पेट खराब हो तो खाएं यह सादा भोजन

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किसी भी दोष का प्रकोप होने पर पेट खराब हो जाता है, पाचन क्रिया बिगड़ जाती है और या तो कब्ज़ हो जाता है या पतले दस्त लगने लगते हैं। किसी भी दोष के कुपित होने पर पथ्य आहार लेना और अपथ्य आहार न लेना सबसे पहले क़दम होता है। Keywords: stomach pain in hindi, pet ki bimari, pet me dard, pet ke dard ki dawa, pet ke rog, pet me kide, pet ke kide ki dawa

 

पाचन क्रिया बिगड़ जाए और पेट खराब हो जाए तो इस स्थिति को सुधारने के लिए निम्नलिखित आहार लेना लाभकारी होता है-

 

खिचड़ी (khichdi)–

चावल और छिलका युक्त मूंग की दाल को मिलाना खिचड़ी कहलाता है।

(1) यदि वात प्रकोप यानि वायु/गैस प्रकोप हो तो चावल और मूंग की दाल समान मात्रा में मिलाएं।

(2) पित्त प्रकोप (Gall bladder related problems) हो तो चावल ज्यादा और मूंग की दाल कम मात्रा में मिलाएं।

(3) कफ प्रकोप हो तो मूंग की दाल ज्यादा और चावल कम मात्रा में मिला कर खिचड़ी मिलाएं।

 

इस प्रकार वात, पित्त और कफ की स्थिति के अनुसार खिचड़ी बना कर खाना पथ्य आहार है।

 

नोटः अगर वात या पित्त कुपित हो तो खिचड़ी में शुद्ध घी डाल कर खाना चाहिए। यदि कफ कुपित हो तो अदरक की एक गांठ के बारीक टुकड़े कर उस पर सेन्धा नमक छिड़क कर, एक-एक टुकड़ा खाते हुए खिचड़ी खाना चाहिए। कफ या पित्त कुपित हो तो खिचड़ी के साथ खटाई या अचार नहीं खाना चाहिए। स्वाद के लिए हरा धनिया और हरी मिर्च काट कर डाल सकते हैं। शाम को भोजन में 7-8 दिन सिर्फ खिचड़ी खाई जाए तो पाचन क्रिया सुधर जाती है और पेट ठीक हो जाता है।

 

 

दलिया मूंग–

दलिया और मूंग की दाल भी सुपाच्य, हल्का और उदर रोगी के लिए पथ्य आहार है। अपच, अजीर्ण और क़ब्ज से ग्रस्त रोगी को शाम के भोजन में खिचड़ी या दलिया व मूंग की छिलके वाली दाल खाना चाहिए।

 

(1) यदि वात कुपित हो तो दाल को हींग लहसुन से छौंक लगाकर खाना चाहिए।

(2) यदि पित्त कुपित हो तो घी और ज़ीरे का छौंक लगाना चाहिए।

(3) कफ कुपित हो तो दलिया के साथ, छौंक लगाए बिना, दाल बनाते समय गरम मसाला और अदरक की एक गांठ बारीक काट कर डाल देना चाहिए।

 

 

शाम के भोजन में, स्वाद बदलने के लिए, कभी खिचड़ी और कभी दलिया व मूंग की दाल खाना चाहिए। 4-5 दिन खाने से ही पेट की स्थिति सुधरने लगती है। दलिया और मूंग की दाल अपच के रोगी, किसी रोग के कारण कमजोर हुई पाचन शक्ति के रोगी, वृद्ध आयु वाले और क़ब्ज से पीड़ित गर्भवती स्त्रियां – इन सबके लिए पथ्य आहार है।

 

 

जिनकों जब-तब पेट की शिकायत हो जाया करती हो यानी पाचन ठीक न होता हो और क़ब्ज़ हो जाती हो उन्हें शाम का खाना जल्दी और हल्का यानी खिचड़ी या दलिया व मूंग की दाल ही खाना चाहिए। देर रात में भोजन करना और शाम के भोजन में भारी पदार्थों का सेवन करना उदर रोगों को जन्म देता है जिनमें क़ब्ज़, अजीर्ण, गैस, ट्रबल, हायपर एसिडिटी और आज की प्रमुख यौन-व्याधि शीघ्रपतन के नाम उल्लेखनीय हैं।