जानें कैसे सही पोस्चर आपको दिला सकता है ज़्यादा मार्क्स

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image credits: Parkdale Osteo

अगर गणित की परीक्षा देने में या बहुत सारे लोगों के सामने बोलने में आपको घबराहट महसूस होती है तो पोस्चर में साधारण सा बदलाव आपकी समस्या हल कर सकता है। सेन फ्रांसिस्को यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च में 125 विद्यार्थियों के गणित की परीक्षा में प्रदर्शन को देखा गया। 843 में से 7 घटाने का सवाल और 15 सेकंड देकर बच्चों के पोस्चर को समझा गया। 56 प्रतिशत विद्यार्थियों ने पाया की पीठ सीधी रखकर सवाल हल करना ज्यादा आसान था। यह नतीजे उन लोगों के लिए प्रभावी नहीं थे जिन्हें इस तरह की घबराहट नहीं रहती।

 

 

झुककर पढने से क्या होता है?

शोधकर्ताओं के अनुसार- जो लोग गणित हल करते हुए घबराहट महसूस करते हैं, उनके लिए पोस्चर बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। झुककर काम करने से दिमाग सही तरह से काम नहीं कर पाता और आप अपनी पूरी क्षमता प्रदर्शित नहीं कर पाते। ऐसे में आप सुगमता से सोच भी नहीं पाते।

झुकना दरअसल एक रक्षात्मक पोस्चर है जो आपको मुश्किलों से बचाने के काम का है। पीठ की मांसपेशियां कमजोर होने पर जब आप झुक कर बैठते हैं तो रीढ़ के ज़रिये सभी संकेत शरीर तक नहीं पहुँचते और आप नकरात्मक विचारों के शिकार हो जाते हैं।

 

तनाव पर असर 

इस रिसर्च के शोधकर्ता मानते हैं की यह नतीजे सिर्फ पढाई में नहीं बल्कि खेल, ऑफिस व् भाषण जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी मदद कर सकते हैं। जिन भी कार्यों में व्यक्ति तनाव महसूस कर रहा होता है उसमें उसे अपने पोस्चर पर और भी ज्यादा ध्यान देने की ज़रूरत होती है। इसलिए चाहे आप एथलिट हो या संगीतकार, प्रदर्शन के पहले व् दौरान अपने पोस्चर को सीधा रखना आपको तनाव से बचा सकता है।

 

रुढ़िवादी सोच से बचाए 

एक बार किसी कार्य में निष्फल हो जाने पर कई बार हमारा दिमाग खुद को उस कार्य के नाकाबिल समझने लगता है। अगर आपको गणित से घबराहट होती है तो आप पाएँगे की आपका दिमाग आपको लगातार यह कहते रहता है की आप गणित हल नहीं कर सकते। ऐसी सोच को स्टीरियोटाइप थ्रेट या रूढ़ीवाद का खतरा कहते हैं। यह आपको एक सोच का गुलाम बनाकर आगे बढने से रोक देती है तथा बेहतरी की संभावना को खत्म कर देती है।

ऐसी सोच से बचने के लिए रीढ़ को सीधा रखकर, छाती को चौड़ा कर गहरी सांस लेते हुए खुद को आत्मविश्वास भरी बातें कहनी चाहिए। बातें न कहने पर भी सिर्फ सही पोस्चर ही आपको आत्मविश्वास से भर देगा तथा रूढ़ीवाद के चक्र को खत्म कर देगा।

रूढ़ीवाद के खतरे से आप सिर्फ गणित हल करते हुए ही दो चार नहीं होते, बल्कि जीवन की हर कठिनाई में इसे अपने सामने पाते हैं। जब भी आपको लगे की आप अपनी ही सोच के गुलाम हो रहे हैं, तो रीढ़ सीढ़ी कर खुद को आत्मविश्वास से भरने की कोशिश करें।

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चुनाव आपका है, एक छोटा सा बदलाव न सिर्फ आपको बेहतर मार्क्स दिला सकता है बल्कि आपको सशक्त कर ध्यान केन्द्रित करने की शक्ति बढाता है तथा आपको जीवन के लिए तैयार करता है। याद रखें, हम खुद को जिस तरह रखते हैं तथा अपना कार्य जिस तरह करते हैं, यह आपके प्रति सिर्फ दूसरों का ही नजरिया नहीं बनाता , बल्कि आपका स्वयं का नजरिया भी बनाता है।