इन 5 प्राणायामों से पाएं बेहतर नींद 

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Image Credits: Reader's digest

अगर आपको नींद आसानी से नहीं आती तो आप अकेले नहीं हैं। विश्व में होने वाले कई शोध यह दर्शाते हैं की 30 प्रतिशत व्यस्क नींद की किसी न किसी समस्या से ग्रसित हैं तथा 10 प्रतिशत व्यस्क अनिद्रा की गम्भीर बीमारी के शिकार हैं।

इसकी एक बड़ी वजह हमारी व्यस्त और तेज़ भागती ज़िन्दगी है, जिस वजह से हमें मन शांत करने, संतुष्ट होने तथा नींद आने में समस्या होने लगती है। देखा जाता है की ऐसे मामलों में प्राणायाम का अभ्यास आपकी बड़ी मदद कर सकता है।

आइये जानते हैं कुछ आसान प्राणायाम जिनका अभ्यास सोने से पहले करने से आप बच्चों की तरह निश्चिंत नींद में सो पाएंगे-

शीतली प्राणायाम 

अपने होठों के बीच थोड़ी दुरी बनाएं। श्वास को पूरी तरह मुंह से छोड़ते हुए “फ़ु” की आवाज़ निकालें। अब अपने होठ बंद कर गहरी सांस भरें तथा चार तक गिनें। सांस को एक से सात की गिनती गिनने तक रोके रहें।

फिर से मुंह के द्वारा आवाज़ निकालते हुए सांस छोड़ें। इस पूरी क्रिया को 4 बार दोहराएं।

भ्रामरी प्राणायाम 

आँखें बंद करें तथा गहरी साँसें लें। अपने हाथों से कान को ढकें। आपकी तर्जनी ऊँगली को भोहों पर रखें तथा बाकी उँगलियों को आँखों पर रखें। आपका अंगूठा कान के अंदर रहेगा। अपनी भोहों पर ध्यान केन्द्रित करें, मुंह बंद करें तथा गहरी सांस भरें। अब नाक के द्वारा सांस छोड़ते हुए ॐ की ध्वनी निकालें। इसे 5 बार दोहराएं।

भस्त्रिका प्राणायाम 

गहरी सांस भरें। श्वास को पूरी तरह छोड़ते हुए अपने शरीर पर ध्यान दें तथा कैसा महसूस हो रहा है यह देखें। इस प्रक्रिया को थोड़ी देर दोहराएं फिर सांस लेने और छोड़ने की अवधि को बढाना शुरू करें। कोशिश करें की अभ्यास के अंत तक सांस लेने की अवधि शुरुआत के मुकाबले दुगनी हो जाए।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम 

आलथी-पालथी मरकर बैठें। अपने बाएँ हाथ को घुटने पर रखें तथा दाएं अंगूठे को नाक से लगाएं। पूरी तरह से सांस छोड़ें तथा दाएं नासिका को बंद कर दें। बाई नासिका से गहरी सांस लें। अब बाई नासिका को बंद कर दाई नासिका को खोलें तथा सांस छोड़ें। इसी तरह अब दाई नासिका से श्वास भरें और बाई से छोड़ें। इस क्रिया चक्र को पांच बार दोहराएं।

कपालभाती प्राणायाम 

नाक से गहरी सांस इस तरह भरें जैसे आप कुछ सूंघ रहें हैं। अब सांस को छोटी-छोटी अवधि में तेज़ी से बाहर छोड़ें। इस क्रिया को तब तक दोहराएं जब तक आप शान्ति और नींद महसूस न करने लगें।

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