बाजुओं को सुदृढ़, मोटापा व आलस्य को कम करता है पूर्वोत्तानासन योग

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image credits: CoreWalking

अगर आप योग या किसी और व्यायाम शैली का अभ्यास किसी ट्रेनर की निगरानी में करते हैं तो आपने यह बात ज़रूर सुनी होगी की हर आसन और व्यायाम के जुड़वाँ व्यायाम का अभ्यास करना भी ज़रूरी है। यह जुड़वाँ व्यायाम आपके द्वारा किये गये व्यायाम के दुष्प्रभावों को खत्म करने का काम करता है। पूर्वोत्तानासन भी ऐसा ही एक व्यायाम है जो चतुरंगा नामक आसन के गलत प्रभावों को खत्म करता है।

 

आइये जानते हैं पूर्वोत्तानासन के अभ्यास की क्रिया-

 

  1. दण्डासन में बैठें तथा पाने हाथों को कमर पर रखें।
  2. घुटनों को मोड़ लें और पैरों को इस तरह ज़मीन पर रखें की अंगूठे अंदर की और हों तथा एड़ी कूल्हों से एक फूट की दुरी पर हो।
  3. सांस छोड़ें, अपने पैरों के अंदरूनी हिस्सों और हाथों से ज़मीन पर दबाव बनाएं और कूल्हों को इस तरह उठाएं की आपका शरीर किसी टेबल के आकार में आ जाए। ऐसे में आपकी पीठ ज़मीन से समनांतर होगी।
  4. अपने कूल्हों की ऊंचाई में बदलाव किये बिना पैरों को एक-एक कर सीधा करें। कूल्हों पर दबाव बनाए बिना इन्हें और भी उपर लाएं।
  5. छाती को उपर उठाने के लिए कंधे की मांसपेशी को पीछे की ओर धकेलें।
  6. गर्दन को झटके बिना सिर को पीछे लेकर जाएं।
  7. इस अवस्था में 30 सेकंड तक रुके रहें।
  8. इस मुद्रा से बाहर आने के लिए सांस छोड़ते हुए दण्डासन में आ जाएँ।

 

यह आसन दिखने में थोड़ा मुश्किल लग सकता है लेकिन बाजुओं में मज़बूती रखने वालों के लिए साधारण है। फिर भी अगर आपकी कलाई या गर्दन में चोट हो तो इस आसन का अभ्यास न करें। अगर कोई असहजता हो तो सिर को दिवार या कुर्सी से टिकाएं।

इस आसन को और भी आसानी से करने के लिए आप गोमुखासन, सुप्त वीरासन, सेतु बंध सर्वांगासन, धनुरासन आदि का अभ्यास कर सकते हैं।

 

आइये जानें पूर्वोत्तानासन के अभ्यास से आप कौनसे लाभ पा सकते हैं-

 

  • बाजू, कलाई और उँगलियों को मजबूत बनाए।
  • पैर, जांघ व् कूल्हों को ताकत दे।
  • पेट की चर्बी कम करने में मदद करे।
  • छाती, कंधे और टखनों को तनाव रहित बनाए।
  • आलस दूर करे।
  • तनाव घटाए।
  • मन शांत करे।