बच्चों में हाई कोलेस्ट्रोल का रोग पहचानें और जल्द करें उपचार

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image credits: larepublica.pe

हाई कोलेस्ट्रोल, शुगर, अस्थमा जैसी बीमारियाँ हम कुछ समय पहले तक वयस्कों में ही देखते थे। पर अब बच्चों में भी ये रोग तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढती है, ये रोग अपनी जड़ें और गहरी कर लेते हैं। हाई कोलेस्ट्रोल के मामलों में ही बच्चा कुछ सालों में ह्रदय रोग से जूझ सकता है तथा उसके अंगों को बाधित रक्त प्रवाह से होने वाली क्षति को झेलना पड़ता है। बच्चों में हाई कोलेस्ट्रोल के बढ़ते मामले और इसके खतरनाक असर के बारे में हम सभी को जानना ज़रूरी है।

 

बच्चों में हाई कोलेस्ट्रोल की समस्या क्यों होती है?

कोलेस्ट्रोल के स्तरों का असंतुलित होना बच्चों में इन कारणों की वजह से हो सकता है-

  • अनुवांशिक रूप से परिवार में यह रोग रहना
  • आहार शैली का अव्यवस्थित होना
  • मोटापे की समस्या होना

ज्यादातर मामलों में बच्चों को अनुवांशिक कारणों से ही यह रोग होता है।

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बच्चों में हाई कोलेस्ट्रोल की जांच कैसे होती है?

एक आसान से ब्लड टेस्ट के द्वारा कोलेस्ट्रोल की जांच हो सकती है। इसे स्कूल में सभी बच्चों के लिए करवाया जा सकता है या फिर आप खुद इसे अपने बच्चे के लिए करवा सकते हैं। ऐसी जांचें तबी और भी ज़रूरी हो जाती हैं जब परिवार में किसी को ह्रदय रोग या हाई कोलेस्ट्रोल की समस्या रही हो। कई चिकित्सा संस्थान सुझाते हैं की बच्चों में कोलेस्ट्रोल के स्तर की जांच एक बार 9-11 की उम्र के बीच तथा फिर दोबारा 17-21 की उम्र के बीच करवानी चाहिए। ऐसा करने से आप किसी भी आकस्मिक परेशानी से बच पाएंगे।

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बच्चों में हाई कोलेस्ट्रोल का उपचार कैसे होता है?

बच्चों में कोलेस्ट्रोल के स्तरों को सामान्य करने का सबसे श्रेष्ठ उपाय जीवनशैली में बदलाव है-

  • ऐसे आहार खाएं जो सैचुरेटेड वसा, ट्रांस फैट और कोलेस्ट्रोल से मुक्त हों या इनके स्तर कम हों। दिनभर में बच्चों द्वारा ली जा रही कैलोरीज का सिर्फ 30 प्रतिशत हिस्सा ही वसा का होना चाहिए जिसमें सैचुरेटेड वसा 10 प्रतिशत हो सकती है लेकिन ट्रांस फैट बिल्कुल न हो तो ही अच्छा है।
  • बच्चे के आहार में विभिन्न तरह के आहार शामिल करें हिस्से उसके पोषण की सभी ज़रूरतें पूरी हो सके।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।एरोबिक्स, दौड़, साइकिलिंग, रस्सी कूदना, तैराकी आदि व्यायाम रक्त में कोलेस्ट्रोल के स्तर कम करते हैं, बच्चे को ह्रदय रोग से बचाते हैं तथा उसकी रूचि भी बनाए रखते हैं।

अगर जीवनशैली और आहार में बदलाव से भी आपके बच्चे के कोलेस्ट्रोल स्तर कम नहीं हो रहे हैं तो उसे कुछ दवाओं की मदद की ज़रूरत होगी।बच्चे के चिकित्सक से लगातार सम्पर्क में रहें तथा मन में उठने वाले संदेहों पर उनसे चर्चा करें। किसी भी कोशिश में बच्चे को शामिल करें तथा उपचार के दौरान उसका मनोबल बनाए रखने के प्रयास करें।

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