पीपली का सेवन पलभर में खत्म कर सकता है आपका रोग

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Image Credits: Health Indian

पीपली एक पौधा है जिसके फल को सदियों से आयुर्वेदिक दवा के रूप में उपयोग किया जा रहा है। शहतूत की तरह दिखने वाला यह फल भूख बढ़ाने, अपच मिटाने, पेट दर्द ठीक करने, जलन, गैस, दस्त और कोलेरा के उपचार में किया जाता है।

इसके अलावा पीपली का उपयोग फेफड़ों से जुड़े  रोग;अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और कफ के उपचार में किया जाता है। इसके अन्य उपयोग की प्रकार हैं- सिरदर्द, दांत का दर्द, विटामिन बी 1 की कमी, कोमा, मिर्गी, बुखार, स्ट्रोक, अनिद्रा, कुष्ठ रोग, थकान, मांसपेशियों में दर्द, लकवा, सोरायसिस, कृमि, सांप का कांटना, टिटनेस, प्यास, टीबी ट्यूमर।

यह कैसे काम करता है?

पीपली में पिपरिन नामक एक रसायन होता है जो ऐसे जीवाणु से लड़ने में सक्षम है जिनसे लोगों को संक्रमण हो सकता है। यह आँतों की अंदरूनी दिवार में ऐसे बदलाव लेकर आता है जिससे दवाएं शरीर द्वारा आसानी से सोखी जा सकें।

पीपली के लाभ-

लिवर के रोग 

जो लोग तेलीय आहार और जंक फ़ूड खाते हैं उन्हें लिवर के रोग होने की सम्भावना ज़्यादा होती है। पीपली ऐसे में थके हुए लिवर की क्षतिपूर्ति करती है। साथ ही शरीर से विषाक्त तत्व बाहर कर मेटाबोलिज्म दुरुस्त करती है।

वेट लॉस 

पीपली फैटी अम्ल जलाने में मदद करती है। इसके बदले में पीपली के लगभग शून्य दुष्प्रभाव होते हैं। यह अन्य वेट लॉस करने का दावा करने वाली दवाओं से बहुत बेहतर है। साथ ही विषाक्त तत्वों के कारण शरीर में रुकी वसा को भी बाहर करने में पीपली मदद करती है।

मधुमेह 

मधुमेह शायद सबसे गंभीर बिमारी कही जा सकती है क्यूंकि यह शरीर के हर तंत्र में बदलाव ला सकती है। भारत में लगभग 6 करोड़ मरीज़ हैं जो मधुमेह से ग्रसित हैं। पीपली रक्त में ग्लूकोस की मात्रा को नियमित करती है जिससे आप मधुमेह को प्रबंधित कर पाते हैं। इन्सुलिन का उत्पादन भी इस औषधि से बढ़ता है।

संक्रमण 

संक्रमण हर मौसम में आप पर हमला कर सकते हैं। ऐसे संक्रमण से बचने और लड़ने के लिए पीपली का सेवन सबसे लाभदायक है। साइनस के बैक्टीरिया से लेकर फ़ूड पोइज़निंग के बैक्टीरिया तक हर संक्रमण के उपचार के लिए पीपली प्रभावी है।

कफ 

अगर आप कफ से परेशान हैं तो पीपली आपकी मदद कर सकती है। इसका प्रभाव पाने के लिए एक से दो ग्राम पीपली को थोड़े से घी में फ्राई कर लें। एक बार ठंडा हो जाने पर इसे पूरा निगल लें। आप पीपली और शहद को मिलाकर निगलने से खराश से भी छुटकारा पा सकते हैं।