कहीं ये तो नहीं है आपकी आँखों के अस्वस्थ होने की वजह 

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Image Credits: Kurwa Eye Center

अक्सर हमारे सामने आँखों से जुडी कोई न कोई समस्या आ खड़ी होती है। कुछ छोटी होती है तथा अपने आप खत्म हो जाती हैं वहीं अन्य को किसी विशेषज्ञ की ज़रूरत पड़ती है। पर आखिर आपकी समस्या की जड़ क्या है? दवाओं के अलावा अगर रोग के मूल कारण पर भी ध्यान दिया जाए तो समस्या को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। आइये जानते हैं उन वजहों को, जिससे आँखों की समस्या जन्म ले सकती है-

आँखों में तकलीफ 

अगर आप घंटों किताब पढ़ते हैं, कंप्यूटर पर काम करते हैं या लम्बी दुरी का सफर करते हैं तो आँखों में तकलीफ महसूस ज़रूर करते होंगे। अगर आप अपनी आँखों को अत्यधिक उपयोग कर लें तो ऐसा हो सकता है। आँखें थक जाती हैं और अन्य अंगों की तरह आराम की ज़रूरत होती है।

अगर आँखों में तकलीफ है तो समय समय पर इन्हें आराम देने का नियम बनाएं। अगर कुछ समय बाद भी यही समस्या बनी रहे तो चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

लाल आँखें 

आँखों की उपरी सतह नसों से बनी होती है जो की संक्रमण होने पर फुल जाती हैं। आँखों में आया लालपन भी इसी वजह से होता है। आँखों की थकान, देर रात तक जागना, नींद की कमी या एलर्जी इसकी वजह हो सकते हैं। अगर चोट इसकी वजह है तो तुरंत चिकित्सक से मिलें। साथ ही आँख आने या धुप से नुक्सान होने पर भी आपकी आँखें लाल हो सकती हैं।

रतौंधी 

क्या रात में आपको देखने में समस्या होती है? यह रतौंधी हो सकती है। पर यह कोई रोग नहीं बल्कि अपने आप में एक लक्षण है। दूर का न दिखना, मोतियाबिंद, विटामिन A की कमी आदि इस समस्या की वजह हो सकते हैं तथा आसानी से सही किये जा सकते हैं।

कई बार लोग इस समस्या के साथ जन्म लेते हैं तथा कई बार रेटिना को क्षति करने वाले रोग की वजह से ऐसा होता है। ऐसे मामलों में उपचार कठिन हो जाता है। वजह जो भी हो, चिकित्सक से ज़रूर परामर्श लें।

अम्ब्लोपिया 

आम भाषा में इसे आँखों का भैगापन भी कहा जाता है। ऐसे में एक आँख की मांसपेशी कमजोर रहती है जिससे यह दूसरी आँख की तरह फुर्ती से काम नही कर पाती। बच्चों में अक्सर यह समस्या देखि जाती है। अगर शिशु में यह रोग दिखे तो तुरंत चिकित्सक से मिलें; जल्द इस समस्या का समाधान करने से उपचार आसान हो जाता है।

प्रेस्बाइओपिआ 

यह रोग तब होता है जब आप पास रखी चीज़ों पर नजर केन्द्रित नहीं कर पाते। 40 की उम्र के बाद किसी भी किताब को सामान्य से ज्यादा दुरी पर पढने की ज़रूरत लगना इसका पहला संकेत है। पढने का चश्मा, कांटेक्ट लेंस, लेसिक सर्जरी व् अन्य कई तरीकों से आँखों को दोबारा सामान्य दृष्टि दी जा सकती है।