इस तरह चुनें व्यायाम अपनी उम्र के हिसाब से

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image credits: Vimeo

वज़न संतुलित रखना चाहते हैं तो अपनी व्यायाम को सदा के लिए उपयोगी मानने की गलती न करें। सालों-साल एक ही तरह का अभ्यास काफी नहीं, आपको इन्हे बदलना और मुश्किल करना होगा। जीवन के अलग-अलग पड़ाव में किस तरह सही व्यायाम चुनें, आइये जानें-

Choose Exercises according to age in hindi

उम्र के तीसरे दशक में(20s):

उम्र के इस पड़ाव पर लोग अक्सर मोटापे का शिकार हो जाते हैं। कारण-ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना। शोध बताते हैं की नियमित व्यायाम करने वाले भी ज़रूरत से ज़्यादा बैठे रहने के कारण मोटापे से जूझते हैं।

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कहा जाता है की एक दिन में 10,000 कदम चलना चाहिए। एक पैडोमीटर या स्मार्टफोन से गिनने वाला ऐप उपयोग कर आप दिन भर में चले कदमों को गिन सकते हैं। ज़रूरी है की एक लक्ष्य तय करें। हर हफ्ते 1000 कदम ज़्यादा चलने की कोशिश करें और लक्ष्य तक पहुँचे। थोड़ा सचेत रहें और यह आसान सा तरीका आपको जल्द ही पतला कर सकता है।

 

जीवन के तीसरे दशक में आपके फिटनेस प्लान में कार्डिओ तथा स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल होने चाहिए। 20s में जितने जवान होंगे, कार्डिओ आपको उतना ही फायदा देगा। इसलिए जल्द ही सचेत होकर अपनी सेहत का ध्यान रखना जल्द शुरू कर देना चाहिए।

 

उम्र के चौथे दशक में(30s)-

पिछले दशक में मांसपेशियों की कसरत करना महत्वपूर्ण था पर अब यह ज़रूरी है। 30 के बाद से शरीर में मांसपेशियों का भार लगातार घटने लगता है जिससे मोटापे की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में 20s में किये गए व्यायाम अब काम नहीं करेंगे। इस अवस्था का सामना करने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग अर्थात ताकत बढ़ाने वाले व्यायाम करें। अब चोट लगने की आशंका भी ज़्यादा रहती है इसलिए शरीर को लचीला बनाने के लिए योगाभ्यास भी करें। 

 

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अगर महिलाएं इस दौर में गर्भवती हैं,  होना चाहती हैं या हाल ही में शिशु को जन्म दिया है तो अपने गयनोकोलॉजिस्ट और एक प्रमाणित ट्रेनर की सलाह लेकर अपने लिए उपयुक्त फिटनेस प्लान तैयार करें। गर्भधारण में महिलाओं को सामान्य से ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है। पर इससे ज़्यादा कैलोरीज लेना मोटापा बढ़ा सकता है। ज़रूरी है की इस दौरान भी हल्के व्यायाम किये जाएँ। यह शिशु के जन्म के दौरान और बाद में कई समस्याओं से बचाव करेगा।

 

बढ़ती उम्र में पेट के आस-पास की चर्बी कम करने के लिए कार्डिओ की जगह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग फायदेमंद है। इस दौरान आपके शरीर को ज़्यादा प्रोटीन की भी आवश्यकता है। विज्ञानं के अनुसार अपने वज़न के हर किलोग्राम के लिए आपको 1.5 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। मतलब अगर आपका वज़न 72 किलो है तो हर भोजन में आपको 25-35 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए।

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पाँचवे दशक में(40s)-

आपका शरीर व्यायाम के दौरान नहीं बल्कि इसके बाद आराम करने के दौरान तंदरुस्त होता है। पर आपके 40s में यह प्रक्रिया पहले से लम्बा समय लेती है।

 

अपने फिटनेस प्लान को इस तरह बनाएं की एक तरह की मांसपेशियों की कसरत के लिए एक दिन निर्धारित हो जाए। मसलन सोमवार पैरों की मांसपेशियों पर ध्यान दें और फिर पुरे हफ्ते इन्हे आराम करने दें। इस तरह आपके शरीर को सही कसरत के साथ आराम भी मिल पाएगा।

 

महिलाएं इस दौर में मेनोपॉज़ के कारण हॉर्मोनल बदलाव भी महसूस करती हैं। उनमें बढ़ता वज़न एक आम समस्या देखी जाती है। कई तरह की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग तथा सहनशीलता बढ़ाने वाले अभ्यास आपका वज़न कम करने के साथ ही हॉर्मोन्स को भी संतुलित करेंगे।

 

पर कई महिलाओं में यह काफी नहीं। एस्ट्रोजन की कमी वज़न भले ही बढ़ती हो पर टेस्टोस्टेरोन की कमी मांसपेशी को स्वस्थ रखना तथा मेटाबोलिज्म सही रखना मुश्किल करता है। अगर आप भी बढ़ता वज़न, मुँहासे, झड़ते बाल, योनि में असहजता आदि लक्षण से परेशान हैं तो अपने चिकित्सक से मिलकर हॉर्मोन्स को संतुलित करने का प्रयत्न करें। इसी के बाद आपकी वर्जिश आपको सही नतीजे देगी।

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