जानिए बेहतर सेहत के नए ट्रेंड

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image credits: GamePlan A

सेहत और वैलनेस की दुनिया लगातार बदलती रहती है। हम जैसे-जैसे इंसानी शरीर को बेहतर रूप से समझते जाते हैं, नए अविष्कार हमारे सामने सम्भावनाएं बनाते जाते हैं। इनमें से कुछ अविष्कार इतने प्रभावी होते हैं की ये तेज़ी से अपनी जड़ें जमाते हैं और ट्रेंड बन जाते हैं।

 

2018 के ऐसे ही कुछ हेल्थ ट्रेंड को यहाँ जानिए-

 

फिटनेस गैजेट कई ज़िन्दिगियाँ बचा रहे हैं 

आज फिटनेस गैजेट सिर्फ आपके कदम ही नहीं गिन रहे, बल्कि आपकी हर नब्ज़ को रिकॉर्ड कर रहे हैं। आपके दिल की धडकन कितनी तेज़ है, वर्कआउट के दौरान आपने कितनी कैलोरीज जलाई तथा आपके शरीर के ज़रूरी माप संतुलित है या नहीं।

पर अब ये आपको कई गंभीर समस्याओं से समय से पहले ही सचेत कर सकते हैं। जैसे हाल ही में एक महिला ने जब पाया की उसकी दिल की धडकन की दर तेज़ी से बदल रही है तो वो जल्द इमरजेंसी रूम पहुंची। बाद में उसे फेफड़ों के पास खून का थक्का जमने की समस्या पाई गयी जिसका तुरंत इलाज शुरू किया गया।

इसी तरह कई और मामलों में ऐसे फिटनेस गैजेट ने महत्वपूर्ण समय और जान बचाई है। यही वजह है की दुनिया भर में ऐसे गैजेट के लांच को दी जाने वाली सरकारी स्वीकृति की प्रक्रिया को भी तेज़ करने पर जोर दिया जा रहा है।

 

हम वसा से डरना बंद कर चुके हैं 

शरीर में वसा की मात्रा कम कर पतला होने के लिए वसा कम खाना होगा, यही हमारी समझ रही है। यही वजह है की पिछला दशक हमारे बाज़ार लो फैट उत्पादों से भरे हुए थे। पर अब हमारी समझ बढ़ी है की वसा का सेवन हमारे दिमाग और शरीर को उर्जा देने के लिए महत्वपूर्ण है। कीटो डाइट भी इसी समझ के अनुसार बनाई गयी है और इसके लाभ भी यही प्रमाणित करते हैं की वसा को आहार से बाहर करना समझदारी नहीं है।

इतना ही नहीं, हाल ही में हुए शोध में पाया गया है की तेल आदि वसा को भोजन में शामिल करने से शरीर पोषण को बेहतर रूप से अवशोषित कर पाता है। साथ ही पेट और सेहतमंद बनी रहती है और मल बद्धता बेहतर होती है।

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ज्यादा से ज्यादा लोग मानसिक रोगों को स्वीकार कर उपचार कर रहे हैं 

WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार डिप्रेशन के शिकार 50 प्रतिशत लोग इसका इलाज ही नहीं करवाते। इनमें पुरुषों की मात्रा अधिक होती; देखा जाता है की पुरुष मन में चल रही बातों को किसी से सांझा करने से बचते हैं। इसके दुष्प्रभाव भी गंभीर है- पुरुष महिलाओं के मुकाबले 3.5 गुना ज्यादा मामलों में आत्महत्या करते हैं।

पर इन रोगों के प्रति जागरूकता बढने से अब ज्यादा से ज्यादा लोग उपचार की ओर बढ़ रहे हैं। पुरुषों में भी अपनी मानसिक सेहत की ओर जागरूकता बढ़ी है तथा वे घबराहट, अनिद्रा और चिंता जैसी समस्याओं का समाधान ढूंढने का संकल्प कर रहे हैं।

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यौन स्वास्थ्य के लिए एप 

यौन स्वास्थ्य पर बात करना हमारे समाज में निषेध माना जाता है। बड़े होते बच्चों से लेकर ढलती उम्र में पहुंचे व्यस्क, सभी अपने यौन स्वास्थ्य के लिए जानना चाहते हैं, पर पूछने में सभी अब भी हिचकिचाते हैं। इस समस्या को दूर करने में एप काम आ रहे हैं। ज़रूरी सवालों के जवाब, माहवारी और गर्भावस्था की गणना व् शरीर पर उभरे मस्से में आ रहे बदलाव, ये सभी एप की मदद से समझे जा सकते हैं।

पर एप यहीं नहीं रुकते। प्रेगनेंसी टेस्ट, स्पर्म टेस्ट आदि को घर पर ही करने की सुविधा देने के लिए एक छोटी किट और एप का सहारा लिया जाता है। फ़ोन का कैमरा किट पर आए नतीजे को कैद करता है और एप इसे समझकर आपको बताता है तथा आगे की राह भी दिखाता है।

जरुरी है आँखों की सही देखभाल अगर आप भी स्मार्टफ़ोन और लैपटॉप करते हैं इस्तेमाल