

शारीरिक क्रिया का विज्ञान

हमारा स्नायु तन्त्र मस्तिष्क से मांसपेशियों तक संकेत पहुंचाने का काम करता है। इसी की वजह से हम कोई भी शारीरिक क्रिया कर पाते हैं। संकेत ले जाने वाली इन नसों के बाहर तारों के आवरण की तरह एक परत होती है जो संकेत ले जा रही उर्जा को नस के बाहर जाकर व्यर्थ होने से रोकती है। आप एक क्रिया का जितना अभ्यास करते हैं, यह आवरण उतना ही मोटा होता चला जाता है और आप कम उर्जा में ज्यादा समय क्रिया कर पाते हैं।

 

अभ्यास का महत्व 

किसी भी शारीरिक क्रिया का अभ्यास जब आप रोजाना करते हैं तो नसों का आवरण मोटा होने लगता है तथा मांसपेशी तक जाने वाली नसों का सम्पर्क भी घना और गहरा होने लगता है। मस्तिष्क और मांसपेशी के बीच बढ़े इस सम्पर्क की वजह से ही एक अनुभवी और एक प्रारंभी व्यक्ति के बीच में फर्क होता है।

पर अभ्यास हमेशा शारीरिक हो यह ज़रूरी नहीं। पिछले दशक में हुए कई शोध यह दर्शाते हैं की मानसिक अभ्यास भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है। अमेरिका में हुए एक शोध में बास्केटबॉल खिलाड़ियों के दो समूह बांटे गये। दोनों ही समूहों को एक नयी विशिष्ट क्रिया का अभ्यास करवाया गया। अगले दिन से एक समूह रोज़ाना उस क्रिया का अभ्यास शारीरिक रूप से करता रहा वहीं दूसरा समूह शांत मन से क्रिया को मानसिक रूप से ही करने का अभ्यास करता रहा। शोध के अंत में पाया गया की दोनों ही समूह में क्रिया का कौशल लगभग बराबर रहा।

 

किसी भी क्रिया को आसानी से कैसे सीखें 

अगर आप किसी वाद्ययंत्र, मार्शल आर्ट्स, नृत्य आदि सीख रहे हैं तथा इसे बेहतर रूप से और जल्दी सीखना चाहते हैं तो इन सुझावों पर ज़रूर अमल करें-

  • अभ्यास के पहले कुछ मिनटों के लिए ध्यान, प्राणायाम या अन्य किसी क्रिया की मदद से मन को शांत करें।
  • जिस जगह पर अभ्यास कर रहे हैं, वहां ध्यान भटकाने वाले किसी भी तरह की कारक को न रहने दें। ज़रूरत पड़े तो घर से निकलकर पास के पार्क या क्लास में बैठकर अभ्यास करें; ऐसा करने से आप घर के अंदर चल रही विभिन्न समस्याओं से मानसिक रूप से दूर हो पाएंगे।
  • अभ्यास के लिए ज़रूरी वातावरण बनाएं; सही रौशनी, साफ़ हवा, सही तापमान, पानी की व्यवस्था आदि पर गौर करें और असहजता के सभी कारणों को हटाएं। इसके लिए आपको विभिन्न प्रसाधनों को जुटाने की ज़रूरत नहीं है। जिन कारणों पर आपका नियन्त्रण नहीं हैं उनके आस-पास काम करने की कोशिश करें।
  • अभ्यास के दौरान पूरा ध्यान क्रिया पर लगाएं। मांसपेशी की हलचल के साथ आप अपने अंदर उठ रहे आनन्द पर भी ध्यान दें।
  • अभ्यास के बाद खाली समय में काल्पनिक अभ्यास करें। यह आपकी कार्यकुशलता को कम उर्जा में ही बढाने का काम करेगा।