सात्विक आहार क्या है?

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क्या आपने कभी अपनी दिनचर्या और कार्य पर अपने आहार के प्रभाव को समझा है? मोटे तौर पर हम सभी जानते हैं की कुछ आहार पेट फुलाने और अपच की समस्या पैदा कर देते हैं। पर और ध्यान देंगे तो आप पाएँगे की आहार का इससे भी महीन असर हमारे शरीर और मन पर होता है। आयुर्वेद इस बारीक प्रभाव को समझने में हमारी मदद करता है ताकि हम स्वस्थ रहें तथा शांत मन के साथ आध्यामिकता की ओर बढ़ें। आयुर्वेद के अनुसार सत्व एक ऐसा गुण है जो हमारे अंदर संतोष और ख़ुशी पैदा करता है। सात्विक आहार मन और शरीर की सफाई करता है। इस आहार का मुख्य उद्देश्य मन को शांत, साफ़ और सौम्य बनाए रखना है।

सात्विक आहार शरीर को पोषण देते हैं तथा मन की स्थिरता बनाए रखते हैं। यह शाकाहारी होते हैं तथा ऐसे आहार को शामिल नहीं करते जिन्हें पाने के लिए किसी जीव को नुक्सान पहुँचाया गया है। ज़रूरी है की ये आहार प्राकृतिक रूप से पैदा किया गये हों तथा फ्लेवर व् प्रिज़रवेटिव से मुक्त हों।

सात्विक आहार में मुख्यतः निम्न चीज़ें शामिल होती हैं-

  • ताज़े फल और सब्जियां
  • दूध, घी आदि पदार्थ
  • मोटे अनाज व् मेवे
  • दाल व् फल्लियाँ
  • पौधों से निकले तेल
  • शहद, गुड, खांड
  • मसाले

इन चीज़ों के अलावा खाना तैयार करने वाले का मूड भी खाने का सत्व निर्धारित करता है। खाने को अगर शांत और खुश मन से बनाया जाए तो यह बेहतर परिणाम देता है। प्रेम और देखभाल के भाव से बना आहार सक्र्तामक उर्जा लिए हुए होता है तथा शरीर द्वारा पूरी तरह अवशोषित होता है। इस तरह आहार की गुणवत्ता इसे प्रेम से बनाने से और भी बढ़ जाती है। इसमें सब्जियां काटना व् मसाले कूटने के दौरान मन की भावना भी शमील है।

याद रखें की सात्विक आहार का उद्देश्य मन का स्वास्थ्य भी है। पर अगर आप बीमार रहते हैं या आपमें दोष का असंतुलन है तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सही आहार शैली ज़रूर जाने तथा इसी अनुसार भोजन लें।

आप भी कुछ सात्विक आहार अपनाएं और इसका अपने जीवन में असर देखें।