6 तरीके जिससे आपकी त्वचा तनाव को दर्शाती है

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Image Credits: Bareskin Essentials

“असली खूबसूरती अंदर से आती है”; हम सभी ने जीवन में कभी न कभी इस कहावत को ज़रूर सुना होगा। हमारी त्वचा शरीर का सबसा बड़ा अंग है जिसपर बाहर व् अंदरूनी प्रभाव जल्द असर दिखा सकते हैं। सीरम, मास्क व् नियमित स्किन केयर भी कई बार हमारी त्वचा को स्वस्थ रख पाने में असफल होती है। इसकी वजह तनाव हो सकता है; जब हमारे शरीर में तनाव की वजह से कोर्टिसोल के स्तरों में उछाल आता है तो नसों में बह रही तरंगें सन्देश सही तरह से भेज नहीं पाती जिससे मुंहासे और झुर्रियां आ सकती हैं।

तो आइये, जानते हैं वो प्रमाणित तरीके जिससे आपकी त्वचा की अंदर से भी रक्षा की जा सकती है-

सूरज की रौशनी से तनाव तथा त्वचा की रक्षात्मक क्षमता में कमी

जब त्वचा की रक्षात्मक क्षमता शिथिल होने लगती है तो सूर्य की किरणें कैंसर कारी हो जाती हैं। चाहे ये किरणें प्राकृतिक हों या टैनिंग के लिए बनाई गयी कृत्रिम किरणें हों, दोनों ही त्वचा के द्वारा सोखी जा सकती है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका सनस्क्रीन का उपयोग है।  साथ ही आप इसके ऊपर नारियल, तुलसी, पुदीना, लेमन ग्रास आदि के तेल लगा सकते हैं; इनकी SPF संख्या भी आपकी त्वचा की रक्षा के लिए प्रभावी है।

सूजन व् संक्रमण

अक्सर त्वचा के भीतर सूजन रहने से सोरायसिस, एक्जिमा आदि चर्मरोग हो सकते हैं। तनाव होने पर त्वचा को संतुलन बनाने में और दिक्कत होने लगती है जिससे सूजन बढ़ सकती है। अगर एक हफ्ता आपने तनावग्रस्त रहकर काम किया है तो सम्भावना है की आपको मुंहासे होने या चेहरे पर अत्यधिक तेल आने की समस्या हो जाएगी।

इस समस्या से निपटने के लिए आपको तनाव की वजह को खत्म करना होगा। ऐसा करने के लिए थोडा व्यायाम, अच्छा आहार और कभी-कभी थेरेपी लिए जा सकते हैं।

त्वचा तेलिय होना तथा मुंहासे होना 

खासकर महिलाओं में तनाव की वजह से मुंहासे और तेलिय त्वचा की समस्या बढ़ सकती है। इसकी वजह शरीर में रसायनों और हॉर्मोन के बदलते स्तर होते हैं जिससे तेल का स्त्राव बढ़ जाता है।

हालांकि जीवन से तनाव को पूरी तरह खत्म कर देना सम्भव नहीं है, पर कुछ तरीकों के ज़रिये इसे कम किया जा सकता है। इसमें व्यायाम, तनाव प्रबन्धन और सैलिसिलिक अम्ल का सेवन महत्वपूर्ण है।

बालों का झड़ना, नाखूनों का टूटना तथा सिर की त्वचा से मोम निकलना 

तनाव के अनुभव कई तरह से आपके सामने आते हैं। हो सकता है आप तनावग्रस्त होने पर नाख़ून चबाते हों या बालों को खींचते हों। इसकी वजह कोर्टिसोल नामक हॉर्मोन होता है जो तनाव के समय हमारे शरीर में पैदा होता है।

पर अगर आपको ये समस्या है तो इसे तनाव समझने के पहले किसी चर्म विशेषज्ञ से ज़रूर मिलें। इन लक्षणों की वजह सही पोषण न मिल पाना भी हो सकता है।

पतली और सम्वेदनशील त्वचा 

शरीर में कोर्टिसोल के स्तर जब असामान्य स्तर तक बढ़ जाते हैं तो त्वचा पतली हो सकती है। कोर्टिसोल आपकी त्वचा के प्रोटीन को खत्म करने लगता है जिससे आपको आसानी से चोट लगने और कटने की समस्या हो सकती है।

त्वचा पतली होने की एक और वजह कशिंग सिंड्रोम भी होता है जिससे हॉर्मोन के संतुलन की वजह से आपको मांसपेशियों की कमजोरी भी महसूस होती है। वजह चाहे जो भी हो, लक्षण दिखने पर आपको जल्द ही चिकित्सक से मिलना चाहिए।

चोट ठीक होने में समय लगना 

अत्यधिक तनाव होने पर आपकी त्वचा की परतों में कमजोरी आ सकती है। ऐसे में आपको संक्रमण और प्रदुषण से कई समस्याएँ हो सकती है। ऐसा होने पर चोट ठीक होने की प्राकृतिक प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है।

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