जानिए स्व-सम्मोहन (Self praise) क्रिया, जगाएं आत्मविश्वास

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image credits: www.cmu.edu

“मैं खुबसुरत नहीं दिखती”, “मैं कभी सफल नहीं हो सकता”, “मैं आलसी हूँ” ये बातें अक्सर हम मन ही मन दोहराते रहते हैं। ऐसा करने पर अगर ये बातें सच न भी हों, तो भी हम इन्हें मान बैठते हैं तथा बिना जाने इन्हीं के अनुसार जीवन के फैसले लेने लगते हैं। धीरे-धीरे हमारी यही बातें हमारे अंतर्मन में हमारी पहचान बनकर बस जाती हैं।

इस प्रक्रिया को अगर सचेत होकर किया जाए तो आप अपने मन से वे बातें कह सकते हैं जो आपको बेहतर जीवन की ओर लेकर जाए। इसी क्रिया को स्व-सम्मोहन कहा जाता है। इसे आप किसी कंप्यूटर को प्रोग्राम करने की प्रक्रिया जैसा समझ सकते हैं जिसके द्वारा मन में सकरात्मक विचारों और सुझावों के बीज बोये जाते हैं। इसकी मदद से असंतुष्टि को धैर्य, आत्मविश्वास और स्व-नियन्त्रण में बदला जा सकता है।

 

स्व-सम्मोहन आपकी मदद कैसे कर सकता है?

हम सभी जाने अनजाने खुद को नकरात्मक बातें कहते रहते हैं। इसी क्रिया को पूरी तरह सचेत होकर सकरात्मक विचारों की तरह किया जाना ही स्व-सम्मोहन है। “मैं एक सक्षम इंसान हूँ और इस परिस्थिति में खुद को सम्भाल सकता हूँ ” ऐसा ही एक सकरात्मक सुझाव है जो आप खुद को लगातार देते हैं। सम्मोहन में ये बातें आपको कोई और व्यक्ति कहता है लेकिन स्व-सम्मोहन में आप स्वयं खुद को सुझाव देते हैं।

इन सुझावों को दिनभर मन में दोहराना आपको समस्या से निपटने में मदद कर सकता है। लेकिन स्व-सम्मोहन की प्रक्रिया में आप खुद को शिथिल करते हैं ताकि मन ऐसे सुझाव को पूरी तरह स्वीकारने की स्थिति में आ जाए। इस तरह कम समय और मेहनत में आप ज्यादा बदलाव महसूस करते हैं।

 

स्व-सम्मोहन कैसे करें?

  • खुद को सम्मोहित करने के लिए एक निजी वातावरण ढूढें। यह जगह शांत और आरामदायक होनी चाहिए तथा आपके उपयोग के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।
  • अपनी जगह पर बैठकर ऐसी एक आदत के बारे में सोचें जो आप बदलना चाहते हैं। इसके लिए एक सकरात्मक और सरल सुझाव ढूंढें जो बदलाव में आपकी मदद कर सकता है। आप चाहें तो इसे लिख भी सकते हैं।
  • अपने आस-पास के सभी विकर्षणों को दूर करें। फ़ोन, टीवी आदि सभी गैजेट को बंद करें।
  • एक आरामदायक कुर्सी पर बैठें और सहज हो जाएं।
  • आँखें बंद करें और अपने शरीर को सहज अवस्था में जाने दें।
  • अब धीरे-धीरे 5 से लेकर 1 तक उलटी गिनती गिनना शुरू करें। हर गिनती पर खुद को थोडा और सहज करें तथा दिमाग को पूरी तरह आराम करने दें। पैर से लेकर सिर तक हर मांसपेशी को ढीला छोड़ दें।
  • सहज हो जाने पर उस सुझाव को दोहराएं जो आपने शुरुआत में सोचा था। इस सरल और सकरात्मक वाक्य को बार-बार दोहराना शुरू करें। ध्यान रखें, वाक्य को इस तरह दोहराएं की मन असहज न हो। ज्यादातर लोग वाक्य को धीमी गति से दोहराना पसंद करते हैं।
  • अपनी हर इंद्री को इस वाक्य से जोड़ें और मन में कल्पना करें। शुरुआत में ज़रूरत लगने पर आप इस वाक्य को रिकॉर्ड कर सुन भी सकते हैं।
  • इस क्रिया को कुछ मिनटों तक दोहराते रहें। फिर 1 से लेकर 5 तक गिनें और धीरे से आँखें खोलें।
  • कुर्सी से उठने के पहले ध्यान दें की आप कैसा महसूस कर रहे हैं।

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स्व-सम्मोहन किसे करना चाहिए?

स्व-सम्मोहन की क्रिया हर वह इंसान कर सकता है जो किसी न किसी आदत या समस्या से जूझ रहा है। आत्मविश्वास की कमी, उदासी, आलस, पढाई में मन न लगना, सुबह जल्दी न उठ पाना जैसी साधारण समस्याओं में तो यह आपकी मदद कर ही सकता है , साथ ही किसी शारीरिक और मानसिक रोग के उपचार को तेज़ करने में भी मदद कर सकता है।

इसे आप कभी भी कर सकते हैं लेकिन रोजाना सोने से पहले इस क्रिया को करने पर जल्द परिणाम मिलते हैं।

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