एंडोक्राइन डिसरपशन: हॉर्मोन के असंतुलन के लिए ज़िम्मेदार है आपका आहार 

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Image Credits: ALPCO

क्या आपने ‘एंडोक्राइन डिसरपशन’ का नाम सुना है? यह समस्या आधुनिक जीवन में कई बड़े रोगों की इकलौती जड़ की तरह सामने आई है तथा केमिकल फैक्ट्री के मालिकों की रातों की नींद उड़ा चुकी है। क्या है आखिर यह?

एंडोक्राइन ग्रंथियों, हॉर्मोन और हॉर्मोन के गंतव्य को मिलाकर बनी एक प्रणाली है जो शरीर में होने वाली लगभग हर गतिविधि को नियंत्रित करती है। हॉर्मोन ऐसे सन्देश वाहक होते हैं जो रक्त में शक्कर की मात्रा से लेकर विकास तक विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये बहुत ही बेहतरीन होते हैं और इनकी बहुत ही थोड़ी मात्रा बड़ा बदलाव ला सकती है।

पिछले 30 सालों में हमने पाया की खेती और दवाओं में उपयोग हो रहे कृत्रिम केमिकल इस बेहद जटिल प्रणाली में बदलाव ला सकते हैं। इनकी वजह से आप मोटापे, मधुमेह, ह्रदय रोग, बाँझपन, समय से पहले प्रसव और कैंसर जैसी कई समस्याएँ हो सकती हैं। पैदा होने से पहले तथा कम उम्र में इन केमिकल के सम्पर्क में आना विकास को प्रभावित कर सकता है।

देखा जाता है शिशुओं के लिए बनाए गये आहार में मिले चावल में आर्सेनिक होता है। यह एक तरह से ज़हर का काम करता है तथा कैंसर की वजह भी बनता है। बच्चों में मानसिक क्षमता की कमी और मधुमेह की बढ़ी सम्भावना भी इसी की देन हो सकती हैं।

इन सभी और अन्य अनगिनत वजहों से केमिकल फैक्ट्री के मालिकों पर असर हुआ है। सभी सरकारें अब इन केमिकल के उपयोग पर बहुत ही पैनी नजर रख रही हैं तथा कई शर्तों के साथ इन केमिकल का उपयोग करने की इजाजत दे रही है।

पर आखिर हम यह तक कैसे पहुंचें? पिछले एक दशक से इन केमिकल का उपयोग किया जा रहा है। इनके उपयोग को लेकर जो भी संदेह रहे उन्हें इस सिद्धांत की मदद से खत्म किया गया- ‘केमिकल की थोड़ी मात्रा किसी को नुकसान नहीं करती’ तथा ‘डोज़ ही केमिकल को जहर या दवा बनाता है’ पर एंडोक्राइन डिसरपशन ने इस सिद्धांत को खत्म कर दिया है। देखा जाता है की कई केमिकल बहुत ही थोड़ी मात्रा में भी एंडोक्राइन को नुक्सान पहुंचाते हैं। ऐसे में सरकारों द्वारा सुझाई जा रही केमिकल की मात्रा पर दोबारा सोचने की ज़रूरत है।

इन बातों को समझने के बाद आप भी सोच रहे होंगे की केमिकल पर निर्भर इस जीवन में इस समस्या से कैसे निकला जाए। आप इन आठ तरीकों से अपने जीवन में एंडोक्राइन डिसरपशन की सम्भावना कम कर सकते हैं-

  • जब भी सम्भव हो, आर्गेनिक आहार ही खाएं।
  • अगर आप बच्चे को आहार दे रहे हैं तो ऐसे प्रसाधन चुनें जिसमें चावल न हो।
  • घर में कीड़ों को मारने वाले स्प्रे का उपयोग न करें।
  • ऐसे कॉस्मेटिक्स, शैम्पू और सोप का उपयोग करें जिनमें सरल सामग्रियों हों।
  • साफ़ सफाई के लिए जब सम्भव हो, विनेगर और बेकिंग सोडा का उपयोग करें।
  • कमरे को हवादार रखें तथा नियम से सफाई करें ताकि घर में उत्पादों से निकलने वाले केमिकल न रहें।
  • प्लास्टिक के उपयोग को कम करें।
  • अपने आस पास चल रहे एंडोक्राइन डिसरपशन केमिकल के विरुद्ध आंदोलनों से जुड़ें।