आयुर्वेदिक खाना पकाने के लिए अपनाएं यह टिप्स

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image credits: The Chalkboard Mag

आपका शरीर आपके द्वारा ग्रहण किए जा रहे भोजन से ही बना है। यह भोजन कैसा है तथा इसे कैसे पकाया गया है, यह आपकी ज़िन्दगी के बड़े हिस्से का नियंता बन सकता है इसलिए इन दोनों ही बिन्दुओं पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। हमारा शरीर को पूरा पोषण देने के लिए जिस तरह आयुर्वेद हमें कई मूलमंत्र देता है उसी तरह खाना पकाने की समग्र विधि के बारे में भी कई सुझाव देता है। (how to cook food according to ayurveda in hindi, ayurvedic cooking tips for healthy living)

 

आधुनिक जीवन में आयुर्वेदिक पाकशाला के कौनसे खास सुझाव हैं, आइये जानते हैं-

 

बर्तनों पर ध्यान दें 

खाना पकाते हुए बर्तन से भी कुछ तत्व भोजन का हिस्सा बन जाते हैं। ज़रूरी है की हमारे बर्तन पूरी तरह साफ़ रहें, साबुन के एक कण से भी रहित रहें तथा सही तत्व से बने हों। आज खाना पकाने में आसानी और खूबसूरती के लिए कई तरह के विकल्प आ गये हैं जो हमारे लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। टेफ़लोन, नॉन-स्टिक या ऐसी ही किसी कोटिंग वाले बर्तनों का साथ छोड़ें तथा लोहे, स्टील आदि को रसोई में जगह दें।

 

माइक्रोवेव की जगह ओवन को दें 

माइक्रोवेव बेचने वाली कंपनीयां आपसे भले ही कम रेडिएशन और पूरा पोषण के कितने ही वादे करें, सच यही है की यह मशीन आपके खाने को रेडिएशन के ज़रिये अंदर से बाहर की ओर पकाती है। इस दौरान खाने का पोषण कम होता है, प्रोटीन का रूप बदलता है तथा प्लास्टिक में पकाए गये भोजन में विषेले तत्वों की संख्या बहुत बढ़ जाती है।

 

खाने को बहुत तेज़ आंच पर न पकाएं 

कम आंच पर खाना पकने में समय लेता है, लेकिन धीरे-धीरे पका यही आहार ही सबसे अच्छी तरह अपना पोषण बचा पाता है। इतना ही नहीं, आपका खाना स्वादिष्ट भी होता है। कोशिश करें की खाने को लम्बे समय तक धीमी आंच पर पकाया जाए लेकिन ज़रूरत से ज्यादा नहीं।

 

रोज़ आहार में कुछ कच्चा शामिल करें 

रोज़ अपने आहार में कच्ची सब्जियां और फल शामिल करें। इन्हें आप सलाद, मेवे या दुग्ध पदार्थ के रूप में ले सकते हैं। कोशिश करें की केल, पत्तागोभी, पालक, गोभी आदि को कच्चा न खाया जाए; यह आपके थाइरोइड को नुकसान पहुंचा सकता है।

 

मेवों और अनाज को पचाने के लिए भिगोएँ 

मेवों और अनाजों को पचाना आसान नहीं होता जिसका मतलब है की आपका शरीर इनसे पूरा पोषण ही नहीं ले पाता। शरीर की थोड़ी मदद करें और मेवों तथा अनाजों को खाने के पहले एक रात के लिए पानी में भिगो के रखें। इन्हें अगली सुबह धोएं और पानी फेक दें।

 

अपनी चटनी खुद बनाएं 

हम सभी बाज़ार से ख़रीदे गये सॉस, चटनी, डिप्स के इतने आदि हो चुके हैं की इनके बिना हमारी कई पाकविधियाँ अधूरी ही रह जाएंगी। पर याद रखें, यह सामग्रियां महीनों पहले किसी फैक्ट्री में बनाई गयी थी और तबसे सिर्फ किसी शेल्फ पर रखी हुई हैं। आयुर्वेद के अनुसार चटनी खाने को पचाने में बड़ी मदद करती है पर इन्हें बनाने के डेढ़ घंटे(आप चाहें तो यह अवधि छह घंटे तक बढ़ा सकते हैं लेकिन इससे ज्यादा नहीं!) के अंदर ही खत्म करना चाहिए। इशारा साफ़ है, आपको इन्हें घर पर ही बनाना चाहिए।

 

खाना पकाते हुए मूड अच्छा रखें 

आयुर्वेद खाना पकाने वाले को साफ़ और आनन्दपूर्ण रहने का सुझाव देता है। यही वजह है की एक समय वेदों के अनुसार समाज के कुछ प्रशिक्षित लोगों को ही रसोई की ज़िम्मेदारी सौपी जाती थी। इसी तरह योग की ही एक शाखा भक्तियोग में खाने को ईश्वर को अर्पित करने के बाद प्रसाद स्वरुप ही ग्रहण किया जाता है। हाल में किए गये शोध पानी पर व्यक्ति की मनोदशा के प्रभाव को प्रमाणित करते हैं लेकिन आयुर्वेद इससे एक कदम आगे जाकर पुरे भोजन को ही मनोदशा से प्रभावित होता बताता है। इसलिए खाना पकाने से पहले मन शांत करें और हल्के संगीत के साथ आनंदित होते हुए अपना भोजन पकाएं; यह सरल उपाय आपको बड़े फ़ायदे देगा।