गर्भावस्था में कितने अल्ट्रासाउंड करवाने हैं?

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अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था का एक नियमित हिस्सा है जिससे होने वाली माँ को पूरी सुरक्षा मिल पाती है तथा माता-पिता को शिशु की पहली झलक मिलती है। कई लोग इन फोटोग्राफ को सहेजना पसंद करते हैं लेकिन ज़्यादातर महिलाओं को ऐसे स्कैन की ज़रूरत कम ही होती है। नियम भी यह स्पष्ट करते हैं की अतिरिक्त स्कैन सिर्फ ज़रूरत करने पर ही करवाने चाहिए। तो आपको कितने स्कैन लेने चाहिए? आइये जानें-

कितने और कब?

ज़्यादातर महिलाओं को गर्भावस्था में दो स्कैन करवाने होते हैं।

पहला अल्ट्रासाउंड पहले तिमाही में होता है जब आपको प्रसव की तारीख भी दी जाती है। दूसरा स्कैन 18 से 22 हफ्ते के बीच होता है जिसमें शिशु के शारीरिक विकास की दर और संभावित समस्या को देखा जाता है। अगर ये दोनों ही अल्ट्रासाउंड के नतीजे सामान्य पाए जाते हैं तथा माँ के पेट के नाप माह के अनुसार सही है तो इतने ही स्कैन की ज़रूरत होती है।

अगर शुरआती अल्ट्रासाउंड में कोई समस्या दिखती है या शिशु के आकार में कोई अनियमितता दिख रही है तो दोबारा अल्ट्रासाउंड करवाया जा सकता है।

अगर माँ डायबिटीज या हाइपरटेंशन से ग्रसित है तो उन्हें भी अतिरिक्त स्कैन की ज़रूरत होगी।

क्या अल्ट्रासाउंड के कोई दुष्प्रभाव हैं?

अब तक अल्ट्रासाउंड के कोई भी दुष्प्रभाव माँ या शिशु पर नहीं देखे गए हैं। पर फिर भी इस स्कैन का उपयोग चिकित्सीय कारणों के बिना करने से रोका जाता है क्यूंकि किसी न किसी दुष्प्रभाव के भविष्य में होने की संभावना ज़रूर है।

2D अल्ट्रासाउंड सबसे सुरक्षित माना जाता है पर इसके उपयोग की अति करने से भी रोका जाता है।