शरीर की चुस्ती व फुर्ती के लिए कीजिए उर्ध्व प्रसारित एकपादासन योग

372
Urdhva prasarita eka padasana yoga pose
image credits: Yoga Class Plans

उर्ध्व प्रसारित एकपादासन अनुभव और कठिनाई के अनुसार एक मध्यम स्तर का योगासन है जो शरीर के लचीलेपन को बढाने के साथ पैरों की लगभग हर मांसपेशी पर सकरात्मक प्रभाव डालता है। यह आसन कई गहरे लाभ देता है जो शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक भी होते हैं। (standing split udharva prasharit eka padasana yoga for agility flexibility of body in hindi)

 

तो आइये जानते हैं इस दिलचस्प आसन की अभ्यास क्रिया-

 

  1. वीरभद्रासन में सीधा पैर आगे रखकर खड़े हो जाएं। गहरी सांस भरें और बाएं हाथ को घड़ी की सुई की तरह घुमाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं। इस तरह आपकी बाईं पसलियों में खिंचाव बनेगा।
  2. सांस छोड़ें और धड़ को दाई ओर घुमाएं, इस दौरान आपके बाएँ पैर की एड़ी ज़मीन से उठी हुई होगी तथा पंजे के बल ही आप मुड़ेंगे।
  3. अब आगे की ओर झुकें, शरीर के उपरी भाग को दाई जांघ के ऊपर रखें तथा दोनों हाथों को ज़मीन पर सीधे पैर की दोनों तरफ रख दें। (अगर हाथ ज़मीन को नहीं छु रहे तो आप इनके नीचे छोटे ब्लॉक्स या स्टूल का उपयोग भी कर सकते हैं। )
  4. हाथों को थोड़ा आगे लेकर जाएँ तथा शरीर का वज़न दाएं पैर पर डालें। फिर सांस छोड़ें तथा सीधे पैर को धीरे से सीधा कर लें। इसी के साथ बाएँ पैर को हवा में उठाकर ज़मीन के समानांतर ले आएं।
  5. इस आसन के अभ्यास में दोनों पैरों का सहज होना महत्वपूर्ण है। आप पाएँगे की अभ्यास के दौरान आपको पैरों को हल्का घुमाने की ज़रूरत पड़ सकती है।
  6. जिस पैर पर वजन देकर खड़े हैं, उसपर विशेष ध्यान दें। घुटने को आपको थोड़ा घुमाना पड़ सकता है ताकि वज़न विभाजन सही से हो पाए।
  7. हवा में उठे पैर को और उठाने की कोशिश पर ध्यान न दें। इस जगह कोशिश करें की दोनों पैरों में उर्जा का संचार बराबर हो।
  8. इस मुद्रा में 30 सेकंड से एक मिनट तक रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए बाएँ पैर को नीचे ले आएं।

इसी तरह दुसरे पैर से भी इतनी ही अवधि के लिए इस आसन का अभ्यास करें।

 

यह आसन आपके शरीर के लचीलेपन के अनुसार आपके लिए आसान या मुश्किल हो सकता है। इस आसन के अभ्यास के पहले इन आसनों का अभ्यास आपकी मुश्किल आसान कर सकता है- उत्तानासन, प्रसारित पदोत्तानासन, पश्चिमोत्तानासन तथा सुप्त पदंगुस्तासन।

 

उर्ध्व प्रसारित एकपादासन का अभ्यास यह लाभ देता है-

  • मन शांत करता है।
  • किडनी और लीवर को सक्रीय करता है।
  • जांघ, टखनों और कूल्हों में खिचाव बनता है जिससे इन हिस्सों की मांसपेशियां सक्रीय होती है तथा तनाव खत्म होता है।
  • जाँघों, घुटनों और टखनों को मजबूती मिलती है।
  • पिडुभाग और पेट के अंगों को सक्रीय करता है।