5 तरीके जिनसे जलवायु परिवर्तन आप पर असर डाल सकता है 

    103
    Image Credits: Global cimate forum

    जीवन अनमोल है; हर व्यक्ति के लिए उसके जीवन से बढ़कर कुछ नहीं होता। पर इस जीवन को बनाए रखने के लिए ज़रूरी वातावरण इस पुरे ब्रह्मांड में सिर्फ एक जगह ही है- पृथ्वी। सदियों के शोध और अविष्कारों के बावजूद हम भले ही कोई और रहने योग्य गृह न ढूंढ पाए हों लेकिन इस इकलौते रहने योग्य गृह पर हो रहे कई बदलावों के कारण हम ज़रूर बन चुके हैं।

    ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज, जिसे हम जलवायु परिवर्तन भी कहते हैं, हर दुसरे दिन सुर्ख़ियों में रहते है। यह वाजिब भी है, हमारे आस-पास हो रहे कई बड़े बदलाव इसी के कारण हैं। तो आइये, जलवायु परिवर्तन को थोडा और करीब से जानें-

    जलवायु परिवर्तन क्या है?

    हमारे आस-पास हो रही विभिन्न क्रियाओं की वजह से वायुमंडल में ऐसे कार्बन से बने यौगिक पहुँच रहे हैं जो पृथ्वी को कम्बल की तरह ढांक रहे हैं। इस कम्बल की वजह से पहले गर्मी और अन्य रूपों में पृथ्वी से अन्तरिक्ष में चले जाने वाली उर्जा अब बाहर नही निकल पा रही जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। इसे ही ग्लोबल वार्मिंग कहा जा रहा है।

    हमारी जलवायु पांच चीज़ों से बना है- हवा, पानी, बर्फ, जीवित प्राणी और पृथ्वी की उपरी परत। जब पृथ्वी का तापमान सामान्य माप से ज्यादा रहेगा तो इन सभी कारकों पर असर होगा। ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघलने लगेगी जिससे समुद्र के स्तर बढ़ेंगे और ज़मीन के कई हिस्से पानी में डूब जाएंगे। बढ़े तापमान से हमारे जीवन के हर हिस्से पर असर होगा। यही हमारे आस-पास हो रहा है जिसे हम जलवायु परिवर्तन कह रहे हैं।

    यह क्यों हो रहा है?

    ग्लोबल वार्मिंग और अंततः क्लाइमेट चेंज की तीन मुख्य वजह हैं-

    ग्रीनहाउस गैस- विभिन्न तरह के इंधन की खपत से निकलने वाली carbondioxide और अन्य गैस धरती को गर्म कर रही हैं।

    मीथेन -कचरे और घास चरने वाले पशु मीथेन का बड़ा स्रोत हैं। यह इतने बड़े कारण नहीं लगते हैं लेकिन बढती जनसँख्या के साथ कचरे और पशुओं की जनसँख्या भी बढती है जिससे मीथेन के स्तर खतरनाक रूप ले लेते हैं।

    एयरोसोल-हवा में उड़ने वाले छोटे कण भी बढ़ी समस्या बन सकते हैं। पेंट, स्प्रे व् अन्य केमिकल से निकलने वाले एयरोसोल के कण भी पर्यावरण पर गहरा असर डालते हैं।

    जलवायु परिवर्तन का हम पर क्या असर होगा?

    पानी में बदलाव-

    ध्रुवों की बर्फ पिघलने से समुद्र और नदियों के स्तर बढ़ रहे हैं। साथ ही अब हमारे समुद्र पहले से ज्यादा गर्म और कार्बन डाइऑक्साइड से भरे हैं। मतलब है की समुद्र के अंदर रहने वाले जीवों का जीवन बड़े रूप में बदलेगा। इससे समुद्र से पैदा होने वाले आहार और दवाओं पर असर होगा।

    2050 तक दुनियाभर के द्वीप पानी के नीचे होंगे तथा कई बड़े देशों के तट पीछे हट जाएंगे। इससे इंसानों के रहने तथा खेती करने योग्य ज़मीन में कमी आएगी। हिमालय की बर्फ भी पिघलेगी जिससे यहाँ की जलवायु प्रभावित होगी और हमें कई जड़ी-बूटी नहीं मिल पाएगी।

    बर्फ का पिघलना मौसम में बड़े बदलावों की वजह भी बनेगा। इससे पीने योग्य पानी की कमी होगी और हमें पानी की बचत की ओर ध्यान देना होगा।

    आहार-

    बदलते वातावरण में हमारे खाने के चार मुख्य अनाज- मक्का, गेंहू, चावल और आलू, की पैदावार कम हो जाएगी। इस बदलाव की मार सबसे ज्यादा भारत और चाइना पर पड़ेगी जहाँ बड़ी आबादी में लोग रह रहे हैं लेकिन खेती के लिए पर्याप्त ज़मीन उपलब्ध नहीं है।

    तेज़ गर्मी-

    आने वाले समय में आप मौसम में गर्माहट महसूस करेंगे। माना जा रहा है 2100 में मौसम आज से चार से ग्यारह डिग्री बढ़ा हुआ होगा। ऐसे में कई लोग एयर कंडीशनिंग का सहारा लेंगे जो समस्या को और बढ़ा सकता है।

    मौसम की बदमिजाजी-

    जलवायु परिवर्तन से मौसम में तेज़ी से बदलाव आएँगे- तूफ़ान, सूखा और बाढ़ तीनों की समस्या बनेंगे। शोधकर्ताओं ने पाया है की 1980 के बाद से ऐसी आपदाएं बढ़ी है और इसका कारण जलवायु परिवर्तन ही है। हाल में आया फनी तूफ़ान की इसी की वजह से बताया जा रहा है।

    स्वास्थ्य-

    तेज़ी से बदलते वातावरण से हम कई तरह की बिमारियों की चपेट में आ सकते हैं। माना जा रहा है की जलवायु परिवर्तन से इंसानों पर इतना असर हो सकता है की स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले पचास साल के सभी विकास नील हो जाएंगे।