क्या आप गलत तरह से माफ़ी मांग रहे हैं?

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Image Credits: Medium

दिल से मांगी हुई माफ़ी कई दशकों पुराने जख्म भी भर देती है। पर माफ़ी मांगने का सीधा सा काम भी अक्सर हम गलत तरह से करते हैं जिससे हमारी दिल की भावना सामने खड़े व्यक्ति तक नहीं पहुँच पाती और हमारी कई कोशिशों के बाद भी रिश्ते सुधरने की जगह बिगड़ते जाते हैं।

आइये ऐसे ही कुछ उदहारण देखें-

“सॉरी, तुम्हें मेरी बातों गलत तरह से समझ आई” 

दुसरे व्यक्ति की प्रतिक्रिया देखकर माफ़ी मांगने से आप यह जताते हैं की आप अपनी बात के लिए नहीं, बल्कि उसकी प्रतिक्रिया के लिए क्षमाशील हैं।

“सॉरी, मुझे याद है जब तुमने मेरे साथ ऐसा किया था तो मुझे भी अच्छा नहीं लगा था” 

हो सकता है आपकी माफ़ी का यह तरीका सहानुभूति दिखाने की कोशिश हो, लेकिन सामने वाले की गलती याद दिलाना आपको शायद माफ़ी न दिला पाए।

“सॉरी, मुझे ज्यादा लोगों के बीच रहना पसंद नहीं” 

अपने व्यवहार की सफाई देते हुए माफ़ी मांगना सिर्फ यही प्रभाव देता है की आप दोबारा भी यही गलती करेंगे।

“सॉरी, मुझे नियंत्रित करने वाले लोगों के बीच रहना पसंद नहीं” 

दुसरे व्यक्ति पर अपने व्यवहार की ज़िम्मेदारी डाल देना सही नहीं। इसे माफ़ी की जगह आरोप की तरह देखा जा सकता है।

“मेरे व्यवहार के लिए माफ़ कर दीजिये लेकिन आपको अपनी बात रखने का तरीका सुधारना चाहिए” 

माफ़ी के बीच ‘लेकिन’ आना आपकी बात का मतलब खत्म कर देता है। पहले माफ़ी मांगें फिर कुछ समय बाद शान्ति से सामने वाले को अपनी समस्या बताएं।

कुछ न कहना 

अक्सर गहरे रिश्तों में हम सामने वाले को पहले माफ़ी मांगते देखना चाहते हैं। ऐसी जिद में रिश्तों की चमक फीकी पडती जाती है।

“अगर मेरी बात आपको बुरी लगी हो तो माफ़ कर दीजिये” 

माफ़ी के बीच सवाल पूछना सामने वाले पर अपनी गलती की ज़िम्मेदारी डालना जैसा ही है।

“मुझे कल की बात बुरी लगी। घर जाते हुए मैं बस यही सोचता रहा की कहीं आपको बुरा तो नहीं लगा। रात में मैं अच्छे से सो भी नहीं पाया। कभी कभी लगता है यह मेरी परवरिश की वजह से है। …..”

जब आपकी माफ़ी में सामने वाले व्यक्ति की जगह अपनी ही बातें होने लगे तो आपको रुक जाना चाहिए। माफ़ी कैसे मांगनी है इस बारे में गहराई से सोचें; सामने वाले को उसके महत्व का एहसास दिलाएं।

“मैं जानता हूँ मैंने बहुत बड़ी गलती है। शायद तुम्हारा विश्वास अब मैं कभी न पा सकूं।” 

इस तरह बातों को बड़ी बनाकर माफ़ी मांगना अक्सर इस बात की कोशिश होती है की सामने वाला आपको बताए की आपकी गलती इतनी भी बड़ी नहीं है। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो जल्द ही आपके दोस्त इस आदत को पहचान कर नाराज़ हो सकते हैं।

तो आखिर सेहतमंद रिश्तों को गहरा करने वाली अचूक माफ़ी को कैसे कहा जाए? इन निर्देशों का पालन करें-

सटीक रहें-

आप किस बात की माफ़ी मांग रहे हैं यह साफ़ करें। “आज जो हुआ उसके लिए सॉरी” या “सबकुछ गलत था; आई ऍम सॉरी” आदि कहने की जगह “तुमसे रूखे ढंग से बात करने के लिए सॉरी” या “ऑफिस की नाराज़गी तुमपर निकलने के लिए सॉरी” जैसे वाक्य ज्यादा असरदार होंगे।

ईमानदार रहें 

अगर आप माफ़ी नहीं मांगना चाहते तो मत मांगिये। बचपन में अक्सर हमें हर छोटी बात पर माफ़ी मांगना सिखाया जाता है लेकिन यह सही नहीं है। अगर आपकी बात ईमानदार नहीं है तो यह सकरात्मक असर नहीं करेगी।

अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी लें 

माफ़ी मांगने का कोई एक सही तरीका नहीं। लेकिन अगर आप “सॉरी मैंने……” की जगह “सॉरी तुम्हें बुरा लगा” जैसा वाक्य कह रहे हैं तो अभी रुक जाएं।  आपके रिश्तों में सुधार तब ही आ सकेगा जब आप अपने किये की स्पष्ट ज़िम्मेदारी लें तथा आगे बढकर बदलाव करें।

स्पष्टीकरण दें, बहाना नहीं 

आप चाहें तो सामने वाले को बताएं की आपके व्यवहार की मूल वजह क्या थी। आपका तनाव, बीमारी या उस व्यक्ति के लिए आपकी भावनाएं अगर आपके व्यवहार की वजह बनी, तो उन्हें यह बताएं। ध्यान रखें, इन बातों को बहाना न बनने दें।

सही करने की कोशिश करें 

क्षतिपूर्ति की ज़रूरत लगने पर कुछ नई योजनाएं बनाएं। अगर नाराज़गी पर्याप्त समय न दे पाने की वजह से है तो दिन में थोडा समय निकालकर नाराज़ व्यक्ति को दें। ध्यान रखें, इस दौरान पुरे धैर्य से अपना ध्यान उस व्यक्ति को दें।

सामने वाले की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने की कोशिश न करें 

तुरंत माफ़ी मिल जाने की उम्मीद न रखें; न ही माफ़ी के बदले माफ़ी सुनने की आशा से नाराज़ व्यक्ति के पास जाएं। हो सकता है आपको माफ़ी मिलने में थोडा समय लगे या कुछ दिनों बाद आपमें आए बदलाव व् आपके द्वारा की गयी क्षतिपूर्ति आपको विश्वास दोबारा जीतने में मदद करे।