असगंध की जड़ के चूर्ण के सेवन करने से शरीर को होने वाले 21 फायदे

41359
asgandh-nagori-ayurvedic-herb
image credits: hindi.revoltpress.com

असगन्ध (asgandh herb benefits, uses) एक ऐसी प्राकृतिक जड़ी-बूटी है जिससे बच्चे, जवान, बूढ़े, विवाहित या अविवाहित, स्त्री-पुरूष सभी लाभान्वित होते हैं। असगन्ध जड़ का चूर्ण मोटापा कम करने से लेकर महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता हो या गर्भधारण न कर पाने की समस्या, हृदय-रोग, अल्जाइमर रोग, आंखों की दृष्टि बढ़ाने, जोड़ों में दर्द जैसे बहुत सारे रोगों में मददगार सिद्ध होता है। कुछ विशेष रोगों में इसकी पत्तियों या पंचांग का भी प्रयोग किया जाता है।

तो आइये जानते हैं असगन्ध के औषधीय गुणों को –

1. कमजोरी– धातुपुष्टि के लिए असगन्ध का विभिन्न प्रकार से प्रयोग किया जाता है

I. तीन ग्राम असगन्ध चूर्ण सुबह दूध के साथ नियमित रूप से लेने से शरीर की कमजोरी दूर होती है।

II. तीन ग्राम असगन्ध चूर्ण, पांच ग्राम तिल्ली और पांच ग्राम घी लेकर इसमें तीन ग्राम शहद मिलाकर नियमित रूप से ठण्ड के दिनों में सेवन करने से कमजोर शरीर वाला भी शक्तिशाली हो जाता है। शरीर का वज़न बढ़ता है।

III. असगन्ध चूर्ण 3 ग्राम, मिश्री 3 ग्राम, शहद 6 ग्राम में शहद की मात्रा से विषम मात्रा में गाय का घी मिलाकर सेवन करने से वृद्धावस्था के लक्षणों में कमी आती है, युवा की तरह उत्साह पैदा होता है।

2. गर्भधारण – अश्वगन्धा चूर्ण 20 ग्राम, पानी आधा लिटर तथा गाय का दूध 250 मि.लि.

I. इन सबको मिलाकर हल्की आंच पर पकाएं। जब दूध मात्र शेष रह जाए तब उसमें 10 ग्राम मिश्री व 10 ग्राम देशी गाय का घी मीलाकर मासिक धर्म रूकने (यानी चौथे दिन से) के बाद 3 दिन लगातार प्रातःकाल सेवन करने से गर्भधारण शक्ति बढ़ती है।

II. असगन्ध चूर्ण व गाय का घी दोनों 5-5 ग्राम मिलाकर मासिक धर्म रूकने के बाद प्रतिदिन गाय के ताज़े दूध के साथ निरन्तर सेवन करने से भी गर्भधारण शक्ति बढ़ती है।

3. प्रदर रोग – स्त्रियों में कमज़ोरी के कारण होने वाले श्वेतप्रदर व रक्त प्रदर में भी असगन्ध के प्रयोग से लाभ होता है।

I. असगन्ध चूर्ण और शतावरी चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर इस मिश्रण की 3 ग्राम मात्रा ताजे पानी के साथ सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है।

II. असगन्ध, विधारा और पठानी लोध्र को बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर छानकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा गाय के कच्चे दूध के साथ सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग में लाभ होता है।

4. मासिक धर्म सम्बन्धी विकार – मासिक धर्म के समय अत्यधिक दर्द तकलीफ़ होने की अवस्था में असगन्ध चूर्ण व शक्कर बराबर मात्रा में लेकर पीस कर चूर्ण बना लें। इसकी 5 ग्राम मात्रा सुबह खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने के लगभग एक सप्ताह पहले से रोज सेवन करें। मासिक धर्म शुरू हो जाने पर बन्द कर दें। इससे मासिक धर्म के दौरान होने वाले कष्टों में राहत मिलती है।

5. सूतिका रोग – सन्तान को जन्म देने के बाद छः माह तक का समय सूतिका अवस्था कहलाता है। इस अवस्था में आने वाली कमज़ोरी व रोगों को दूर करने हेतु असगन्ध चूर्ण, पीपल चूर्ण, शतावरी चूर्ण, गिलोय चूर्ण, त्रिफला चूर्ण व पिपलामूल चूर्ण सम मात्रा में मिलाकर शक्कर व घी या दूध के साथ देना चाहिए।

6. कंप वात– अश्वगन्धा चूर्ण की तीन से छः ग्राम मात्रा मिश्री मिलाकर 5 ग्राम अश्वगन्धा घृत के साथ सुबह शाम लेने और साथ ही गाय के दूध का अनुपान लेने से कंपवात की प्रारम्भिक अवस्था में लाभ होता है। इस प्रयोग से अनेक प्रकार के वात रोग भी नष्ट होते है।

7. उच्च रक्तचाप – अश्वगन्धा चूर्ण 3 ग्राम, सूरजमुखी बीज का चूर्ण 2 ग्राम , गिलोय चूर्ण 1 ग्राम और पिसी मिश्री 5 ग्राम मिलाकर जल के साथ लेने से लाभ होता है।

