आहार में ये तीन बदलाव बचा सकते हैं पृथ्वी को 

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Image Credits: Taste for Life

पृथ्वी का तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत में भी इस साल कई शहरों में दुनिया के सबसे गर्म दिन दर्ज किये गये। कई वजहों के साथ खेती के दौरान बनने वाली ग्रीन हाउस गैस भी इस गर्मी के लिए ज़िम्मेदार हैं। UN द्वारा करवाए गये एक शोध के अनुसार अगले 60 साल में मिटटी की उपरी परत खत्म हो जाएगी। इस मतलब है हमारी खेती प्रभावित होगी, बाढ़ आएगी, सुखा पड़ेगा तथा कई प्रजातियाँ खतरे में आएगी।

इतना ही नहीं, हम इंसानों की तादाद तेज़ी से बढ़ रही है; 2050 तक इस पृथ्वी पर 100 करोड़ लोग होंगे। इससे आने वाली पीढ़ी भुखमरी और बीमारियों से ज्यादा पीड़ित रहने वाली है। शायद यही समय है जब शोधों के नतीजों को समझते हुए हमें छोटे बड़े बदलाव लाना शुरू कर देना चाहिए। राष्ट्र की नीति में बदलाव के साथ ही आप कुछ व्यक्तिगत बदलावों से भी पृथ्वी की मदद कर सकते हैं।

आइये, जानें आहारशैली में वो 3 बदलाव जो आने वाली पीढ़ियों का जीवन आसान बना सकते हैं-

आर्गेनिक चुनें 

अगर आपकी जेब इजाजत दे तो ऐसे आहार को चुनें जो कम केमिकल की मदद से पैदा हुई हो। एक शोध के अनुसार आर्गेनिक खेती सामान्य खेती की तुलना में वनजीवन को 50 प्रतिशत ज्यादा सुगन बनती है। इस तरह आपके द्वारा चुना गया विकल्प बड़ी मदद कर सकता है। शुरुआत करने के लिए ऐसे आहारों का आर्गेनिक विकल्प चुनें जिनमें कीटनाशक ज्यादा होते हैं-स्ट्रॉबेरी, पलक, केल, खजूर, सेब, अंगूर, टमाटर, आलू, अजमोद आदि।

पारंपरिक अनाज खाएं 

आजकल हमारे आहार में सिर्फ गेंहूँ, मक्का और चावल ही अनाज के रूप में शामिल होता है। इन अनाजों को पैदा करने में कई तरह की दवाओं का उपयोग करना होता है जिससे न सिर्फ अनाज दूषित होता है बल्कि मिटटी की क्षमता पर भी असर होता है। इनकी जगह जवार, बाजरा, कुट्टू का आटा आदि पारंपरिक अनाजों को भी अपनी थाली में जगह दें। इनकी जड़ें बहुत गहरी होती हैं इसलिए ज्यादा पोषक तत्व मिटटी से ही ले लेती हैं तथा कम फ़र्टिलाइज़र में पनप जाती हैं। आपकी यह कोशिश किसानों को इन अनाज को पैदा करने की ओर प्रेरित करेगी।

मीट कम खाएं व् बेहतर खाएं 

पृथ्वी को गर्म करने वाली गैस में से 15 प्रतिशत हिस्सा जानवरों की खेती का होता है। अगर आप अनाज पर पैदा की गयी सस्ती प्रजातियों का मीट लेते हैं तो इसे कम करें। इनकी जगह ऐसी प्रजातियों का मीट लें जिन्हें घास आदि खिलाकर बड़ा किया हो। ऐसा करने से घास वाली ज़मीन की उर्वरक क्षमता बेहतर होती है तथा आपकी थाली में ज्यादा पोषक मीट पहुँचता है। बेशक यह आपके बजट में कुछ बदलाव ला सकता है।

इन उपायों के अलावा खाने को व्यर्थ न फेकने का संकल्प भी बड़ा बदलाव ला सकता है। बाहर फेका हुआ खाना सड़ने पर गैस पैदा करता है जो पृथ्वी पर गर्मी बढाती है।

इन उपायों को अपनाकर आप भी एक बेहतर कल की रचना कर सकते हैं।