क्या आप जानते हैं सांस लेने का सही तरीका

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image credits: HealthyWay

सांस लेना शरीर की मूलभूत क्रियाओं में से एक है जिसकी ओर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता। पर इस क्रिया में नाक से लेकर डायाफ्राम तक का सही उपयोग ज़रूरी है जिससे आपके शरीर की हर कोशिका को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुँच सके तथा इस दौरान आपके अंदरूनी अंग भी स्वस्थ बने रहें।

दरअसल हम रोज़ाना गलत पोस्चर में उठते हैं, कई बीमारियों और तनाव से ग्रसित होते हैं तथा कई बार गलत आदतें डाल बैठते हैं जिससे श्वसन क्रिया सही तरह से सम्पन्न नहीं हो पाती। यह धीरे-धीरे आपकी सेहत, मनोदशा, भावनाओं और नींद तक पर बुरा प्रभाव डालने लगती है।

 

चिंता न करें, सांस लेने की आदतें बदलना इतना भी मुश्किल नहीं है। आपको ज़रूरत है तो सिर्फ कुछ सिद्धांतों के पालन की, जिससे दिनभर उर्जापूर्ण बने रह सकते हैं-

 

नाक से सांस लें 

आपकी हर सांस आपकी नाक से ही अंदर और बाहर जानी चाहिए। इसकी वजह यह है की हमारी नाक की बनावट बाहर से आने वाली हवा को साफ़ करने की होती है जिससे हमारे फेफड़े साफ़ हवा के साथ काम कर पाएं तथा विषाक्त तत्वों से दूर रहें।

जब आप मुँह से सांस लेते हैं को हवा के साथ कई कण फेफड़ों तक पहुँचते हैं जिससे आपको कई वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण हो सकता है। अगर इस समय गहरी सांस लेने पर आपको सांस की नली में कसावट महसूस हो रही है तो इसकी वजह आपकी मुँह से सांस लेने की आदत हो सकती है। कुछ दिन नाक से सांस लेने पर अगर ध्यान दिया जाए तो आपकी यह समस्या भी खत्म हो जाएगी।

 

डायाफ्राम का उपयोग करें 

आपकी हर सांस आपको नाक से लेकर पेट तक महसूस होनी चाहिए। आपके डायाफ्राम का उपयोग करने पर आप 60-70 प्रतिशत ज्यादा गहरी सांस ले पाते हैं जिसके कई लाभ होते हैं-

  • यह आपके फेफड़ों के निचले हिस्सों तक हवा की आवा जाही बनाता है।
  • डायाफ्राम आपके लीवर, पेट और आँतों को एक तरह से मालिश देता है जिससे आपके अंग संतुलित होते जाते हैं।
  • आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को इस क्रिया से शरीर को अंदर से साफ़ करने में मदद मिलती है।
  • छाती और पेट पर दबाव घटने से आपके दिल को कम मेहनत करनी पडती है।
  • आपकी छाती, गले और कंधों से अत्यधिक तनाव हटता है।

 

 

आराम से सांस लें 

इस बात के कई वैज्ञानिक और अनुभाविक तथ्य है की आपका हर कार्य बेहतर हो सकता है अगर आप तनाव रहित होकर काम करें। आपकी साँसें आपके विचारों और भावनाओं पर असर डालती है इसलिए गलत तरह से सांस लेना आपको तनाव दे सकता है। इस तरह आपके शरीर में लगातार ऑक्सीजन की कमी भी बनी रह सकती है।

अपनी साँसों पर नियन्त्रण पाना शुरू करें। ऐसा करने के लिए आप ध्यान, प्राणायाम या योग की मदद ले सकते हैं। एक बार ऐसा कर लेने पर आपका शरीर आरामदायक और सहज स्थिति प्रवेश करता है जिससे सभी क्रियाएँ बेहतर ढंग से सम्पन्न होने लगती हैं।

 

ताल से सांस लें 

सिर्फ संगीत ही नहीं, इस दुनिया की हर क्रिया में ताल का महत्व है- चाँद व् सूरज की गति, ऋतुओं का आना-जाना तथा समुद्र की लहरों का उठाना और गिरना। आपके शरीर की भी एक तय ताल है। दिल की ताल को आप आसानी से महसूस कर पाते हैं लेकिन EEG जैसी कई जांच आपको मस्तिष्क की ताल का अंदाज़ा भी देती हैं। हमारे हॉर्मोन भी ऐसी ही ताल के अनुसार चलते हैं।

हमारी सांसों की ताल को समझना भी हमारे लिए ज़रूरी है। यहाँ भी ध्यान और योग आपकी बड़ी मदद कर सकते हैं। सुबह शांत मन से अपनी साँस पर ध्यान लगाएं तथा इसे एक ताल देने की कोशिश करें। जल्द ही आप खुद में कई बड़े परिवर्तन महसूस करने लगेंगे।

 

शांत होकर सांस लें 

खर्राटे, खांसी व् गले से आवाज़ निकलना सांस से जुडी समस्याओं के संकेत हैं। अक्सर हम इन संकेतों को संन्य समझकर नज़रंदाज़ कर देते हैं लेकिन इनका हमारे शरीर पर बड़ा दुष्प्रभाव होता है। शरीर पर अत्यधिक तनाव बनता है, साँसों की ताल टूटती है तथा ऊपर दिए सभी सिद्धांत प्रभावित हो जाते हैं।

इसलिए अपनी साँस की आवाज़ पर ध्यान दें तथा किसी समस्या के महसूस होने पर तुरंत उपचार शुरू करें। साथ ही बात करते हुए, खाते हुए तथा सोते हुए सांस में आने वाले बड़े बदलावों पर गौर करें।

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