इन 9 बीमारियों में रामबाण सिद्ध होता है अल्फाल्फा का उपयोग

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रिज़का या अल्फला (अल्फाल्फा टॉनिक – alfalfa tonic, seeds benefits in hindi) एक बहुमुखी जड़ी बूटी है। इसकी जड़ें जमीन में बीस से तीस फीट नीचे तक होती हैं, क्योंकि यहां उन्हें वे खनिज लवण प्राप्त होते हैं, जो धरती की सतह पर नहीं मिल सकते।

 

आयुर्वेद और होम्योपैथी दोनों में ही अल्फला का प्रयोग एक टॉनिक के रूप में किया जाता है। बीमारी से ठीक होने के बाद या प्रसव के बाद कमजोरी को दूर करने के लिए तो अल्फला का प्रयोग किया जाता है ही साथ ही अल्फला में प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, कैरोटीन, आयरन, जिंक, विटामिन B, विटामिन C, विटामिन E तथा विटामिन K अधिक मात्रा में पाय जाने के कारण यह गुर्दे की समस्या, अर्थराइटिस, यूरीन संबंधी समस्या, कोलेस्ट्रॉल व अन्य कई समस्याओं में लाभदायक सिद्ध होता है।

 

तो आइये विस्तार से देखें की किन किन समस्याओं में फायदेमंद होता है अल्फाल्फा का प्रयोग (Health benefits of Alfalfa Herb) –

 

1. हड्डियों को मजबूत करें (Strong Bone) – अल्फला विटामिन, मिनरल व अन्य पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है, जिससे हड्डियों को मजबूत बनाने व ताकत देने के साथ उनके विकास में भी मदद होती है।

 

2. गठिया उपचार में फायदेमंद (Gout treatment) – गठिया रोग से परेशान लोग अल्फला का प्रयोग कर सकते हैं। अल्फला में हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक मिनरल प्रचुर मात्रा में होता है। अल्फाल्फा के बीजों से बनी चाय का सेवन भी गठिया के रोग में फायदेमंद साबित होता है।

 

3. मधुमेह (Diabetes) अल्फाल्फा का नियमित सेवन मधुमेह की बीमारी में लाभ देता है। यह खून में शूगर के स्तर को संतुलित रखने में काफी प्रभावशाली है।

 

4. गुर्दे की पथरी में लाभदायक (Remove Kidney Stones) – गुर्दे में पथरी है तो अल्फाल्फा का इस्तेमाल कर सकते हैं। अल्फला में पाय जाने वाले विटामिन A, C, E और जिंक किडनी की पथरी को गलाकर मूत्र द्वारा बाहर निकालने में मदद करते हैं।

 

5. गंजापन दूर करे (Remove Baldness) – अगर गंजेपन और बालों के झड़ने को लेकर परेशान हैं तो अल्फाल्फा का रस, गाजर का रस और लेट्यूस का रस रोजाना पियें। इस मिश्रण को विशेष रूप से बालों के विकास तथा बालों को झड़ने से रोकने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

 

6. श्वास संबंधी समस्या (Breathing problem) – अल्फाल्फा में क्लोरोफिल गुण होने के कारण इसे फेफड़ों और साइनस के कारण होने वाली समस्याओं के निवारण लिए उपयोग में लाया जाता है।

 

7. कैंसर (Cancer) – आहार में अल्फला शामिल कर कैंसर के खतरे को रोका जा सकता है इसमें कैनवानीने (canavanine) नाम का एमिनो एसिड पाया जाता है जो कैंसर की घटना को रोकने के लिए जाना जाता है।

 

8. पाचन समस्याओं में लाभदायक – अल्फला पाचन समस्याओं के उपचार में कारगर है।पेट की गैस, पेट के अल्सर, अपच, सूजन, मतली, आदि, समस्याओं को अल्फला के सेवन से रोका जा सकता है। अल्फला अंकुरित भी अपनी उच्च फाइबर सामग्री की वजह से पुरानी कब्ज के उपचार में उनकी प्रभावशीलता हैं।

 

9. ह्रदय संबंधी समस्याएं – अल्फला, रस के रूप में, धमनी की समस्याओं और दिल की बीमारियों में बहुत प्रभावी पाया गया है। अल्फला के केवल ताजा पत्तों का ही रस इस के लिए इस्तेमाल किया जाए। अल्फला के ताजा पत्तों का रस बहुत स्ट्रांग होता है इसलिए बेहतर है इसे गाजर के रस के साथ मिला कर लिया जाए। इससे दोनों के गुण आपको मिलेंगे।

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