8. असामान्य दिल की धड़कन – यदि दिल की धड़कन असामान्य तथा ज्यादा तेज़ हो तो असगन्ध और बहेड़ा के चूर्ण समभाग मिलाकर थोड़े से गुड़ के साथ हल्के गरम पानी के साथ लेने से घड़कन सामान्य हो जाती है।

9. ह्रदयरोग – अर्जुन की छाल के चूर्ण के साथ असगन्ध के चूर्ण को मिलाकर गरम पानी के साथ या दूध के साथ 1 चम्मच मात्रा में लेने से ह्रदय को बल मिलता है।

10. गठिया – अश्वगन्धा के पंचांग (जड़, पत्ती, तना, फूल और फल) को कूट छान कर उसका काढ़ा बनाकर लेने से लाभ होता है। असगन्ध पंचांग चूर्ण 30 ग्राम की 300 मि.लि. पानी में उबालें। आधा शेष रह जाने पर छान कर पिएं। असगन्ध के ताज़े 30 ग्राम पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया के दर्द में राहत होती है।

11. कमरदर्द या जोड़ों का दर्द – असगन्ध चूर्ण 3 ग्राम, सोंठ चूर्ण 2 ग्राम व सफ़ेद मुसली चूर्ण 1 ग्राम मिलाकर सुबह-शाम गरम पानी के साथ लेने से कमर, घुटने, कन्धों आदि के दर्द में लाभ होता है।

12. रक्तदुष्टि व चर्मरोग – अश्वगन्धा चूर्ण 2 ग्राम व चोपचीनी चूर्ण 2 ग्राम मिलाकर शहद के साथ चाटने से रक्तविकार एवं चर्म रोग में लाभ होता है।

13. ज्वर – यदि लम्बे समय बुखार बना रहे तथा बुखार के कारण कमजोरी आ रही हो तो अश्वगन्धा चूर्ण पीपल चूर्ण व गिलोय चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर इसकी 2 ग्राम मात्रा सुबह-शाम दूध या गरम पानी से देने से लाभ होता है।

14. हड्डियों की कमज़ोरी – असगन्ध चूर्ण 2 ग्राम, प्रवाल पिष्टी 250 मि.ग्रा. व स्वर्ण माक्षिक भस्म 250 मि.ग्रा. मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ देने से लाभ होता है।

15. मोटापा – असगन्ध, सफेद मुसली व काली मुसली के चूर्ण को समान मात्रा में मिलाकर रखें। इसकी 3 से 5 ग्राम मात्रा सुबह खाली पेट गरम पानी से लेने से अनावश्यक चर्बी कम होती है।

16. थॉयराइड – थॉयराइड ग्रन्थि के रोग के कारण शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव को रोकने के लिए सहायक औषधि के रूप में असगन्ध चूर्ण 2 ग्राम व 5-7 तुलसी के पत्ते सुबह गरम पानी के साथ लें।

17. मानसिक कमज़ोरी व अनिद्रा – असगन्ध चूर्ण, जटामांसी चूर्ण व ब्राह्मी चूर्ण समान मात्रा में लेकर मिला लें। इस चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा दूध के साथ सुबह व रात को लेने से मानसिक थकान दूर होती है व निद्रा समान्य होने लगती है।

18. केश समस्याएं – जिन लोगों के बाल झड़ रहे हों या सफ़ेद हो रहे हों उन्हें त्रिफला, अश्वगन्धा, तिल्ली व भृंगराज चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर 3 से 5 ग्राम रोज दूध के साथ सेवन करना चाहिए।

19. वातरोग – असगन्ध, मैथी व गुड मिलाकर 15 ग्राम के लड्डू बना कर रख लें। सुबह-शाम, एक-एक लड्डू दूध के साथ लेने से वातरोग में लाभ होता है। मधुमेह रोगी गुड़ न मिलाएं।

20. अल्जाइमर रोग – बुढ़ापे में याददाशत कमजोर होने की स्थिति में असगन्ध चूर्ण, जटामांसी, त्रिफलाचूर्ण, पुनर्नवा चूर्ण सभी समभाग लेकर मिला लें। इस मिश्रण की 2 से 5 ग्राम मात्रा शहद व मिश्री दूध के साथ देने से लाभ होता है।

21. खून की कमी – असगन्ध चूर्ण 2 ग्राम, स्वर्ण माक्षिक भस्म 250 मि.ग्रा., ताप्यादि लौह 250 मि.ग्रा. व धात्री लौह 250 मि.ग्रा. मिलाकर इसे अनार के रस के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

पढ़ें यह भी –

  1. हृदयरोग, सूजन, मुंहासे, मोटापे व संक्रमण से लड़ने में फायदेमंद है गुग्गुल हर्ब का सेवन
  2. मानसिक बीमारियों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है चिसंद्रा (Schisandra) हर्ब
  3. बरगद के पेड़ के 8 आश्चर्यजनक फायदे
  4. करेंगे नीम का इस तरह इस्तेमाल तो होंगे 10 लाभ
  5. इन 9 बीमारियों में रामबाण सिद्ध होता है अल्फाल्फा का उपयोग