कफ़ और सर्दी का आयुर्वेदिक इलाज

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कफ़ और सर्दी का आयुर्वेदिक इलाज
image credit : कैसे करे

सर्दी और कफ को अक्सर सर्दियों के मौसम से जोड़कर देखा जाता है लेकिन सच तो ये है की यह बीमारी किसी भी मौसम में हो सकती है। यह समस्या इतनी आम है की अक्सर लोग इसके उपचार पर विचार भी नहीं करते। लेकिन कभी-कभी यही सिरदर्द, बुखार और आलस की वजह बन आपकी दिनचर्या में रुकावट बनने लगती है और इसकी रोकथाम ज़रूरी हो जाती है। (ayurvedic medicine for cough and cold ke liye ayurvedic dawa, in hindi)

 

सर्दी का उपचार कुछ ही चिकित्सा पद्धतियों में उपलब्ध है और आयुर्वेद इनमें से एक है। आइये जानते हैं वो तरीके जिनसे आप सर्दी के लक्षणों से निजात पा सकते हैं-

 

लौंग 

कफ दरअसल बीमारी के आखरी चरण में होता है जब आपका गला रोग से उबर रहा होता है। इसलिए हो सकता है की सर्दी या अन्य रोग के ठीक हो जाने के बाद भी कफ लम्बे समय तक बना रहे और आपके कार्यों में बाधा बनता है।

अगर आपको भी लम्बे समय से कफ है और अक्सर खांसी उभर आती है तो यह नुस्खा आजमाएँ- अपने साथ लौंग की 3-4 कलियाँ रखें और खांसी उभरते ही इन्हें मुँह में डाल लें। इन्हें चबाएं नहीं, बल्कि तब तक चूसें जब तक इनका स्वाद पूरी तरह खत्म न हो जाए। जब-जब ज़रूरत लगे, इनका सेवन करें। पर ध्यान रखें, लौंग को मुँह में पूरी रात दबाकर न रखें, इससे मुँह में छाले आ सकते हैं।

 

हल्दी, नमक और मिर्ची के गरारे 

गले में दर्द और खीच-खीच बनी हुई है तो यह तरीका आपको चंद मिनटों में राहत दे सकता है। इस नुस्खे में सुजन-विरोधी, कीटाणु-नाशक और कफ़ निस्सारक गुण हैं जो आपको बेशक लाभ पहुँचाएँगे।

आधा चम्मच हल्दी, एक चौथाई चम्मच नमक और एक चुटकी लालमिर्च को एक कप गुनगुने पानी में डालें। इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं तथा इससे गरारे करें। गले के अंदरूनी हिस्सों के संक्रमण को सही करने के लिए आप इस मिश्रण की कुछ बूँदें गले में जाने भी दे सकते हैं। आप जितनी लम्बी अवधि तक गरारे कर पाएंगे, इसका प्रभाव भी उतना बेहतर होगा।

इस उपाय को हर छह घंटे में दोहराएँ।

 

अदरक का रस 

अदरक भी संक्रमण से लड़ने में बेहद प्रभावी होता है लेकिन इसका उपयोग आप सर्दी के दौरान जी मिचलाने और भूख कम हो जाने जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए कर सकते हैं। आप चाहें तो एक जूसर की मदद से इसका रस निकालें या काढ़ा बनाकर लें। दोनों ही तरीकों से यह आपके पेट में उठ रहे भारीपन के एहसास को खत्म करेगा तथा भूख बढ़ाएगा।

काढ़ा बनाने के लिए आधा इंच का अदरक का टुकड़ा लें। चार कप उबलते हुए पानी में इस अदरक को कीसकर डालें। आंच कम कर दें, काढ़े को ढाक दें तथा इसे तब-तक पकाएं जब तक यह घट कर एक कप न रह जाए। इस काढ़े को हर 3-4 घंटे में पीते रहें।

 

तुलसी, हल्दी और अदरक की चाय 

बुखार, गले का बैठना, सर्दी, उल्टी या फ्लू, इस चाय का उपयोग आप किसी भी बीमारी के उपचार में कर सकते हैं। संक्रमण चाहे बैक्टीरिया की वजह से हो या वायरस की वजह से, यह आपके रोग को ठीक करने के साथ आगे आने वाले रोगों से भी बचा सकती है। पाचन क्रिया सही करने और कीटाणु का सफाया करने के अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी करेगी।

4 कप पानी उबालें तथा आंच से हटा लें। पानी में तुलसी की 3-4 पत्तियां, 2-3 चम्मच किसा हुआ ताज़ा अदरक और आधा चम्मच हल्दी डालें। इस मिश्रण को 6-8 मिनट तक बैठने दें। छान कर गर्मागर्म पियें। स्वाद बेहतर करने के लिए आप शहद भी मिला सकते हैं।