जानिए क्यों नुकसानदायक है छोटे बच्चों को गाय का दूध पिलाना

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image credits: dairycommerce.com

हर किसी के जीवन में एक पड़ाव जरूर आता है जब व्यक्ति माता या पिता बनता है। (cow milk for infants, newborn, babies less than a year side effects ) यह पल जितनी खुशियाँ साथ में ले आता है उतनी ही जिम्मेदारियाँ भी। जिम्मेदारी अपने बच्चें को सही परवरिश देने की, जिम्मेदारी अपने बच्चे की सही देखभाल करने की और जिम्मेदारी अपने बच्चें के सेहत को हमेशा दुरुस्त बनाए रखने की। जब बच्चा बीमार होता है तो ना केवल बच्चा तकलीफ में होता है बल्कि माता-पिता भी उतनी ही तकलीफ में होते है। इसलिए माता- पिता हमेशा यह कोशिश करते है कि उनका बच्चा स्वस्थ हो, दुरुस्त हो और हमेशा खिलखिलाता रहे। यह लेख माता-पिता की इसी कोशिश को एक नई दिशा देने के लिए है।

बच्चें के जन्म के बाद उसका सबसे पहला आहार होता है दूध। वैसे डॉक्टरों की सलाह माने तो माँ का दूध ही नवजात शिशु के लिए सबसे बेहतर होता है परन्तु कभी-कभी परेशानियाँ ऐसी आ जाती है जब बच्चें को माँ का दूध नहीं नसीब हो पाता जैसे कि माता की बच्चे के जन्मे के बाद ही मृत्यु हो जाना, माँ का भी काम पर जाना इत्यादि। इन वजहों से लोग बॉटल-दूध की तरफ रुख करते हैं और बॉटल में सबकी सबसे पहली पसंद होती है गाय का दूध। यह सब जानते है कि गाय का दूध बहुत ही फायदेमंद है और जन्म के 2 -3 साल के बाद शिशु भी इससे ग्रहण कर सकते है परन्तु नवजात और 1 साल की कम आयु के बच्चों के लिए गाय का दूध हानिकारक है। आइए जानते है कि वे हानिकारक प्रभाव क्या-क्या है:-

 

1. सबसे पहला और प्रमुख प्रभाव है अपचन की समस्या। भले ही नवजात शिशु का जन्म हो जाता है परन्तु उनका शारीरिक विकास अभी तक पूर्ण नहीं हुआ होता है। मस्तिष्क से लेकर पाचन तंत्र तक, सभी महत्वपूर्ण अंग पूर्ण तरीके से विकसित नहीं हुए होते है। गाय के दूध में ऐसे प्रोटीन्स पाए जाते हैं जो केवल विकसित और मजबूत पाचन तंत्र द्वारा ही पचाए जा सकते है। इसलिए ऐसे दूध के सेवन से शिशु को अपचन की समस्या से गुजरना पड़ता है और अपचन से उनमें पेट-दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

 

2. दूसरा महत्वपूर्ण हानिकारक प्रभाव है एनीमिया। गाय के दूध में बहुत ही कम मात्रा में आयरन पाया जाता है। शिशु के जीवन में आयरन की आपूर्ति पर इसलिए जोर दिया जाता है क्योकि आयरन लाल रक्त कणों के उत्पादन के लिए बहुत आवश्यक होता है। जब आयरन की कमी होती है तो इन कणों का उत्पादन भी घट जाता है जिससे शिशु में रक्त की कमी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस बीमारी को एनीमिया के नाम से जाना जाता है। हालाँकि जन्म के समय शिशु के शरीर में आवश्यक मात्रा में आयरन उपलब्ध होता है लेकिन 3-4 महीने बाद ही यह उत्पादन घट जाता है जिसकी आपूर्ति बच्चे के भोजन से होना चाहिए। हालाँकि गाय का दूध तो इसके लिए सही विकल्प नहीं लेकिन बाजार में आयरन आपूर्ति के लिए कई अन्य विकल्प उपलब्ध है।

 

3. आयरन के अलावा गाय के दूध में अन्य बहुत सारे पोषक तत्वों की कमी पाई जाती है जैसे कि विटामन E,जिंक इत्यादि। इस वजह से शिशु का सामजंस्य विकास पहले वर्ष की आयु में उतना नहीं हो पाता जो जरुरी होता है। कई बार इस वजह से शिशु के शरीर में आतंरिक रक्तस्राव भी हो जाता है।

 

4. गाय के दूध से शिशु के किडनी पर भी बहुत प्रभाव पड़ता है क्योकि इस दूध में ऐसे तत्व पाए जाते है जो के शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने के लिए किडनी पर बहुत दबाव डालते है। वे तत्व है सोडियम, पोटैशियम और क्लोराइड। हालाँकि यह तत्व जरुरी है पर इस दूध में इनकी मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है और शिशु को इतनी अधिक मात्रा की जरुरत नहीं होती है।

