5 फ़ूड लेबल जो आपको गुमराह कर रहे हैं

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आहार से जुड़े हुए उत्पाद बनाने वाली कंपनियां जानती हैं की आजकल उपभोगताओं को बेहतर और ज्यादा हेल्थी आहार की चाह है। यही वजह है की मौका मिलते है वे अपने उत्पाद पर ऐसे लेबल लगाने से नहीं चुकते जिनसे वे अपने उत्पाद को हेल्थी घोषित कर सकें। पर ये फ़ूड लेबल पूरी कहानी नहीं बताते। आइये जानें पांच ऐसे फ़ूड लेबल को जो आपको गुमराह कर रहे हैं। 

मल्टीग्रेन

इन आहारों में बेशक एक से ज़्यादा अनाज मौजूद होते हैं लेकिन ज़रूरी नहीं की ये रिफाइन न हों। मतलब मल्टीग्रेन होने के बावजूद आपके आहार में ज़रूरी फाइबर हो यह ज़रूरी नहीं। इसी तरह मेड विथ व्होल ग्रेन का लेबल भी आपको गुमराह कर सकता हैं। इनकी जगह व्होल ग्रेन या 100 प्रतिशत ग्रेन का लेबल ढूंढें। 

नो ट्रांस फैट 

ट्रांस फैट को ह्रदय रोग और डायबिटीज का कारण माना जाता है इसलिए आजकल ज़्यादा से ज़्यादा उत्पादक अपने आहारों पर नो ट्रांस फैट का लेबल चिपकाने की होड़ में शामिल हो रहे हैं। पर इस लेबल के धोखे में न आएं, अगर आपके आहार में आधा ग्राम ट्रांस फैट है तो भी इसे जीरो ट्रांस फैट का लेबल मिल सकता है। यह पता करने के लिए सामग्री में पार्शियली हाइड्रोजनेटेड आयल को ढूंढें; अगर यह सूचि में शामिल है तो आपके आहार में ट्रांस फैट मौजूद है।

नो नाइट्रेट 

नाइट्रेट को कैंसर का काऱण माना जाता है इसलिए इससे मुक्त आहार को हर कोई अपनाना चाहता है। पर अगर आपके मीट को प्राकृतिक तत्वों से प्रोसेस किया गया है तो इसे यह लेबल मिल सकता है, भले ही इस प्राकृतिक प्रोसेस से भी मीट में नाइट्रेट पैदा हो जाए। इससे बचने के लिए प्रोसेस किये हुए मीट को कम से कम खाने की कोशिश करें।

रेडूस्ड सोडियम 

इस लेबल को पाने के लिए उत्पाद को मूल उत्पाद से पच्चीस प्रतिशत कम सोडियम युक्त होना चाहिए। ज़ाहिर है, अगर मूल उत्पाद में अत्यधिक नमक हो तो इस लेबल वाले उत्पाद में भी सामान्य से ज़्यादा कम हो सकता है। बेहतर है की आप ऐसे उत्पाद चुनें जिनमें 140 मिलीग्राम प्रति कप सोडियम से ज़्यादा न हो।

मेड विथ एक्स्ट्रा फाइबर 

फाइबर पाने के लिए आहार पर एक्सीलेंट सोर्स ऑफ़ फाइबर का लेबल ढूंढें। इसके लिए आपके आहार में कम से कम पांच ग्राम फाइबर प्रति कप होना ज़रूरी है। अगर आहार में विभिन्न तरह के फाइबर हों तथा पूरी तरह प्राकृतिक हो तो आपको और भी लाभ मिलेगा।