क्या डेटिंग एप आपको बीमार कर रहे हैं ??

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इंसानों के बीच का सम्पर्क अब डिजिटल हो चूका है। इससे नई सम्भावनाओं ने जन्म लिया है और नई मुश्किलों ने भी। भारत में अब कई कंपनी डेटिंग एप की सुविधा दे रही है जिससे आप घर बैठे नये लोगों को जान सकते हैं तथा पसंद आने पर व्यक्तिगत रूप से मिलकर रिश्ता आगे बढ़ा सकते हैं। डेटिंग का यह नया तरीका उचित है या नहीं इसपर चर्चा जारी है, लेकिन डिजिटल डेटिंग से आपके स्वास्थ्य पर होने वाला असर पूरी तरह सिद्ध हो चूका है।

बार बार एप पर रिजेक्ट होना आपका आत्मविश्वास घटा सकता है 
कई मनोविशेषज्ञ ऐसे लोगों से मिलते हैं जो इन एप और वेबसाइट पर लगातार अस्वीकार किये गये हैं और अब खुद पर विश्वास नहीं रख पा रहे हैं। ऐसे लोग अपने अंदर कमी ढूँढने लगते हैं और अंत में निराश होकर सामाजिक रिश्तों में एक अदृश्य दिवार बना लेते हैं। ऐसे अनुभव उनके सभी रिश्तों पर असर डालते हैं।
एप का उपयोग करने वाले आसानी से रिश्तों को छोड़ देते हैं
देखा जाता है की एप के ज़रिये रिश्ते बनाने वाले लोग अक्सर वर्तमान सम्बन्ध को बनाने की जगह अगले सम्बन्ध को लेकर उत्सुक रहते हैं। वे हमेशा महसूस करते हैं की अगला व्यक्ति ज्यादा बेहतर होगा। इस वजह से किसी भी रिश्ते का गहरा होना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। छोटी छोटी बातें हमें अपनी प्रतिक्रिया की जगह सामने वाले की गलती को मुद्दा बनाकर फैसला लेने का हौसला देती हैं।
एप या इन्टरनेट पर होना वाला कोई भी सम्पर्क इस कमी से गुजरता है; किसी दोस्त या साथी से अचानक बात करना बंद कर देना आप पर कोई खास असर नहीं डालता और बिना सोचे रिश्तों को खत्म कर देते हैं।
आप घबराहट महसूस करते हैं 
बहुत सारे विकल्पों के बीच ढूढ़ते हुए आपका दिमाग सही फैसला लेने में या किसी एक व्यक्ति को रुककर समझने में असमर्थ होता है। अगर आप अक्सर इन्टरनेट का उपयोग ब्राउज़िंग के लिए करते हैं तो आपने यह समस्या महसूस की होगी। बहुत ज्यादा जानकारियां और सम्भावनाएं हमें परेशान कर देती हैं और अंत में हम सही फैसला नहीं ले पाते।
इन एप के असर को कम कैसे करें?
दुनिया डिजिटल हो रही है और इससे बचा नहीं जा सकता। किसी एप को कुछ दिनों के लिए फोन से हटा देना स्थाई हल नहीं होगा। इन उपयोग को अपनाकर आप एक सेहतमंद रिश्ता बना सकते हैं-
  1. वर्तमान में रहने का प्रयास करें। सावधानी से डेटिंग के लिए साथी चुनें और जब तक उसके साथ हैं तब तक एप का उपयोग न करें। अपने रिश्तों को पूरा समय दें।
  2. एप पर हो रही गतिविधियों को दिल से न लगाएं। इस बात को याद रखें की इन्टरनेट पर होने वाली गतिविधियों का असर लोगों के वास्तविक जीवन पर नहीं पड़ता इसलिए वे सामान्य से अलग व्यवहार कर सकते हैं। किसी की प्रतिक्रिया आपके आत्मविश्वास का स्रोत न बनाएं।
  3. एप की लत न लगाएं। इन्हें समझदारी से उपयोग करें तथा इनके उद्देश्य को हमेशा याद रखें।