विश्व योग दिवस: वापस फॉर्म में आने के लिए अपनाएं यह रूटीन

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image credits: Women Fitness

रोज़ाना 10 मिनट योग करना हफ्ते में एक बार 2 घंटे पसीना बहाने से बेहतर है। पर यह जानते हुए भी कई बार छुट्टी, बीमारी या अन्य कारणों से हम अपने योगाभ्यास से दूर हो जाते हैं और फिर दोबारा अपने नियम को अपना नहीं पाते।(how to start yoga at home for beginners in hindi)

अगर आपके साथ भी यही मुश्किल है तो इस योग दिवस अपना संकल्प द्रढ़ करें और इस रूटीन से दोबारा फॉर्म में आएं-

 

पहला दिन: धीमे शुरुआत करें

अगर आप लम्बे समय से व्यायाम नहीं कर रहे हैं तो एक दम से लम्बा चौड़ा अभ्यास अपनाना सही नहीं होगा। पहले दिन आसान शुरुआत करें। अपने साथ योगाभ्यास में एक लक्ष्य लेकर योगाभ्यास के लिए आएं; शीर्षासन या मंडूकासन कर पाने का लक्ष्य नहीं, बल्कि शांत, स्वस्थ या जुड़ा हुआ महसूस करने का लक्ष्य।

आप योगाभ्यास की शुरुआत सुक्ष्म व्यायाम से कर सकते हैं जिसके बाद हल्का वार्मअप करने बाद आसनों का अभ्यास शुरू करें। आप चाहें तो पहले दिन प्राणायाम और सूर्य नमस्कार का अभ्यास भी कर सकते हैं।

 

दूसरा दिन: संकल्प द्रढ़ करें

आज आपको शरीर के हल्के दर्द, आलस या समय न मिल पाने जैसे कारण रोक सकते हैं। ऐसे कारणों को बीच में न आने दें और पूरी उर्जा और उत्साह के साथ योगाभ्यास के लिए तय जगह पहुंचें। हो सकता है पिछले दिन के अभ्यास ने आपको सिखाया हो की दिन के कुछ समय या घर की कुछ जगह आपके अभ्यास के लिए बेहतर है। इन बातों पर गौर करें और अपने लक्ष्य पर विचार करें।

अगर पिछले दिन की कसरत से आपका शरीर अकड़ा हुआ महसूस हो रहा हो तो आज आसान आसनों से शुरुआत करें। अगर ऐसा नहीं है तो आसनों की कठिनाई बढाएं।

 

तीसरा दिन: ज़बरदस्ती न करें

अगर आप नियम पर कायम नहीं रह पा रहे या उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पा रहे तो हिम्मत न हारें। आपका शरीर धीरे-धीरे कर योगासनों में बेहतर होता चला जाएगा। इस दिन से अपने विचार और अनुभव एक डायरी में लिखने शुरू कर दें। अगर समय से जुड़े आपके कुछ लक्ष्य हैं तो इन्हें भी डायरी में चिन्हित करें तथा इनकी ओर बढने का प्रयास करें।

अक्सर योग करते हुए लोग भावनाओं में बड़े परिवर्तन महसूस करते हैं। अगर आप भी ऐसा महसूस कर रहे हैं तो इन्हें डायरी में लिखें। अगर आप इन बदलावों को स्पष्टता से नहीं देख पा रहे तो योग के आखिर में शवासन को जोड़ें तथा मन के विचारों पर ध्यान देने की कोशिश करें।

 

चौथा दिन: आसान है 

चौथे दिन योगाभ्यास के लिए आते हुए आप विजयी महसूस कर सकते हैं। मन के कई बहानों पर विजय प्राप्त कर आप योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने में सफल हुए हैं। आज के दिन आप योग द्वारा सुझाई श्रृंखला सूर्य नमस्कार, विन्यास आदि का अभ्यास कर सकते हैं।

ये आसन श्रृंखला आपको शरीर से जुड़ाव और सहज बहाव का एहसास करवाएगी। हो सकता है शुरुआत में आप कुछ आसनों में असहज महसूस करें, पर इन्हीं आसनों को ज्यादा समय देने से आप अपने शरीर के लिए नई सम्भावनाएं खोल सकते हैं।

 

पांचवा दिन: खुद पर जीत ही असली जीत है 

योग कोई वर्कआउट नहीं, बल्कि जीने का तरीका है। अपने अभ्यास के पांचवे दिन आप समझ चुके होंगे की आप सिर्फ सेहत ही बेहतर नहीं कर रहे, बल्कि मानसिक रूप से मुश्किलों को आसान बनाना सीख रहे हैं। आप आज का दिन शरीर में विभिन्न हिस्सों की अकडन और दर्द को दूर करने के लिए दे सकते हैं।

ध्यान दें की पहले दिन शरीर के जिन हिस्सों में दर्द था, क्या आज भी वहीं दर्द बना हुआ है। आम तौर पर अकडन और दर्द अभ्यास के साथ अपनी जगह बदलता जाता है तथा सिर्फ उस हिस्से में रह जाता है जहाँ से यह शुरू हुआ है। इसे पहचाने और इसके कारण पर गौर करें। अगर पोस्चर या कमजोर मांसपेशियां पीड़ा की वजह बन रही हैं तो इन कारणों को दूर करने के लिए कार्य करें।

 

इन पांच दिनों में आप शारीरिक और मानसिक रूप से योग के नियमित अभ्यास के लिए तैयार हो चुके हैं। अपने अभ्यास को जारी रखें और पुरे संकल्प से शान्ति और स्वास्थ्य की ओर कार्य करें।