एकाग्रता व ध्यान बढ़ाने के लिए कीजिए कीर्तन ध्यानक्रिया

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SA-TA-NA-MA
image credits: quiet mind meditation

मंत्रों का ध्यानक्रिया में खास महत्व है। मंत्र दरअसल गीत की तरह ही शब्दों का मेल होते हैं पर इनके निर्माण से खास विज्ञान जुड़ा है। ज्यादातर मंत्र इस तरह बनाए जाते हैं की इनके अर्थ में दिमाग उलझाए बिना शब्दों के उच्चारण पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके।

 

ऐसी ही एक मंत्रोच्चारण क्रिया है कीर्तन ध्यान क्रिया जिसके अभ्यास से आपको शांति और संतुलन का अनुभव होगा-

 

  1. सुखासन (पालथी मारकर सामान्य अवस्था में) बैठें तथा रीढ़ सीधी रखें। अपनी आँखें बंद करें और फिर हल्की सी खोल लें। अपनी नजरों को नाक के छोर पर केन्द्रित करें। ऐसा करने पर अशांत मन को शांत करने में सहायता मिलेगी।

 

  1. हाथों को गोद में रखें तथा एक के ऊपर रखकर क्रॉस बना लें। अब सा-ता-ना-मा मंत्र के साथ काम करने के लिए तैयार हो जाएं।

सा-अनंत

ता-जीवन

ना-बदलाव

मा-पुनर्जन्म

 

  1. अब मंत्रोच्चारण शुरू करें। मंत्र के हर हिस्से के उच्चारण पर आपके हाथ के अंगूठे ऊँगलीयों को छुएंगे।

सा-अंगूठे से पहली ऊँगली(अनामिका) के छोर को छुएँ

ता- अंगूठे से मध्यमा के छोर को छुएँ

ना-अंगूठे से तर्जनी के छोर को छुएँ

मा-अंगूठे से कनिष्का के छोर को छुएँ

 

  1. इस तरह उच्चारण को 11 मिनट तक दोहराएं। अंत में गहरी सांस लें, आँखें बंद करें तथा पूरी तरह स्थिर होकर आराम की अवस्था में आ जाएँ। इस तरह आपके मन के दोनों हिस्से संतुलित हो जाएंगे तथा आप शांति अनुभव करेंगे।

 

यह आसान सी ध्यान क्रिया आपकी एकाग्रता और शान्ति को बढ़ाकर आपके जीवन में सकरात्मक बदलाव ला सकती है। इसका नियमित अभ्यास करें और अपने कार्यक्षेत्र और निजी जीवन में आने वाले बदलावों का स्वागत करें।