कहीं आप भी तो गलत बॉडी पोस्चर का शिकार नहीं – जानें क्या गलतियां होती है हमसे

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image credits: Passnownow

दिन भर में हमारी बैठने, खड़े होने या काम करने की आदतें, जाने-अनजाने में हमारी शारीरिक मुद्रा जिसे पोस्चर भी कहते हैं, पर बुरा असर पड़ने लगता है। नतीजतन हम कमर दर्द, पीठ दर्द, और धीरे-धीरे सारे शरीर में दर्द रहने लगता है। यह हमारे व्यक्तित्व को बिगाड़ने के साथ ही कार्य की क्षमता पर भी असर डालने लगता है। ज़्यादातर ऐसे मामलों में समस्या की जड़ पता नहीं चल पाती और हम सिर्फ दर्द निवारक औषधियों पर आश्रित हो जाते हैं।

 

आइये जाने कौन-कौन सी आदतें हमारी मुद्रा को बिगाड़ती है तथा इनका निवारण क्या है-

 

  • चेयर पर रीढ़ को झुककर बैठना-
    चेयर पर आलस में बैठना वक्त के साथ हमारी पीठ की संवेदनशील मांसपेशियों और कोशिकाओं पर तनाव बढ़ाता है जिससे दर्द भी हो सकता है।

    चेयर पर सीधे बैठने की आदत डालें। शुरुआत में यह मुश्किल होगा क्यूंकि पीठ की मासपेशियां पोस्चर बनाए रखने में सक्षम होने में समय लेगी। पेट, कूल्हे और कमर की कसरतें इस दिशा में आपकी मदद करेंगी। ऐसी ही कुछ कसरतें हैं प्लान्क, ब्रिज तथा कमर की स्ट्रेचिंग।

यह गलतियाँ न करें, जानें क्या है सही पोस्चर खड़े रहने और बैठने के दौरान

  • कूल्हों का सामान्य से ज़्यादा बाहर निकलना-
    अगर आपकी कमर में सामान्य से ज़्यादा घुमाव है जिससे आपके कूल्हे बाहर निकले दीखते हैं तो आपको हाइपर लोरडोसिस हो सकता है। इसे प्रसिद्ध कार्टून “डोनाल्ड डक” के पोस्चर से भी जाना जाता है।

    हील्स पहनना, मोटापा होना, गर्भवती होना आदि इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। इसके निवारण के लिए पेट, कूल्हे के मांसपेशियों में ताकत बढ़ाने वाली कसरतें, हिप फ्लेक्सोर तथा जांघों की स्ट्रेचिंग, और सही मुद्रा में खड़े रहने का अभ्यास करें। इनमे प्रमुख कसरतें हैं- प्लान्क, करवट में लेटकर पैर उठाना, कूल्हे की स्ट्रेचिंग, जांघ की स्ट्रेचिंग आदि।

    खड़े रहने की मुद्रा को सही करने के लिए इन बातों पर दें-
    कन्धों तथा कमर को ढीला रखें। पैरों में थोड़ी दुरी बनाएं रखें। दोनों पैरों पर समान वजन डालें। घुटनों को ढीला रख पैरों को सीधा रखने का प्रयास करें।

 

  • एक पैर पर खड़े रहना-
    एक पैर पर ज़्यादा वज़न डालकर खड़े रहना अक्सर आरामदायक लगता है, खासकर जब हम लम्बे समय से खड़े हों। पर ऐसा करना आपके कमर तथा कूल्हे के एक ही हिस्से पर ज़्यादा दबाव बनाता है जिससे मांसपेशियों में तनाव बढ़ने लगता है। समय के साथ पेल्विक क्षेत्र में असमानताएँ आ जाती हैं, एक ही कंधे में भारीपन रहने लगता है तथा शरीर के भाग सुन्न पड़ने लगते हैं।

    इसके निवारण के लिए दोनों पैरों पर सामान वज़न डालकर खड़े रहने की आदत डालें। साथ ही प्लान्क तथा पैरों की कसरतों पर ध्यान दें।

 

  • कुबड़ी पीठ तथा झुकी गर्दन-
    कम्प्यूटर या फ़ोन में टाइप करते समय पीठ झुकना इस ओर इशारा है की आपकी छाती की मासपेशियां तनी हैं वहीं ऊपरी पीठ कमज़ोर है। लम्बे समय तक यह अवस्था रहने से पीठ झुक जाती है जिससे कंधों तथा पीठ में अकड़न रहने लगती है।

    इससे निपटने के लिए ऊपरी पीठ, गर्दन और कंधों को मज़बूत करने वाली कसरत, छाती की स्ट्रेचिंग आदि करने की सलाह दी जाती है।

 

  • झुके कंधे-
    आईने के आगे खड़े हो जाएं। अपनी बाज़ुओं को ढीला छोड़ लटकने दें। अगर आपकी उँगलियों के जोड़ आईने की तरफ हैं तो यह इशारा है की आपकी छाती अकड़ी हुई तथा पीठ कमज़ोर है जिससे कंधे गोल और झुके हुए दीखते हैं। यह अवस्था ख़राब मुद्रा या कुछ कसरतों को गलत करने से हो सकती हैं।

    आपके पेट, ऊपरी पीठ तथा छाती की मांसपेशियों को मज़बूत करने वाली कसरतें जैसे प्लान्क, ब्रिज, पुल-अप, छाती की स्ट्रेचिंग आदि इस समस्या का निवारण कर सकती हैं।

 

  • फ़ोन पर बात करने के लिए गर्दन झुकना-
    अक्सर हम काम करते हुए फोन पर बात करने के लिए, फोन को गर्दन और कंधे के बीच फसा लेते हैं। यह मुद्रा हमारी गर्दन, पीठ और कंधों में तनाव बढ़ाती है।

    हमारे कंधे व गर्दन इस अवस्था के लिए नहीं बने है इसलिए फोन को हाथों से पकड़कर या लाउडस्पीकर पर रखकर उपयोग करें। छाती की स्ट्रेचिंग, गर्दन को घुमाना तथा स्ट्रेच करना आदि इसका निवारण कर सकता है।