पीठदर्द, सिरदर्द व आलस से मुक्ति दे परिवृत्त जणू शीर्षासन योग

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image credits: Iyengar Yoga Association of Canada

परिवृत्त जणू शीर्षासन एक दिलचस्प आसन  है जो पश्चिमोत्तासन जैसे आगे झुकने वाले आसान आसनों को नया रूप देता है । इसका अभ्यास आपको और भी ज्यादा लाभ तथा और भी आराम देगा । अगर आप नियमित रूप से योगाभ्यास कर रहे हैं तथा आगे झुकने वाले आसनों का नियमित अभ्यास करते हैं तो इस आसन को ज़रूर आजमाएँ। (yoga for backache, headache, laziness, kamardard, sirdard, aalas in hindi, Parivrtta Janu Sirsasana, Revolved Head-to-Knee Pose)

 

आइये जानते हैं परिवृत्त जणू शीर्षासन के अभ्यास की क्रिया-

 

  1. ज़मीन पर बैठें। अपने पैरों को सामने फैलाएं तथा रीढ़ को सीधा रखें।
  2. अपने बाएँ घुटने को मोड़ें तथा एडी को पिडुभाग के बाएँ हिस्से से लगाएं।
  3. दाएं घुटने को मोड़कर एड़ी को दाएं कुल्हे की ओर सरकाएं।
  4. सांस छोड़ें, दाई ओर झुकें तथा अपने दाएं कंधे के पीछे के हिस्से को दाएं घुटने के अंदर के हिस्से से टीकाएँ।
  5. दाई बाजू को ज़मीन पर इस तरह रखें की हथेली ऊपर की ओर रहे।
  6. अपनी सीधी हथेली को पैर के अंदर की ओर मोड़ें और पकड़ने की कोशिश करें।
  7. गहरी सांस भरते हुए बाएँ पैर पर दबाव बनाएँ। सांस छोड़ने पर दाएं घुटने को और लम्बा फैलाएँ।
  8. अब गहरी सांस भरके बाएँ हाथ को छत की ओर फैलाएँ। दोबारा सांस भरने पर हाथ को सीधे पैर के पंजे तक लेकर जाएं तथा इसे पकड़ें। अपनी गर्दन घुमाएँ और छत की ओर देखें।
  9. इसी अवस्था में एक मिनट तक रुकने की कोशिश करें।
  10. इस आसन से बाहर आने के लिए यूँही धड़ सीधा न करें, पहले बाएं हाथ को वापस लेकर जाएँ तथा धड़ को सामने की ओर मोड़ें। फिर धड़ को पैर की लम्बाई के मध्य तक उठाएं, फिर ही सामान्य अवस्था में वापस आएं।

 

यह पूरा आसन आपके बाएँ पैर की मांसपेशी के लचीलेपन और ताकत पर निर्भर करेगा। इसका अभ्यास बेहतर व् आसान करने के लिए आप उपविस्था कोणासन, अधोमुख स्वानासन, उत्तानासन व् वृक्षासन का अभ्यास भी कर सकते हैं।

 

ध्यान रखें, अगर आपको दस्त हो रहे हों तो इस आसन का अभ्यास न करें। इसका अभ्यास नियमित रूप से करने से आप ये लाभ पा सकते हैं-

 

  • पीठदर्द से निजात मिलती है।
  • अवसाद, आलस, अनिद्रा और सिरदर्द दूर होते हैं।
  • रीढ़, कंधों और जांघों की मांसपेशियों में खिचाव पैदा कर तनाव घटाता है।
  • पेट के अंगों जैसे लीवर, किडनी आदि को सक्रीय करता है।
  • पाचन तन्त्र दुरुस्त करता है।