जानिए गर्मियों में शरीर में पानी की कमी की वजह से होने वाली समस्याएं

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image credits: womansneed.com

निर्जलीकरण(डिहाइड्रेशन), या शरीर में पानी की कमी, तब होती है जब हमारे शरीर में पानी की मात्रा घट जाती है जिससे शरीर के तंत्र सही से काम नहीं कर पाते। हम में से ज़्यादातर लोग यही मानते हैं की यह बीमारी सिर्फ सूखाग्रस्त इलाकों का सच है, हमारे संपन्न इलाकों का नहीं। पर सच्चाई इससे बहुत अलग है।

Dehydration Symptoms

निर्जलीकरण होने की वजह

इंसानी शरीर का दो तिहाई हिस्सा पानी से बना है। यह स्तर कई वजहों से गिर सकता है जिनमे प्रमुख हैं-दस्त, उल्टियां, पसीना, मधुमेह तथा बार-बार पेशाब आना। पानी की थोड़ी कमी को आसानी से ठीक किया जा सकता है पर निर्जलीकरण जब गंभीर रूप ले ले तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

 

निर्जलीकरण के लक्षण

निर्जलीकरण की गंभीरता के आधार पर इसे दो भागों में बांटा जा सकता है, जिनके लक्षण अलग-अलग है:

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मंद निर्जलीकरण के लक्षण : मुँह सुखना, थकान तथा नींद आना, त्वचा शुष्क होना, सिरदर्द, कब्ज़, चक्कर आना, रोने पर कम आँसू या आँसू न आना, पेशाब कम आना, ठंडी त्वचा, मांसपेशियों में जकड़न।

 

तीव्र निर्जलीकरण के लक्षण : तेज़ प्यास लगना, चिड़चिड़ाहट, धंसी आँखें, शुष्क त्वचा, निम्न रक्तचाप,तेज़ धड़कनें, तेज़ साँसें, आँसू न आना, तीव्र ज्वर, पेशाब न आना, बेहोश हो जाना

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नवजात निर्जलीकरण की चपेट में सबसे पहले आते हैं। नवजात में निम्न लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा परामर्श लें-

  • नवजात के सिर का नर्म हिस्सा धसना
  • रोने पर आँसू न आना
  • सूखा मुँह
  • पेशाब कम करना
  • बेहोशी छाना
  • तेज़ साँस लेना

 

निर्जलीकरण से पैदा होने वाली जटिलताएं

निर्जलीकरण से शरीर के सभी तंत्र प्रभावित होते हैं जिससे कई लघु एवं दीर्घकालीन समस्याएं पैदा होती हैं। इनमे प्रमुख है-

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लू लगना: गर्मी में लगातार काम या वर्जिश करते हुए अगर अगर आप अपने शरीर को पर्याप्त पानी नहीं देते तो आपको लू लगने का खतरा है। यह एक गंभीर अवस्था है जो जानलेवा भी साबित हो सकती है।

 

किडनी-संबंधी परेशानियां: लम्बे समय तक निर्जलीकरण की समस्या बने रहने पर मूत्राशय में संक्रमण, पथरी आदि बीमारियां जन्म ले सकती हैं। गंभीर मामलो में किडनी काम करना तक बंद कर सकती है।

 

सीज़र: सीज़र एक मानसिक रोग है जिसका दौरा पड़ने पर इंसान सुध-बुध खो देता है। पोटैसियम, सोडियम आदि घटक जो कोशिकाओं के बीच संकेतों के आदान-प्रदान में मदद करते हैं, अगर असंतुलित हो जाये तो मांसपेशियों में असामान्य हरकतें होती हैं जिससे अक्सर बेहोशी आ जाती है।

 

रक्त का घटा घनत्व: यह निर्जलीकरण की सबसे घातक जटिलता है। इसमें रक्त का घनत्व कम होने से रक्तचाप कम हो जाता है। नतीजतन शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है।

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निर्जलीकरण से कैसे बचें?

  1. निर्जलीकरण घातक सिद्ध हो सकता है इसलिए इससे बचाव करना ही समझदारी है। प्यास लगना एक इशारा है की शरीर में पानी की कमी हो चुकी है। कई बार हम बेध्यानी या पानी उपलब्ध नहीं होने पर इस संकेत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ज़रूरी है की प्यास लगने का इंतज़ार किये बिना ही पानी पीतें रहें।

 

2. बाहर जा रहे हैं या वर्जिश कर रहे हैं तो पानी की एक बोतल अपने पास रखें और हर थोड़ी देर में इससे पानी पियें। बीमार इंसान जिसे दस्त, उलटी या बुखार हो , उसका पूरा ध्यान रखा जाना ज़रूरी है। उन्हें नियमित समय पर भरपूर पानी पिलाएं तथा ज़रूरत लगने पर ORS दें।

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3. माना जाता है की गहरे सोते का पानी शरीर के लिए सबसे लाभकारी होता है। अगर ऐसा पानी आपकी पहुँच में है तो इसे पियें। नहीं, तो नल के पानी को फ़िल्टर करके ही पियें।

पीने के लिए स्वच्छ और पर्याप्त पानी प्रकृति का एक वरदान है। इसके लिए कृतज्ञ रहें, अपने परिवार की सेहत के लिए उपयुक्त पानी का प्रतिबंध करें तथा दुनिया के उन हिस्सों के बारे में सोचें जहाँ पीने योग्य पानी उपलब्ध नहीं। अगर समर्थ हैं तो स्वयंसेवी संस्थाओं, सरकार या अन्य माध्यम से इन ज़रूरतमंदों तक किसी भी रूप में मदद पहुँचायें। 

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