तनाव व अवसाद से मुक्ति के साथ पूरे शरीर की जकड़न दूर करने के लिए करें सलंब सर्वांगासन

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image credits: Cocolett

सलंब सर्वांगासन आज योगाभ्यास में सिखाया जाने वाला सर्वांगासन का सबसे प्रचलित रूपांतर है। सर्वांगासन को आसनों की रानी या जननी कहा जाता है क्योंकि यह अपने आप में एक पूर्ण आसन है। यह शरीर की लगभग हर क्रिया पर अपना प्रभाव डालता है तथा संतुलन के साथ ताकत भी प्रदान करता है। कहा जाता है की अगर कोई ऐसा आसन है जिसका नियमित अभ्यास आपको सभी आसनों का पूर्ण लाभ दे सकता है तो वह आसन सर्वांगासन ही है। (Supported Shoulderstand, Salamba Sarvangasana benefits, steps, contraindications hindi)

 

इस आसन को बेहतर रूप से जानना चाहते हैं तो इसका अभ्यास शुरू करें। सलंब सर्वांगासन के अभ्यास की विधि कुछ इस प्रकार है –

 

  1. इस आसन में सहजता और सहारे के लिए आप मोटे कम्बलों का उपयोग कर सकते हैं। इन्हें आप दो फूट बटे दो फुट में मोड़ लें तथा दरी पर कंधों के पास वाली जगह पर रख दें। अब दरी पर इस तरह लेटें की कंधे पूरी तरह इन कम्बलों पर रखे हों।
  2. अपने हाथों को शरीर के पास ज़मीन पर रख दें। घुटनों को मोड़कर पैरों के पंजे को ज़मीन पर रखें तथा अपनी साँसों पर ध्यान लगाएं।
  3. सांस छोड़ें, अपने पैरों से ज़मीन पर दबाव बनाएं तथा पैरों को हवा में उठाते हुए घुटनों को उपरी शरीर के पास ले जाएं।
  4. अपने शरीर को ज़मीन से उठाने की यह प्रक्रिया जारी रखें। धीरे-धीरे अपनी कमर और निचले धड़ को भी हवा में उठा लें।
  5. अपने हाथों के उपरी बाजुओं को कम्बल पर शरीर से समानांतर रखें तथा हथेलियों को कमर पर रखें।
  6. अब अपने पेट/पिडुभाग को हवा में इस तरह उठा लें ताकि शरीर हवा के सीधा हो जाए।
  7. अपनी कोहनियों को बिना हिलाए हाथों को अपनी सहजता के अनुसार समायोजित करें तथा हाथों को पूरी तरह खोलें।
  8. गहरी साँसें लें और अपने शरीर को हवा में सीधा रखने का प्रयास करें। पीठ और कमर को जितना हो सके लम्बा करें तथा संतुलन बनाए रखने की कोशिश करें।
  9. अपनी जीभ और जबड़ों शिथिल करें। चेहरे पर आ रहे अत्यधिक तनाव को भी कम करने की कोशिश करें। अपनी दृष्टि छाती की ओर रखें।
  10. इस आसन का अभ्यास शुरू कर रहे हैं तो शुरुआती अवधि 30 सेकंड तक ही रखें। फिर धीरे-धीरे इस अवधि को बढ़ाकर 3 मिनट तक लेकर जाएं। फिर इसे अपने नियमित अभ्यास में शामिल करें और अवधि को 5 मिनट तक बढाने का प्रयास करें।
  11. नीचे आने के लिए गहरी सांस भरें फिर सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें और पैर ज़मीन पर ले आएं।
  12. सलंब सर्वांगासन के नियमित अभ्यास से जुडी कुछ सावधानियाँ हैं जिनके बारे में जानना बहुत ज़रूरी है-
  13. दस्त, सिरदर्द, उच्च रक्तचाप, माहवारी, गर्दन का दर्द आदि होने पर इस आसन का अभ्यास बिल्कुल न करें।
  14. अगर आप लम्बे समय से इस आसन का अभ्यास कर रहे हैं तो गर्भावस्था में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। पर अगर ऐसा नहीं है तो गर्भवती होने के बाद इसका अभ्यास बिल्कुल शुरू न करें।
  15. इस आसन को मध्यवर्ती माना जाता है। इसका मतलब है की शुरूआती अभ्यर्थियों के लिए यह आसन इतना आसन नहीं होगा। इसलिए इसके अभ्यास के दौरान सावधानी रखें, इसकी तैयारी करवाने वाले आसन का अभ्यास करें तथा ज़रूरत लगने पर मार्गदर्शन भी लें।

 

इन सभी सावधानियों को बरतते हुए अगर आप सलंब सर्वांगासन का अभ्यास नियमित रूप से करते हैं, तो आप कई तरह के सकरात्मक बदलाव महसूस कर सकते हैं। क्या होते हैं इस आसन के अभ्यास के लाभ, आइये जानें-

  • मन को शांत कर तनावमुक्त करता है तथा अवसाद से मुक्ति दिलाता है।
  • पेट, गले और जननांग की ग्रन्थियों को सक्रीय करता है ताकि हॉर्मोन का स्त्राव और भी बेहतर हो जाए।
  • गर्दन और गले में खिंचाव पैदा कर जकडन से मुक्ति दिलाता है।
  • पैरों और कूल्हों को सुडोल बनाता है।
  • पाचनक्रिया बेहतर करता है।
  • आलस और अनिद्रा दूर करने में मदद करता है।
  • अस्थमा, बांझपन और साइनस में थेरेपी की तरह असर करता है।

 

तो देर किस बात की, आज से अपने योगाभ्यास में इस आसन को जगह दें और अनगिनत लाभों का आनंद लें।