किस तरह करें बच्चों में कब्ज़ का इलाज

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image credits: wholeparent.com

बच्चों में कब्ज़ की समस्या आम है। इसकी मुख्य वजहें बच्चों को टॉयलेट उपयोग करना सिखाने व् आहार में बड़े बदलाव होते हैं। ज्यादातर मामलों में यह समस्या अस्थाई होती है लेकिन अगर आप आपके बच्चे को कब्ज़ की समस्या अक्सर परेशान करती है तो आपको ज़रूरी कोशिशें होगी। Keywords: stomach pain in hindi, pet ki bimari, pet me dard, pet ke dard ki dawa, pet ke rog, pet me kide, pet ke kide ki dawa

आइये जानते हैं बच्चों में कब्ज़ की समस्या से जुडी ज़रूरी बातें-

 

लक्षण 

बच्चों में कब्ज़ के ये लक्षण आम होते हैं-

  • हफ्ते में तीन या और भी कम बार शौच जाना
  • शौच करने में तकलीफ होना तथा मल का रुखा और सख्त होना
  • शौच करते हुए दर्द होना
  • पेट में दर्द होना
  • बच्चे के कपड़ों में तरल या मिटटी जैसा मल लगा होना-यह मल द्वार में शौच रुके होने का संकेत है
  • मल के साथ रक्त निकलना

 

अगर बच्चे में यह डर है की शौच जाने से तकलीफ होगी, तो वह इस क्रिया को करने से बचेगा। उसकी इस आदत को आप उसके पैरों को बांधने, कूल्हों को संकुचित करने तथा शौच रोकने की कोशिश करने पर चेहरे के भाव बदलने जैसे संकेतों से पहचान सकते हैं।

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डॉक्टर को कब दिखाएँ 

बच्चों में कब्ज़ की समस्या गंभीर नहीं होती। पर कई बार यह समस्या जटिल होकर अन्य बीमारियों की जड़ बन सकती है। इसलिए अगर आपके बच्चे में आपको निम्न लक्षण दिखे, तो उसे ज़रूर चिकित्सक के पास लेकर जाएं-

 

  • बुखार
  • उलटी
  • मल में रक्त
  • पेट में सूजन
  • वजन कम होना
  • मल द्वार में तकलीफ़देह चोट
  • मल द्वार से आँतों का झांकना

 

कब्ज़ के कारण 

कब्ज़ का मुख्य कारण खाने का पाचन तंत्रों से धीरे-धीरे गुजरना होता है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं, पर बच्चों में निम्न कारण मुख्य होते हैं-

 

  • शौच रोकना
  • टॉयलेट का उपयोग कम उम्र में सिखाना या बच्चे का मन न होना
  • आहार में बदलाव तथा खाने में रेशेदार सब्जी की कमी
  • खास दवाएं
  • गाय के दूध से एलर्जी
  • अनुवांशिक कारण
  • पेट की समस्या आदि कुछ खास रोग

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बच्चों को कब्ज़ से बचाएं 

बच्चों को कब्ज़ से बचाने के लिए-

 

  • उन्हें फाइबर युक्त आहार देना शुरू करें
  • बच्चों को भरपूर तरल पदार्थ लेने के लिए प्रेरित करें
  • शारीरिक गतिविधियों को बढाएं
  • टॉयलेट की रूटीन बनाएं
  • बच्चें को शौच आने पर टॉयलेट जाने का महत्व बताएं
  • उसकी दवाओं पर ध्यान दें।

 

अगर आपके बच्चे का दिन का ज्यादातर समय सुस्त अवस्था में बीतता है, उसके आहार में पर्याप्त फाइबर और तरल नहीं रहता है, वह मानसिक रोगों के लिए दवाएं लेता है, मल द्वार से जुड़े रोगों का उपचार ले रहा है तथा परिवार में कब्ज़ की समस्या बनी रहती है तो आपके बच्चे को कब्ज़ की समस्या होने की आशंका ज्यादा है। ऐसे में आपको ज्यादा सावधानी बरतनी होगी तथा चिकित्सक से चर्चा कर पाचक का प्रयोग भी अपनाना होगा। जीवनशैली के महत्वपूर्ण बदलाव आपने बच्चे को इस समस्या के दुष्प्रभावों से बचा सकते हैं।

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