आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में जानिए ये ज़रूरी बातें

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आयुर्वेद के अनुसार हर इंसान के शरीर में तीन तरह की उर्जाओं का मेल होता है- वात, पित्त और कफ़। इन उर्जाओं का यही विशिष्ट मेल आपको अलग व्यवहार देता है तथा इनका असंतुलन ही बीमारियों का कारण भी बनता है। इसी वजह से हर रोगी का रोग दुसरे से अलग होता है और उपचार भी। (ayurvedic medicines side effects and benefits)

 

आयुर्वेदिक चिकित्सा की कोशिश होती है की कई तकनीकों के उपयोग से आपके शरीर में उर्जा के इस विशिष्ट संतुलन को वापस लाया जा सके। अगर आप भी इस चिकित्सा प्रणाली से जुड़े हैं या जुड़ना चाहते हैं, तो आयुर्वेद की दवाओं के बारे में इन बातों को अवश्य जानें-

 

चिकित्सा के बिंदु बहुत साधारण लेकिन बेहद प्रभावी होते हैं-

शरीर के दोषों (उर्जाओं) के असंतुलन से होने वाले रोगों के चलते कई लक्षण दिखाई देते हैं। पर कई ऐसी भी बीमारियाँ होती हैं जिनके लक्षण दिखाई नहीं दे रहे होते और जो आपके बिना जाने ही जड़े जमाने लगती है। क्यूंकि आयुर्वेद शरीर की मूल उर्जाओं को संतुलित करने पर केन्द्रित है, इसलिए आपकी सभी बीमारियों का मूल लक्षण खत्म हो जाता है और लक्षणों से भी राहत मिलती है। इस तरह एक ही उपचार आपको कई समस्याओं से निजात दिलाता है।

 

बीमारी की जांच कई कारकों पर निर्भर करती है-

आयुर्वेद बीमारियों की जांच के लिए “अस्ताविधा रोगी परीक्षा” अर्थात आठ चरणों का उपयोग करता है- नाड़ी, मूत्र, मल, शब्द, जीभ, स्पर्श, आँखें और शरीर की आकृति। इन सभी बिन्दुओं के आधार पर चिकित्सक आपके दोष और असंतुलन के वजह समझते हैं तथा इसी अनुसार उपचार करते हैं।

 

आयुर्वेद किसी भी रोग के उपचार में आपके पुरे शरीर को ध्यान में रखता है 

आयुर्वेद उर्जाप्रवाह का असंतुलन ही सभी बीमारियों की जड़ मानता है। इसका मतलब है की आपके शरीर, इसके अंग, आपका मन और मनोदशा सभी अहम भूमिका निभाते हैं। इस तरह किसी भी रोग का उपचार करने के लिए सिर्फ एक ही अंग को दवाएं नहीं दी जाती बल्कि दवा के पुरे शरीर पर असर को ध्यान में रखा जाता है।

 

आपका वातावरण भी अहम है 

आप क्या खाते हैं, कहाँ रहते हैं और यहाँ तक की किन रंगों से आकर्षित होते हैं, यह सभी आपके स्वास्थ्य पर असर डालता है। आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार व्यक्ति के दोष इन सभी कारकों से प्रभावित होते हैं इसलिए अगर आपका वातावरण आपके दोषों के हित में नहीं है तो यह असंतुलन और रोगों को जन्म देने लगता है। आयुर्वेद की कोशिश वातावरण के इसी असर को कम करना है।

 

आयुर्वेद जड़ी-बूटियों से कहीं ज्यादा है 

आयुर्वेद सिर्फ दुर्लभ जड़ी-बूटियां नहीं, बल्कि पानी, दूध, दही, घी, तेल, नमक, राख, शराब आदि का प्रयोग कर भी उपचार करता है। आयुर्वेद के अनुसार आपका आहार ही आपकी दवा है। इसलिए अगर किसी खास तत्व की कमी आहार में देखी जाती है तो उस तत्व से भरपूर आहार/दवा को सही समय पर आहार में शामिल करने का सुझाव दिया जाता है।

 

आयुर्वेद रोग की जड़ को खत्म करता है 

आयुर्वेद की चिकित्सा का पूरा ध्यान आपके शरीर की मूल उर्जा प्रणाली को सही करने में होता है। उपचार के दौरान आपके चिकित्सक पहले बीमारी को देखते हैं फिर इसकी वजह समझने की कोशिश करते हैं। इस दौरान कई कारकों को मन में रखा जाता है और कई तरह के उपचार कम अवधि के लिए अपनाए जाते हैं। इसलिए अन्य प्रणालियों के मुकाबले आयुर्वेद में आपको उपचार के शुरुआत में कई बार चिकित्सक से मिलना पड़ सकता है तथा उपचार के प्रभाव के बारे में चर्चा करनी पड़ सकती है।

 

आयुर्वेद एक जीवनशैली है 

‘आयुर’ का अर्थ है जीवन और ‘वेद’ का अर्थ है ज्ञान। इस तरह आयुर्वेद जीवन के ज्ञान की बात करता है और इससे जुड़े सभी कारकों को ध्यान में रखता है। इसलिए अगर आप आयुर्वेद के ज़रिये अपनी बीमारी ठीक करना चाह रहे हैं तो आयु के इस ज्ञान के आधार पर अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने के लिए ज़रूर तैयार रहें।

 

आयुर्वेद अन्य चिकित्सा प्रणालियों के साथ भी काम करता है 

अगर आप किसी और चिकित्सा प्रणाली से उपचार कर रहे हैं तो आयुर्वेद अपनाने के लिए आपको सभी दवाएं छोड़ने की ज़रूरत नहीं है। आयुर्वेद की ज्यादातर दवाएं दूसरी दवाओं से प्रतिक्रियाएं नहीं दिखाती बल्कि उपचार का प्रभाव बढाती ही हैं।

 

तो अगली बार अगर आप जब किसी रोग के उपचार को ढूंढें तो आयुर्वेद का रूख ज़रूर करें। इसे अपनाएं और जीवन के संतुलित आनंद को अवश्य जानें।