थ्रोट कैंसर – जानिए लक्षण, कारण व बचाव के उपाय

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कैंसर ऐसी बिमारियों को कहा जाता है जिनमें हमारे ही शरीर की कोशिकाएं असामान्य दर से बढ़ने लगती हैं। ऐसी कोशिकाओं को ट्यूमर कहा जाता है। गले का कैंसर भी इसी वजह से होता है। इसके मामले हालाँकि दुर्लभ होते हैं लेकिन कुछ खास आदतों का पालन करने वालों में ज़्यादा देखे जाते हैं।

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आइये जानते हैं थ्रोट कैंसर के बारे में-

 

गले का कैंसर क्या है?

गले का कैंसर आवाज़ निकलने की क्रिया से जुड़े अंगों के कैंसर को कहा जाता है। साथ ही टोंसिल और गले के पिछले हिस्से के कैंसर को भी इसी नाम से जाना जाता है। इसके दो प्रकार होते हैं- फ़रिन्जिअल और लरिन्जिअल।

फ़रिन्जिअल कैंसर में ट्यूमर आपकी नाक से गले में जाने वाले पाइप में होता है। गले में इसकी सटीक जगह के अनुसार इसे और तीन प्रकारों में बाटा जाता है।

लरिन्जिअल कैंसर में ट्यूमर आपकी आवाज़ के अंग पर प्रभाव बनाता है।

 

कैंसर के प्रकार को जानकर चिकित्सक आपको विशिष्ट उपचार सुझा सकते हैं।

 

गले के कैंसर के लक्षण क्या हैं?

शुरुआती चरणों में इस कैंसर को पहचानना मुश्किल होता है। आप इन लक्षणों को देख सकते हैं-

  • आपकी आवाज़ में बदलाव
  • खाना गिलने में मुश्किल
  • वजन घटना
  • गले में खराश
  • बार-बार गला साफ़ करने की ज़रूरत होना
  • लगातार कफ रहना
  • गर्दन में सूजन रहना
  • कान में दर्द

 

इन लक्षणों के दिखने पर चिकित्सक से तुरंत सम्पर्क करें।

 

गले के कैंसर के कारण 

पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले कैंसर होने की सम्भावना ज्यादा होती है। कई गलत आदतें आपको इस रोग से पीड़ित बना सकती हैं-

  • धुम्रपान
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • पोषण का अभाव
  • एस्बेस्टस के सम्पर्क में आना
  • दांतों की सफाई न रखना
  • अनुवांशिक रोग

 

साथ ही HPV नामक यौन रोग भी गले के कैंसर का कारण माना जाता है।

शरीर में एक जगह कैंसर होने पर इसके दूसरी जगह फैलने की आशंका भी बनी रहती है। यही वजह है की थ्रोट कैंसर जैसा दुर्लभ रोग उन लोगों में देखा जाता है जो किडनी, ब्लैडर, फेफड़े आदि के कैंसर से पीड़ित हों।

 

गले के कैंसर की जांच कैसे होती है?

गले के कैंसर का कोई भी लक्षण दिखने पर चिकित्सक से अपॉइंटमेंट लें। आपकी परेशानी देखकर वे आपको 3-4 हफ्तों की दवा सुझाएंगे। अगर इसके अंत में भी आपको आराम नहीं लगता तो आपको गले के कैंसर की जांच से गुजरना होगा।

लारिन्जोस्कोपी नामक जांच में चिकित्सक आपके गले की अंदरूनी जांच करेंगे। अगर इस जांच में पता चले की आपको कैंसर हो सकता है तो गले की कोशिका की बाइओप्सि करवाई जाएगी।

 

गले के कैंसर का उपचार कैसे होता है?

इस कैंसर के उपचार में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी शामिल होते हैं। आपके रोग की गम्भीरता और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखकर चिकित्सक आपको उपचार सुझाएंगे।

अगर थ्रोट कैंसर की पहचान समय पर हो जाए तो रोगी के पूरी तरह ठीक होने की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है। अगर यह बढ़ भी जाए तो दवाओं की मदद से कैंसर को बढने से रोका जा सकता है। इस दौरान कोशिश यही होती है की ट्यूमर गले से बढकर बाकी शरीर में न पहुंचें।

 

गले के कैंसर से बचाव के क्या उपाय हैं?

इस रोग से बचने के लिए आप निम्न उपाय कर सकते हैं-

धुम्रपान छोड़ें:

धुम्रपान की आदत छोड़ने के लिए आप निकोटिन सप्लीमेंट का उपयोग कर सकते हैं या फिर अपने चिकित्सक से बात कर दवाएं ले सकते हैं।

शराब का सेवन कम करें:

एक दिन में पुरुषों को 2 ड्रिंक और महिलाओं को एक ड्रिंक से ज्यादा शराब नहीं लेनी चाहिए।

जीवनशैली में सुधार लाएं :

भरपूर फल, सब्जियां और लीन मीट लें। खाने में नमक और वसा का उपयोग कम करें तथा वजन कम करने के सुरक्षित तरीके अपनाएं। दिनभर में कम से कम ढाई घंटे सक्रीय रहें।

HPV की सम्भावना घटाएं:

हमेशा सुरक्षित सम्बन्ध बनाएं तथा यौन रोग के टिके के बारे में चिकित्सक से जानें।

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