भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है “ अष्ट-वक्रासन” – Eight Angle Pose Yoga

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अष्ट-वक्रासन (Eight Angle Pose Yoga) संस्कृत के शब्दों अष्ट तथा वक्र से मिल कर बना है। संस्कृत में आठ को अष्ट तथा मुड़े हुए को वक्र कहते हैं। यह आसन संत अष्टवक्र को समर्पित है। संत अष्टवक्र ने कहा है की “ यदि कोई व्यक्ति अपने को मुक्त सोचता है तो वह मुक्त है, परन्तु यदि कोई व्यक्ति खुद को बंधन में बंधा हुआ महसूस करता है तो वह बंधन में बंधा है।“ इसलिए यदि आप इस आसन को करने जा रहें है तो अपने मन से किसी भी प्रकार की कमजोरी या बाधा को दूर कर दें।

यह आसन संतुलन और साम्य के लिए जाना जाता है। आइये देखते है इस आसन को करने की विधि और लाभ-

अष्टवक्रासना करने की विधि – Steps to do Eight Angle Pose Yoga (Ashtavakrasana)

1. सर्वप्रथम समतल जमीन पर चटाई बिछाकर दण्डासन में बैठ जाइये।

2. अब सांस अन्दर खींचते हुए अपने बाएं पैर को बाएं कंधे पर रखें। पैर से भुजा पर दबाव डालें ताकि पैर वहाँ स्थिर हो जाए। (यदि आपका पैर कंधो पर स्थिर नही है तो उसे अपने हाथों से पकड़ लें)

3. सांस बाहर की तरफ छोड़ते हुए अपने दोनों हाथों को नितम्बों से थोड़ी दूरी पर जमीन पर टिका कर रखें। अपने बाएं पैर का दबाव कंधे पर बनाये रखें, और अन्दर की तरफ सांस लेते हुए दाहिने पैर को बाएं पर रखें। दोनों पैरों के टखने आपस में फंसा लें। आपका पैर कंधे से फिसल सकता है, पर ध्यान दें की पैर भुजा पर टिका हुआ हो।

4. अपने हाथों पर दबाव डालें। और सांस बाहर को छोड़ते हुए अपने नितम्बों को जमीन पर पीछे की ओर खिसकाएँ। अब सांस अन्दर की तरफ लें, सामने की तरफ देखते हुए अपने कन्धों को जमीन से उपर उठायें।

5. अपने कन्धों को उसी स्थिति में रखें। बाहर की तरफ सांस छोड़ते हुए अपने नितम्बों को ऊपर की तरफ उठाने के लिए अपने पैर से भुजा पर दबाव बनाएं।

6. अपने पैरों को सीधा करने के लिए, अपनी एडियों को सामने की तरफ फैलाएं। जिससे आपकी बायीं भुजा आपकी दोनों जांघो के बीच दब जाएगी।

7. अगर आप अपनी अन्दर की जांघो को शक्तिशाली रूप से दबाते हैं तो सिर्फ इन क्रियाओं से ही आप आसन की मुद्रा में आ जायेंगे।

8. 2-3 बार गहरी सांस लीजिये और अपने घुटनों को मोड़ते हुए पुनः प्रारम्भिक स्थिति में आ जाएँ। यही क्रिया अब दायें तरफ से दोहरायें।

अष्ट-वक्रासन के लाभ – Benefits of Eight Agle Pose (Ashtavakrasana)

– यह बांह और कलाइयों को मजबूत बनाता है।

– यह पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।

– यह आसन एकाग्रता और संतुलन बनाने में सहायता करता है।

– यह आसन आपके शरीर को तनाव तथा व्यग्रता से मुक्त करता है।

– मासिक गड़बड़ियों की तुष्टि करता है।

– यह आसन शरीर और मन के बीच बहुत अच्छा सम्बन्ध बनाता है।