घुटनों की परेशानी से निजात दिलाता है क्रोंच आसन

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क्रोंच आसन (Heron Pose)को बगुले की मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है। इससे पिंडली तथा मंदिर शिरा (घुटने के पीछे की पांच नसों में से एक नस) का अभ्यास होता है। यह आसन कई कठिन योग मुद्राओं में से एक है। इस योग मुद्रा को करने के लिए आपके घुटने तथा मंदिर शिरा दोनों ही लचीले होने चाहिए। यह कोर की मांसपेशियों को मजबूत करता है तथा पैरों के पिछले हिस्से में खिंचाव उत्पन्न करता है। किसी भी चोट से बचने के लिए यह जरुरी है की आप इसे किसी योग गुरु के निरीक्षण में करें।

आइये देखते क्रोंच आसन करने की विधि:

  • एक सपाट सतह पर चटाई बिछा कर पैरों को बाहर की तरफ सीधा फैला कर बैठ जाएँ।
  • अपने दाहिने घुटने को अपने सामने इस तरह मोड़ें की यह जमीन को छुए। आपका दाहिना पैर आपके दाहिने कूल्हे के बगल में आराम की मुद्रा में होने चाहिए।
  • आपके दोनों घुटने साथ में होने चाहिए।
  • आपको बैठने के साथ आपका संतुलन बना कर रखना है ताकि आपके शरीर का भार आपकी बैठने की हड्डियों पर समान रूप से विभाजित रहे अब अपने बाएं पैर के घुटने को इस तरह मोड़ें ताकि वह आपके बाएं कूल्हे के सामने जमीन पर सीधा रहे।
  • अब अपने दोनों हाथों का प्रयोग करते हुए अपने बाएं पैर को एड़ी तक सीधा फैलायें।
  • ध्यान रखें की आपकी पीठ और कंधे इस मुद्रा में सीधे रहें। आपका पैर अब जमीन के एक दम लम्बवत होना चाहिए। जबकि आपकी पीठ सीढ़ी तथा घुटने की दिशा ठोढ़ी की तरफ होनी चाहिए।
  • अपनी सांस को रोकें और 30 सेकंड के लिए इसी मुद्रा में रहें। अब यही प्रक्रिया दुसरे पैर के साथ दोहराएँ।

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आसन के लाभ:

  • जब आप क्रोंच आसन करते हैं तो जांघो, पिंडलियों तथा मंदिर शिरा पर दबाव पड़ता है। इसलिए यह आसन पैरों के जोड़ों तथा मांसपेशियों की मजबूती तथा लचीलेपन को बढ़ता है।
  • इस आसन को करने से आपका छाती तथा पेट अपने सही आकार में आ जाते हैं। यह आसन छाती तथा पेट की मांसपेशियों को खोल देता है तथा उनके कार्य करने की क्षमता को बढ़ा देता है। यदि आप पेट फूलने की बीमारी से परेशान हैं तो यह आसन आपके लिए बहुत मददगार साबित हो सकता है।
  • जिनका पैर चपटा होता है उन लोगों के लिए यह आसन बहुत लाभदायक है। क्यों की इस आसन में आपकी एडियों तथा टखने में खिंचाव उत्पन्न होता है जिससे चाप का निर्माण हो जाता है।