वर्षा ऋतु में पालन करें इस आहार व दिनचर्या का, ताकि रहें बीमारियों से दूर

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आयुर्वेद का लक्ष्य मनुष्य को स्वस्थ बनाए रखना है। कई ग्रंथों की श्रृंख्ला से बना आयुर्वेद लगभग हर कार्य तथा क्रिया को सर्वश्रेष्ठ रूप से सम्पन्न करने की राह दिखाता है। इसके लिए यह विज्ञानं मौसम तथा समय के अनुरूप आहार और दिनचर्या का पालन करने की सलाह भी देता है।

 

आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में सूर्य उत्तरायण होता है और इस समय व्यक्ति का शरीर कमज़ोर होता है। इस मौसम में पेट संबंधी समस्याओं की आशंका ज़्यादा होती है। इस मौसम में वात दोष तीव्र होता है और पित्त दोष का संचय होता है जिससे आपका शरीर कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ सकता है। इसलिए बारिश के इस मौसम में एक खास ऋतुचर्या के पालन की आवश्यकता होती है। 

 

वर्षा ऋतु में आहार

बारिश में पीने  उपलब्ध पानी सामान्य से भारी होता है जो शरीर के मेटाबोलिज्म को कमज़ोर करता है। इस समय भूख लगना भी कम हो जाता है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए निम्न आदतें अपनाएं-

  • हल्का तथा सादा भोजन करें। चावल, गेंहू या जौ से बने आहार खाएं।
  • गाय के घी, कम वसा का मांस, दालें, हरा चना, चावल तथा गेंहू से बने व्यंजन को अपने नियमित आहार में शामिल करें।
  • खाने के साथ थोड़ा काला नमक और अदरक ज़रूर खाएं।
  • सब्ज़ियों का नमकीन-खट्टा सुप बनाकर पियें। प्याज़, मांस तथा सब्ज़ियों का उपयोग कर सुप बनाएं।
  • उबालकर ठंडे किये पानी में शहद डालकर पियें।

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  • अदरक तथा हरे चने को रोज़ के आहार में शामिल करें।
  •  गर्म खाना खाएं। कच्चा या अधपका खाने से परहेज़ करें। सलाद आदि न खाएं।
  • बहुत सारे पेय पदार्थ पीने से बचें।
  • पत्तेदार सब्ज़ियों को ज़्यादा महत्व दें।
  • दही, गाय/भैंस का मांस आदि ऐसे व्यंजन जिन्हें पचाने में ज़्यादा वक़्त लगता है, न खाएं। इसकी जगह छांछ पियें।
  • आयुर्वेद का एक मूल ग्रंथ भावप्रकाश के अनुसार वर्षा ऋतु में हरीतकी के साथ काला नमक खाना अत्यंत लाभकारी है।

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वर्षा ऋतु में दिनचर्या

सही आहार के साथ सही दिनचर्या भी बहुत ज़रूरी है। बारिश का मौसम आने पर अपनी दिनचर्या में यह बदलाव लाएं-

  • दिन में सोने से बचें। यह पाचन को बाधित कर मेटाबोलिस्म को धीमा करता है ।
  • अपने आस-पास के क्षेत्र को हमेशा साफ़ रखें। कहीं भी पानी जमा न होने दें।
  • जैसे ही शरीर का तापमान कम होता है वायरस तेज़ी से आक्रमण करते हैं। अपने शरीर को हमेशा गर्म रखें।
  • AC तथा पंखे वाले कमरे में गीले कपड़ों तथा गीले सिर के साथ बिलकुल न जाएं।
  • गंदे पानी में चलने से बचें। पैरों को सूखा रखें।
  • धुप में ज़्यादा काम करने से बचें। दोपहर में बाहर न निकलें।

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  •  बारिश में भीगने से आप तुरंत संक्रमण तथा बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। जितनी जल्दी हो सके सूखे कपड़े पहने। बारिश में मौसम में एक जोड़ी कपड़े वाटरप्रूफ बैग या पॉलिथीन में अपने साथ ज़रूर रखें।
  • आयुर्वेद के अनुसार गीले कपड़ों को लोबान तथा नीम की पत्तियों के धुँए से सुखाना सेहत के लिए हितकारी है।
  • इस दौरान आप पंचकर्म भी करवा सकते हैं।
  • इस मौसम में इत्र तथा सुगंधित प्रसाधन के उपयोग को भी अच्छा माना गया है।

आयुर्वेद के अनुसार जब मौसम बदलते हैं तो व्यक्ति को भी अपनी दिनचर्या तथा आदतें बदलनी चाहिए। यह बदलाव आप 15 दिनों के दौरान धीरे-धीरे ला सकते हैं। अपनी पुरानी जीवनशैली को धीरे-धीरे छोड़ते हुए नई आदतों को अपनाएं। यह बदलाव एक दम से लाने से शरीर इन्हे सह नहीं पाता जिससे आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है ।