क्या आप भी बहाने ढूंढतें हैं सुबह बिस्तर में दो पल और बिताने के लिए, अपनाएं यह उपाय

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image credits: Dreams

सुबह जल्दी उठने से आप बेहतर सेहत, कम तनाव  आदि कई फायदे पाते हैं। पर सुबह उठाना कई लोगों के लिए इतना आसान नहीं है। मौसम, मूड और नियम लोगों को इस आदत को अपनाने से रोक सकते हैं लेकिन संकल्प, कोशिश और दृढ़ता आपकी मदद कर सकती है।

अगर आप भी सुबह जल्दी नही उठ पा रहे हैं तो इन 6 उपायों को ज़रूर आजमाएँ-

 

रात में नीली रौशनी से बचें 

सिर्काडियन ताल शरीर के अंदर घड़ी की तरह काम करती है तथा सोने, उठने व् अन्य क्रियाओं का एमी तय करती है। रोजाना आप जितने बजे सोते हैं, उतने बजे ये आपके शरीर में मेलाटोनिन नामक हॉर्मोन का स्त्राव करती है ताकि आप आराम की मुद्रा में आ जाएँ।

यह ताल रौशनी के प्रभाव में आ सकती है। जब सूरज आसमान में होता है तो इसी टाल की वजह से आप उर्जावान महसूस करते हैं। वहीं अँधेरा होने पर यह शरीर में सोने के हॉर्मोन बहाती है। पर रोजाना कृत्रिम रौशनी में बीतने वाली हमारी रातें इस ताल में बाधा बन सकती है। नीली रौशनी, जो फ़ोन, लैपटॉप आदि की स्क्रीन से निकलती है, सबसे ज्यादा प्रभावी होती है। इसलिए कोशिश करें की सोने से आधे घंटे पहले ऐसी रौशनी से दुरी बनाई जाए।आप नीली रौशनी को रोकने वाले चश्मे भी रात में उपयोग कर सकते हैं।

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मेलाटोनिन लें 

यह नींद लाने के लिए सबसे प्रमुख हॉर्मोन है और आपको आराम देने का काम करता है। अगर आप रात में सो नहीं पाते हैं तो इसी हॉर्मोन के सप्लीमेंट लेकर आप गहरी नींद पा सकते हैं। चिंता न करें, नींद की दवाओं की तरह इस सप्लीमेंट के कोई दुष्प्रभाव नहीं होते।

देखा जाता है की इस हॉर्मोन को लेने वालों में नींद जल्दी आती है तथा 15 प्रतिशत बेहतर और गहरी हो जाती है। इतना ही नहीं, यह हॉर्मोन आपके शरीर की ताल को भी संतुलित करता है। इसका मतलब आप आसानी से अपने सोने और उठने के नए नियम को बना सकते हैं तथा इसका पालन भी कर सकते हैं। अक्सर सोने का समय बदलने के दौरान होने वाली थकान से भी इस हॉर्मोन से बचा जा सकता है।

इस हॉर्मोन को नियम बदलने की कोशिश के शुरुआती 1-2 हफ्ते लें। इसके बाद इसका सेवन बंद कर दें।

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जितने समय सोना चाहते हैं उसके आधे घंटे पहले बिस्तर पर पहुंचें 

सोने में मुश्किल की एक बड़ी वजह हमारा सचेत और बकबक करता हुआ मन है। दिनभर बहुत सारा काम करने के बाद रात में थकान के बावजूद न सो पाने की भी यही वजह है। अक्सर लोग मन के इस शोर से इतना परेशान हो जाते हैं की सोने के लिए मूवी, संगीत या किताबों का सहारा लेते हैं।

रात में सोने के लिए पहले आपको मन को शांत होने के लिए कुछ समय देने की ज़रूरत है। इसलिए सोने के समय को बदलने के लिए इस समय से कम से कम आधे घंटे पहले बिस्तर पर पहुँचने और बाहर के सभी विकर्षणों को हटा दीजिये। फिर योग निद्रा, साँसों पर ध्यान देना या मन में एक सुखद कहानी चलाना जैसी क्रियाओं का उपयोग सोने की कोशिश करें।

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अलार्म बजते ही बिस्तर से बाहर निकलें 

ये कई लोगों के लिए बेहद मुश्किल कदम होता है। चिंता, ठंड जैसी वजहें आपको बिस्तर का आराम छोड़ने नहीं देती हैं और अन्तः लाख कोशिशों के बावजूद आपके हाथ ग्लानी ही लगती है।

पर इस नुस्खे से आप बिना जाने ही तय समय पर बिस्तर से बाहर निकल पाएँगे। ऐसा करने के लिए मन में यह तस्वीर साफ़ रूप से बनानी होगी-  अगर सुबह मेरा अलार्म बजता है, तो मैं तुरंत बिस्तर से बाहर हो जाऊँगी, चाहे कुछ भी हो जाए!

इस बात को मन में बैठा लेने के लिए रोजाना सोने से पहले 2 मिनट तक इसे दोहराएं। अगले 20-30 दिन तक इसे रोजाना करें और सुबह उठने की आदत को नियम में शामिल होता देखें।

 

अलार्म घड़ी को स्मार्ट बनाएं 

अगर आप अपने स्मार्टफोन को घड़ी की तरह उपयोग कर रहे हैं तो इसका पूरा लाभ उठाएं। कुछ खास एप आपको बिस्तर से उठा कर ही दम लेंगे और शुरुआती दिनों में आपको ऐसे ही साधनों की ज़रूरत है।

कई एप आपको अलार्म बंद करने के लिए कुछ कदम चलने की शर्त रखते हैं वहीं कई और एप रात में खिंची गयी तस्वीर के समान तस्वीर खींचने पर ही अलार्म बंद करते हैं। यकीनन सुबह आधी नींद में ऐसी शर्तें आपको पसंद नही आएंगी लेकिन ये आपको सुबह उठाने में सफल ज़रूर होंगी।

 

खुद से हो रही बातों पर ध्यान दें 

अंत में इन सभी उपायों की सफलता आपके संकल्प पर ही निर्भर करेगी। ज़ाहिर है, यह संकल्प आपके विचारों से ही उभरता है और अगर ये सकरात्मक नहीं हैं तो आपकी सभी कोशिशें विफल हो सकती हैं।

अक्सर हम रोजाना खुद से कहते हैं की हमें सुबह जल्दी उठना “है” या “होगा ही” ; यह बात आपकी चाह के विपरीत जाने का इशारा करती है और कई बार अंदर से विरोध उत्पन्न कर देती है।

इनकी जगह मै सुबह उठना “चुनती हूँ”, “पसंद करती हूँ” “कर सकती हूँ” जैसी बातें कहना शुरू करें। यह बदलाव आपको बड़ी मदद दे सकता है।

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