जानिए WHO के मुताबिक कौन सी बीमारी है सबसे ज्यादा जानलेवा

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वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के द्वारा बनाई गयी एक रिपोर्ट में टीबी, जिसे क्षय रोग भी कहा जाता है, दुनिया की सबसे जानलेवा बीमारी बनकर सामने आई है। पिछले कुछ सालों में इस रोग से मरने वालों की संख्या एड्स से मरने वालों की तुलना में या तो बराबर रही है या और भी ज़्यादा रही है।

 

WHO के ये आंकड़े दिखाते हैं की टीबी एक भूली हुई महामारी है। इसकी एक बड़ी वजह यह है की टीबी के रोगी ज्यादातर ऐसे गरीब इलाकों में होते हैं जिनका समाज पर ‘प्रभाव’ कम पड़ता है। पर इतनी बड़ी संख्या में मृत्यु पूरी तरह अनावश्यक है; ज्यादातर मामलों में टीबी को शुरुआती चरणों में पहचानकर ठीक किया जा सकता है।

 

 

आइये जानते हैं, दुनिया की सबसे जानलेवा बीमारी से जुडी कुछ मुख्य जानकारी-

 

टीबी क्या है?

टीबी एक संक्रमणकारी रोग है जो आपके फेफड़ों पर असर डालता है। इसे आप क्षय रोग के नाम से भी जानते होंगे। खांसी, छींक आदि से यह संक्रमित से स्वस्थ व्यक्ति की ओर फैलता है। अगर इसे शुरुआती चरणों में पहचान लिया जाए तो छह महीने एंटीबायोटिक्स की खुराक से इसका इलाज सम्भव है।

 

टीबी के लक्षण क्या हैं?

हो सकता है आपके शरीर में टीबी के बैक्टीरिया मौजूद हों लेकिन आपका शरीर इनसे लगातार लड़ रहा हो। ऐसे में चिकित्सक टीबी को दो प्रकारों में समझते हैं-

 

लेटेन्ट या निष्क्रिय टीबी : इस अवस्था में टीबी के जीवित बैक्टीरिया आपके शरीर में मौजूद रहते हैं लेकिन इसके कोई लक्षण आपको नजर नहीं आते। ऐसी अवस्था में टीबी दुसरे व्यक्तियों को भी संक्रमित नही करता।

एक्टिव या सक्रीय टीबी : इस अवस्था में बैक्टीरिया सक्रीय होकर आपको नुकसान पहुंचाते हैं तथा दूसरों को भी बीमार कर सकते हैं।

 

सक्रीय टीबी के लक्षण इस प्रकार होते हैं-

 

  • खांसी जो तीन या ज्यादा हफ्तों तक बरकरार रहे।
  • खांसी में खून आना
  • छाती में दर्द रहना, सांस लेने व् खांसने में दर्द होना।
  • अचानक वजन कम हो जाना
  • आलस रहना
  • बुखार रहना
  • रात में पसीना आना
  • ठंड लगना
  • भूख न लगना

 

टीबी की जांच कैसे होती है?

अगर आपको ऊपर दिए लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत चिकित्सक से मिलें। वे एक स्टेथोस्कोप की मदद से आपकी सांस जांचेंगे तथा सूजन की पहचान करेंगे। इसके अलावा वे आपके आस-पास टीबी से संक्रमित व्यक्तियों के बारे में भी पूछेंगे।

इसके बाद अगर टीबी की आशंका लगे तो वे आपको PPD टुबरकुलीन नामक इंजेक्शन लगाएंगे। टीबी होने की स्थिति में अगले 2-3 दिनों में आपको एक लाल गाँठ उभरेगी जो रोग की पुष्टि करेगी। इसके अलावा अन्य जांचें भी सुझाई जा सकती हैं।

 

टीबी का उपचार कैसे होता है?

ज्यादातर मामलों में टीबी एंटीबायोटिक की खुराक से ठीक किया जाता है। यह खुराक कितने समय तक लेनी है यह रोगी की उम्र और रोग की गम्भीरता से तय किया जाता है। निष्क्रिय व् सक्रीय टीबी के लिए अलग-अलग दवाएं दी जाती है।

भारत में टीबी के इलाज के लिए डॉट या डायरेक्टली ओबज़रवड थेरेपी सुझाई जाती है जिससे रोगी की पूरी तरह देखभाल सम्भव हो पाए।

 

टीबी से बचाव कैसे सम्भव है?

क्यूंकि यह एक संक्रमणशील रोग है, यह किसी को भी हो सकता है। इसलिए ज़रूरी है की इस रोग से बचाव के लिए उपाय अपनाएं जाएं-

 

टीबी के रोगियों को सार्वजनिक स्थलों पर जाने से बचना चाहिए। लोगों तक संक्रमण न पहुंचे यह सुनिश्चित करने के लिए रोगी को फेस मास्क पहनना चाहिए।

रोगी को कमरे को पूरी तरह साफ़ और हवादार रखें।

टीबी की सम्भावना को कम करने के लिए टिके भी लगवाए जा सकते हैं। यह ज्यादा प्रभावी नहीं होते तथा कई बार अन्य रोगों की जांच में दखल देते हैं इसलिए इन्हें लगवाने के पहले चिकित्सक से पूरी जानकारी ज़रूर ले लें।

टी बी की बीमारी नहीं है लाईलाज, बिना लापरवाही करें पूरा इलाज