भुजाओं तथा कलाइयों को मजबूती प्रदान करता है – चतुरांग दण्डासन योग

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संस्कृत में चतुरांग का मतलब चार अंग, दंड का मतलब कर्म तथा आसन का मतलब मुद्रा से है। चतुरांग दण्डासन का अभ्यास सूर्य नमस्कार के अनुक्रम के रूप में किया जाता है।

चतुरांग दण्डासन करने की विधि-
1- सबसे पहले अधो मुख स्वासन और उसके बाद प्लैंक पोज की मुद्रा में जाएँ।
2- अब अपनी स्कंधास्थी को अपनी पसलियों के विरोध में दृढ करें। अब अपनी टेलबोन को प्यूबिस की तरफ दबाएँ।
3- अब सांस छोड़ने के साथ साथ अपने धड तथा पैरो को नीचे की तरफ जमीन से कुछ इंच ऊपर समानांतर अवस्था में ले जाएँ।
4- इस अवस्था में रहते हुए टेलबोन को स्थिर रखें, इस स्थिति में पैर बहुत सक्रिय होते हैं अन्दर की तरफ थोडा मुड़ जाते हैं।
5- प्यूबिस को नाभि की तरफ खींचे। अपनी स्कंधास्थी के बीच की जगह को व्यापक रखें। कोहनियों को बाहर की तरफ न जाने दें। उन्हें धड के किनारे पर पकड़ कर रखें और एडियों की तरफ दबाव बनाएं।
6- पैरों की उँगलियों को फर्श पर दबाएँ। उरोस्थि के शीर्ष तथा अपने सिर को उठायें और सामने की तरफ देखें।
7- 10 से 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें, अब सांस को छोड़ने के साथ साथ आराम की अवस्था में आयें। अब या तो फर्श पर आराम से लेट जाएँ या अधो मुख स्वासन की अवस्था में आ जाएँ। चतुरांग दण्डासन सूर्य नमस्कार के अनुक्रम में किया जाता है।

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चतुरांग दण्डासन को करने के लाभ-
1- भुजाओं तथा कलाइयों को मजबूती प्रदान करता है।
2- पेट के आस पास के हिस्से को टोन करता है।
3- मन को शांत करता है तथा पूरे शरीर की मुद्रा को ठीक करता है।
4- संतुलन को सुधारता है।