गर्मियों का फल बेल के औषधीय गुण और घरेलू उपाय

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आपने बेल और बेल पत्र भगवान को चढ़ाने के काम में तो लिया होगा लेकिन क्या आप इसके घरेलू फायदे जानते हैं। (bel ke patte khane ke fayde, bel phal ke fayde) आयुर्वेद में बेल को औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना गया है। गर्मियों के मौसम में मिलने वाला बेल गर्मी से राहत के साथ ही कई स्वास्थ्य समयस्याओं से भी निजात दिलाने में सक्षम है।

बेल का गूदा बहुत कामों में प्रयुक्त होता है। इसका गूदा खाने से हर प्रकार के दस्त रुक जाते हैं। बेल का मुरब्बा, शरबत या शिकंजी लेने से भी दस्त की समाप्ति हो जाती है। बेल की गिरी भी छोटे-मोटे बहुत से रोगों के लिए उपयोगी है। नियमित बेल शरबत का सेवन आपको निरोग बने रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

आइये पढ़ते हैं कि किन किन बीमारियों में बेल के फल को किस तरह इस्तेमाल में लाना चाहिए–

 

1. लू लग जाए तो- गर्मियों में लू लगने पर बेल का उपयोग रामबाण की तरह काम करता है। बेल के ताजे पत्तों को पीस लें और पैर के तलुओं में अच्छे से मलें। सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करें तुरंत राहत मिलेगी।  मिश्री डालकर बेल का शर्बत पीने से तुरंत राहत मिल जाती है।

 

2. मधुमेह (diabetes)- बेल की पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से डायबिटीज कंट्रोल में रहती है।

 

3. खूनी बवासीर– 10 ग्राम बेल गिरी, सात कालीमिर्च, 10 ग्राम मिश्री और दो सफेद इलायची के दाने – सबको अच्छी तरह पीस लें। प्रतिदिन आधी दवा सुबह और आधी दवा शाम को लेने से इस रोग से छुटकारा मिलता है।

 

4. रतौंधी (Night blindness)– बेल की पत्तियों का रस पीने से रतौंधी का रोग जल्दी ठीक हो जाता है।

 

5. बहरापन(Deafness)– 20 ग्राम बेल का गूदा, 50 ग्राम बकरी का दूध तथा 10 ग्राम गोमूत्र– तीनो चीजों को सरसों के तेल में पका और छान कर कान में डालने से बहरापन दूर करने में फायदा मिलता है।

 

6. मुंह के छाले(Ulcer)– बेल के हरे पत्तों को पानी में उबालकर रोज कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

 

7. शरीर की दुर्गंध(Bad Smell)– बेलपत्र का रस तिली के तेल में मिलाकर मालिश करें। इससे शरीर की दुर्गंध दूर हो जाएगी।

 

8. दस्त(Loose Motion)– पके हुए बेल का गूदा खाने या उस पानी में घोलकर पीने से दस्त रुक जाते हैं। बेल का मुरब्बा या चूर्ण भी दस्तों में असरदार है।

 

9. खूनी दस्त– बेल का गूदा, कोसला, जायफल तथा अफीम– सबको पानी में घोलकर मिला लें। फिर पेट पर लेप करें। इससे खूनी दस्त बंद हो जाते हैं।

 

10. दिल की धड़कन(Heart Rate)– यदि दिल स्वाभाविक से अधिक गति से धड़कता है तो उसे रोग माना जाता है। बेल के पेड़ की थोड़ी सी छाल को पानी में डालकर अच्छी तरह पकाएं। जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर पी जाएं। इस काढ़े से दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है।