 

5. गाय के दूध का शिशु पर होनेवाला सबसे बड़ा हानिकारक प्रभाव जो है वह निर्जलीकरण की समस्या है। जैसा कि हम बता चुके हैं कि इस दूध के कुछ प्रोटीन्स शिशु द्वारा अपचित होते है परन्तु कुछ प्रोटीन्स ऐसे भी है जो शिशु के लिए आवश्यक है। ऐसे प्रोटीन्स के बावजूद भी यह दूध शिशु के लिए लाभकारी नहीं है क्योकि इन आवश्यक प्रोटीन्स की मात्रा इस दूध में इतनी अधिक होती है कि यह लाभ देने के बजाय नुकसान पहुँचा जाते है। इस वजह से कभी-कभी शिशु के मोटापे का शिकार होने का खतरा बन जाता है। जब शिशु के शरीर में इन प्रोटीन्स की अधिक मात्रा जाती है तो यह मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकाले जाते है किन्तु इस प्रोटीन्स की वजह से मूत्र बहुत ही अधिक घनत्वपूर्ण हो जाता है। अब जब प्रोटीन्स दूध में अधिक है तो उसे संतुलित करने के लिए शिशु को कम भोजन दिया जाता है किन्तु मूत्र की मात्रा अधिक ही रहती है (अधिक प्रोटीन्स को बाहर निकलने के लिए)। इस वजह से शरीर में जल का संतुलन बिगड़ जाता है क्योकि कम भोजन और ऊपर से शरीर में उपस्थित जल का उपयोग किडनी द्वारा शरीर से अधिक प्रोटीन मूत्र द्वारा बाहर निकालने में किया जाता है। अगर यह स्थिति अधिक देर तक रहती है तो शिशु में निर्जलीकरण की समस्या उत्पन्न हो जाती है जो कि बहुत ही ख़तरनाक है क्योकि स्थिति मृत्यु तक भी पहुँच जाती है।

 

6. हम गाय के दूध से शिशु को अपचन की परेशानी से आपको अवगत करा चुके हैं। किन्तु अपचन की इस समस्या का एक और कारण है। वह यह कि ज्यादातर शिशु लैक्टोस इनटॉलेरेंस होते है अर्थात लैक्टोस उनके लिए उपयुक्त नहीं होता या उनका शरीर लैक्टोस को सह नहीं पाता। परन्तु गाय के दूध में लैक्टोस मौजूद होता है जिससे शिशु का पाचन तंत्र प्रभावित होता है और फिर उन्हें पेट दर्द की समस्या से जूझना पड़ता है।

 

7. गाय के दूध में आयरन की कमी तो पाई जाती है परन्तु काम ही सही पर जितनी भी मात्रा में आयरन उपलब्ध है इस दूध में, वह भी शिशु के शरीर द्वारा अवशोषित नहीं हो पाता। इसका सबसे मुख्य कारण है इस दूध में पाए जानेवाले कैल्शियम और कैसिइन तत्व। यह तत्व दूध से आयरन के अवशोषण को बाधित करते है जिसकी वजह से शिशु को एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से गुजरना पड़ सकता है। यदि सही समय पर इस समस्या को ठीक नहीं किया गया तो बाद में आयरन से भरपूर भोजन देकर भी शिशु को पुनः ठीक नहीं किया जा सकता।

 

8. ज्यादातर बच्चों को गाय के दूध से एलर्जी की समस्या होती है। इससे शिशु के पाचन तंत्र तथा किडनी में जलन होने लगता है। इससे अन्य समस्याएँ भी उत्पन्न हो जाती है जैसे कि सोने में परेशानी, अनिद्रा इत्यादि जो कि शिशु के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।

 

9.अगर किसी वजह से शिशु को इस एलर्जी की आदत पड़ भी जाए तो भी यह शिशु के स्वास्थ्य के प्रति सही संकेत नहीं है क्योकि इससे शिशु को भविष्य में एक ही तरह की एलर्जी विकसित हो सकती है।

अंत में यह लेख आपको यह सुझाव नहीं देता कि आप अपने शिशु को गाय का दूध दे ही ना! हमारी कोशिश आप सबको सिर्फ यही बताने की है कि 1 वर्ष की आयु तक के शिशु को इस दूध का सेवन ना कराए। उसके बाद आप करा सकते है लेकिन ऐसा करने के पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। 1 वर्ष तथा उससे कम के आयु के बच्चों के लिए होल मिल्क सबसे बेहतरीन विकल्प है। यदि 1 या 2 वर्ष की आयु के बाद आप गाय के दूध का सेवन अपने शिशु को शुरू करा रहे है तो साथ में आयरन से भरपूर भोजन का भी सेवन अवश्य कराए।