विश्व में स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरे क्या हैं? WHO से जानें 

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Image Credits: NCD Alliance

पिछली सदी में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़े ऐसे कई शोध और अविष्कार हुए हैं जिन्होंने इंसान के जीवन में बड़े बदलाव ला दिए हैं। दुनिया के ज्यादातर इलाकों में शान्ति और चिकित्सा केन्द्रों की सुविधा इंसानों की औसत मृत्यु दर में बड़ी गिरावट लाई है। पर फिर भी ऐसे कुछ खतरे हैं जो लगातार हमारे जीवन के लिए खतरा बने हुए हैं।

2019 में WHO के अनुसार ऐसे दस ख़ास बिंदु हैं जो सेहत को सबसे ज्यादा नुक्सान पहुंचा सकते हैं और जिनमें बेहतरी की ज़रूरत है-

एबोला व् अन्य पैथोजन से होने वाले रोग 

कोलोंबो में पिछले साल में दो बार एबोला विस्तृत रूप से फैला। इनमें से एक जगह युद्ध से भी प्रभावित थी। इस तरह के पैथोजन से होने वाले रोग दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या बन चुके हैं जब आने वाले रोग के बारे में हम पता नहीं रख पाते और कुछ ही समय में बड़ी तादाद में लोग रोग के शिकार बन जाते हैं।

स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए यह समय तेज़ी से काम करने का तथा प्राथमिकता के आधार पर शोध करने के होता है। आप अपनी तथा परिवार की सुरक्षा के लिए दुनिया में फ़ैल रहे रोगों की जानकारी ज़रूर रखें।

टीकाकरण की ओर हिचक 

टीका रोगों से बचने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है। इस समय हर साल बीस से तीस लाख लोग टीके की वजह से जानलेवा बिमारियों से बच पाते है। अगर इन्हें और लोगों तक पहुँचाया जाए तो और पन्द्रह लाख जाने बचाई जा सकती है।

फिर भी टीके की सेवा तक न पहुँच पाना तथा इस प्रक्रिया में अविश्वास रखना लोगों को रोगों से सुरक्षित रहने से वंचित कर देता है। अगर आपके मन में भी किसी तरह की हिचक है तो टीके के बारे में पढ़ें तथा चिकित्सक से बात करें।

संवेदनशील व् खतरनाक जीवनशैली

दुनियाभर में हर जगह कुछ ऐसे इलाके होते हैं जहाँ विकास के लक्ष्य और कोशिशें नहीं पहुँच पाती। कई बार यहाँ रह रहे लोग स्वयं इनसे दूर रहना चाहते हैं वहीं कई बार सामाजिक व्यवस्थाएं लोगों को मजबूर करती हैं। अगर आप भी ऐसे इलाकों से हैं या ऐसे लोगों को जानते हैं तो स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम बनाने के रास्ते ढूंढें।

प्राइमरी हेल्थ केयर कमजोर होना 

अक्सर कम कमाई वाले राष्ट्र में प्राइमरी हेल्थ केयर या प्रारम्भिक स्वास्थ्य सेवाएँ भी लोगों तक नहीं पहुँच पाती। दूसरी ओर कई बार सरकारी योजनाएं किसी एक रोग को खत्म करने पर ध्यान देती हैं जिससे समग्र स्वस्थ सेवा का विकास नहीं हो पाता। अपने स्थानीय प्रशासन से इस बारे में जानकारी लें तथा आपको मिलने वाली हेल्थ केयर के बारे में जानें।

वायु प्रदुषण और जलवायु परिवर्तन 

बदलते वातावरण में यह दो बिंदु मुख्य रूप से सामने आए हैं। भारत में स्थिति पूरी दुनिया से बदतर है: देश के कुछ खास शहरों में लोग प्रदुषण के कारण जीवन के दस साल गवा देते हैं। वहीँ अन्य किसी भी शहर में रहकर भी औसतन डेढ़ साल जीवन से कम हो जाते हैं।

जलवायु परिवर्तन भी तेज़ी से हमारे आहार और जीवन की मुलभुत सुविधाओं पर असर डाल सकता है। इसका सीधा मतलब होगा की कई बीमारियाँ और भी तेज़ी से फैलेंगी तथा घटते संसाधनों के बीच सभी सेवाएँ महंगी और मुश्किल हो जाएंगी।

असंक्रामक रोग

भारत मधुमेह की विश्व राजधानी है। कैंसर के मामलों में भी भारत ज्यादा लोगों से पीछे नहीं है। हर साल ऐसे कई रोग भारत व् दुनिया के अन्य कई देशों के लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। सेहतमंद जीवनशैली और अपनी प्रकृति के अनुसार जीवन व्यापन ही सही बचाव है।

 

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस 

एंटीबायोटिक बेशक चिकित्सा जगत में एक बड़ा आन्दोलन है। इनकी ही वजह से हम संक्रमण , निमोनिया, टीबी जैसे रोगों को ठीक कर पाते हैं। लेकिन धीरे धीरे बैक्टीरिया, वायरस आदि इन दवाओं के आदि हो रहे हैं। इस वजह से इन दवाओं का असर कम हो रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो जल्द हम कई रोगों के उपचार में असमर्थ हो जाएँगे।

इस समस्या का एक ही समाधान है- एंटीबायोटिक का उपयोग कम करें, समझदारी से करें तथा चिकित्सक से चर्चा करके ही करें।

HIV 

HIV से लड़ने और उबरने में हमने बड़ी सफ़लता पाई है। फिर भी इस समय धरती पर तीन करोड़ ऐसे लोग है जो इस रोग से पीड़ित हैं। यह रोग गम्भीर है इसलिए इसके रोकधाम के भी कई चरण हैं: HIV होने का टेस्ट जितनी सरलता से हो सके, इस रोग के सही समय पर पहचाने जाने की आशंका उतनी ही ज्यादा होगी। इसके अलावा antiretroviral दवाओं का इस रोग से बचाव व् उपचार में उपयोग एक बड़ी कोशिश है।

डेंगू 

डेंगू भी दुनिया में गर्म इलाकों में फ़ैल रहा बड़ा रोग है। हर साल गंभीर डेंगू से ग्रसित लोगों में से बीस प्रतिशत की मौत हो जाती है। भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में यह बारिश के मौसम में फैलता है। पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण डेंगू के फैलने की यह अवधि बढ़ रही है। इतना ही नहीं, नेपाल जैसे ठंडे इलाकों में भी पहली बार इस रोग के लक्षण देखे जा रहे हैं।

इन्फ्लुएंजा की वैश्विक महामारी 

इन्फ्लुएंजा बहुत ही तेज़ी से महामारी का रूप ले सकता है। गौर करने वाली बात यह है की इसके फैलने की सम्भावना को सटीकता से नहीं समझा जा सका है। पिछले पचास सालों में यह बीस बार बहुत ही अनियमित रूप से फैला है। WHO की मानें तो जल्द ही एक और महामारी की आशंका है; पर सटीक समय की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। हम सिर्फ खबरों पर नजर रख कर तथा टीके की सुरक्षा ले कर बचाव कर सकते हैं।